राजीव गांधी हत्याकांड: केंद्र ने रिहाई के खिलाफ sc में दायर पुनर्विचार याचिका, कहा-हमें पक्ष रखने का मौका नहीं
Rajiv Gandhi assassination case, केंद्र सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में दोषियों की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है। शीर्ष न्यायालय ने बीते शुक्रवार 11 नवंबर को नलिनी समेत छह दोषियों की रिहाई के आदेश दिए थे। इनमें नलिनी श्रीहरन, उसका पति वी श्रीहरन के अलावा संथन, रॉबर्ट पायस, जयकुमार और रविचंद्रन शामिल हैं। इनमें श्रीहरन और संथान श्रीलंका के नागरिक हैं।

केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर इस पुर्नविचार याचिका में कहा कि, केंद्र सरकार को अपनी बात कहने का पर्याप्त अवसर दिए बिना दोषियों की रिहाई का फैसला किया गया। केंद्र ने कहा कि सुनवाई के दौरान प्रक्रियात्मक चूक हुई, जिसकी वजह से केस में केंद्र सरकार की भागीदारी ना के बराबर रही। केंद्र ने इसे न्याय देने में विफलता बताया है।
केंद्र सरकार ने कोर्ट में कहा कि दोषियों ने केंद्र सरकार को याचिका में पार्टी नहीं बनाया। याचिकाकर्ताओं की इस गलती के कारण मामले की सुनवाई में भारत सरकार अपना पक्ष नहीं रख पाई। इससे नैचुरल जस्टिस के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है। इसके अलावा रिहा किए गए दोषियों में 2 श्रीलंकाई नागरिक हैं। जो कई नियमों के अधीन हैं।
केंद्र ने अपनी याचिका में जोर देकर कहा कि,देश के कानून के तहत दोषी ठहराए गए दूसरे देश के आतंकवादी को छूट देने का अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव के अंतर्गत आता है। इसलिए यह मामला भारत सरकार के तहत आता है। शीर्ष अदालत को इतने गंभीर मामले में भारत सरकार का पक्ष जानना बेहद जरूरी था। इस मामले का असर देश के लॉ एंड ऑर्डर भी पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 18 मई को इसी केस में दोषी पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश दिया था। बाकी दोषियों ने भी उसी आदेश का हवाला देकर कोर्ट से रिहाई की मांग की थी। कोर्ट ने माना था कि दोषियों ने 30 साल से ज्यादा का वक्त जेल में काटा है और सजा के दौरान उनका बर्ताव ठीक था। वहीं सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी ने भी दोषियों के प्रति नरम रुख अपनाया था, जिससे इनकी रिहाई को बल मिला था।












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