संसद से परे हमारे कार्यों की जांच कोई भी सत्ता नहीं कर सकती: राज्यसभा में बोले सभापति जगदीप धनकड़

राज्यसभा के सभापति जगदीप धनकड़ ने कहा है कि सदन के सदस्यों के कार्यों की जांच का अधिकार संविधान के तहत संसद से परे किसी सत्ता का नहीं है।

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राज्यसभा के सभापति जगदीप धनकड़ ने कहा है कि संसद से परे ऐसी कोई सत्ता नहीं है, जो सदन के सदस्यों के कार्यों की जांच कर सकती है। धनकड़ ने यह तब कहा जब कांग्रेस सांसद रजनी अशोकराव पाटिल को बजट सत्र के मौजूदा हिस्से के लिए सदन की कार्यवाही का वीडियो बनाने के आरोपों के चलते निलंबित करने का प्रस्ताव पेश किया गया। धनकड़ तृणमूल कांग्रेस के सांसद जवाहर सरकार के उस सुझाव का जवाब दे रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि विपक्ष नहीं चाहता कि आसन से कोई ऐसा फैसला हो, जिसपर कानून के किसी फोरम में सवाल उठे।

'संसद से परे हमारे कार्यों की जांच कोई भी सत्ता नहीं कर सकती'
टीएमसी सांसद जवाहर सरकार ने आसन से कहा, ऐसा कदम नहीं उठाया जाए जो टिकाऊ नहीं हो। उनकी दलील थी कि ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किए गए एक वीडियो से जो सदन की कार्यवाही के बाद हुई, उससे सदन 'भूतलक्षी तौर पर बाधित' नहीं हो सकती। इसपर सभापति धनकड़ बोले, 'मैं सदन को विश्वास दिलाता हूं कि संसद से परे ऐसी कोई सत्ता नहीं है, जो हमारे कार्यों की जांच करे......मैंने 7 दिसंबर, 2022 को भी संकेत दिया था, मैं दोहराता हूं- हम संविधान के अल्टीमेट आर्किटेक्ट हैं। संविधान के तहत ऐसी कोई सत्ता नहीं है, जो उन मुद्दों की ओर देख भी सके, जो हमारे मतलब का है।'

'मैं अपने मतदाताओं के विश्वास की रक्षा करूंगा'
धनकड़ बोले कि सुझाव दिए गए थे कि एक बाहरी एजेंसी से तत्काल जांच कराई जाए, लेकिन कहा कि इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया गया। सभापति ने कहा, 'मैंने कहा नहीं, वह आइडिया मुझे नहीं जंचा.... मैंने सभापति के रूप में कहा कि मैं अपने मतदाताओं के विश्वास की रक्षा करूंगा, हम इससे सदन में ही निपटेंगे और कोई भी बाहरी सहायता नहीं लेंगे। '

कांग्रेस सांसद को पूरे सत्र के लिए किया है सस्पेंड
वो बोले, पाटिल 'को मौजूदा सत्र के बाकी हिस्से के लिए सस्पेंड किया गया है और तबतक जबतक कि सदन की विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट विचार के लिए उपलब्ध नहीं होती, मैं सदन के समक्ष यह प्रस्ताव विचार के लिए रखता हूं।' वह बोले की 'सदन की भावना का ख्याल रखते हुए यह निर्देश दिया जाता है कि वह सभी कदम उठाए जाएं जो निलंबित सांसद पर लागू होता है और यह मौजूदा सत्र के बाद बचे समय, विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट सदन के विचार के लिए उपलब्ध होने तक के लिए है....'

गुरुवार को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई बहस का जवाब दे रहे थे, तो विपक्षी सांसद जबरन सदन के वेल में घुस आए थे और पीएम मोदी के पूरे 90 मिनट के भाषण के दौरान नारेबाजी करते रहे। कांग्रेस एमपी मुकुल वासनिक का आरोप है कि इस दौरान लाइव टेलीकास्ट में भेदभाव किया गया और सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी के भाषण और ट्रेजरी बेंच की ओर ही फोकस किया गया।

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