'भारत ने किसी पर हमला नहीं किया, मतलब ये नहीं कि आत्मरक्षा में बल प्रयोग से हिचकिचाएगा'
नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ किया है कि इतिहास में भारत कभी भी आक्रमक नहीं रहा, लेकिन इसका मतलब ये नहीं समझा जाना चाहिए कि जब आत्मरक्षा की जरूरत पड़ेगी तो वह ताकत का इस्तेमाल करने में जरा भी हिचकिचाएगा। रक्षा मंत्री ने सियोल डिफेंस डायलॉग के दौरान अपने भाषण में ये बात कही है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मुताबिक, 'डिफेंस डिप्लोमेसी भारत की रणनीतिक टूलकिट के मुख्य आधारस्तंभ हैं। डिफेंस डिप्लोमेसी और ताकतवर डिफेंस फोर्स को मेंटेन करना एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।' उन्होंने देश के दुश्मनों की ओर इशारा करते हुए दो टूक कहा कि, हालांकि भारत 'इतिहास में कभी भी न तो आक्रामक हुआ है और न कभी होगा......' लेकिन उन्होंने साथ ही ये भी साफ कर दिया कि, 'इसका मतलब ये नहीं कि भारत खुद की रक्षा करने के लिए कभी भी बल प्रयोग करने से हिचकिचाएगा।'
इस दौरान रक्षा मंत्री ने आतंकवादी संगठनों का साथ देने वालों और उन्हें धन और बाकी सुविधाएं उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ भी ठोस अंतरराष्ट्रीय कदम उठाने पर जोर दिया है। जाहिर है कि राजनाथ सिंह का इशारा कश्मीर को लेकर मौजूदा वक्त में पाकिस्तान की ओर से पैदा किए जा रहे हालातों की ओर है। राजनाथ सिंह के मुताबिक हम जो विभिन्न तरह की सुरक्षा चुनौतियां झेल रहे हैं, उसमें सबसे बड़ी चुनौती आतंकवाद की है और दुनिया का कोई भी देश आज आतंकवाद से सुरक्षित नहीं है।
इस दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि दुनिया को आतंकवाद से निपटने के लिए उन्हें मिलने वाली वित्तीय सहायता और उनके पनाहगारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी होगी, तभी आतंकवाद पर लगाम लगाया जा सकता है। बता दें कि रक्षा मंत्री तीन दिवसीय कोरिया दौरे पर गए हैं।
गौरतलब है कि पिछले महीनें ही राजनाथ सिंह ने ये कहकर पाकिस्तानी हुक्कमरानों के पसीने छुड़ा दिए थे कि मौजूदा समय में भारत की पमाणु नीति 'पहले प्रयोग नहीं' है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि भविष्य में इस नीति को बदलने पर विचार नहीं हो सकता। इसके बाद ही इमरान खान ने यह शिगूफा छोड़ा था कि पाकिस्तान अब 'पहले प्रयोग नहीं' की नीति पर चलेगा। हालांकि, एक दिन बाद ही पाकिस्तानी आर्मी ने इमरान को औकात दिखाते हुए कह दिया कि उसकी परमाणु नीति में कोई बदलाव नहीं होने वाला।












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