Raisina Dialogue 2025: 'व्यापार से युद्ध तनाव' तक रायसीना डायलॉग में इन मुद्दों पर रहेंगी सबकी निगाहें
Raisina Dialogue 2025: विश्व में चल रहे राजनैतिक, भगौलिक और व्यापारिक उठा पटक के बीच रायसीना डायलॉग की शुरूआत हो चुकी है। विश्व भर में राजनीतिक स्थिति और व्यापारिक कूटनीति में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है, मीडिल ईस्ट में तनाव बरकरा है इन सब के बीच दिल्ली में 17 मार्च से शुरु हुआ ये रायसीना डायलॉग 19 मार्च तक चलेगा।
इस बार की ये बैठक काफी अहम मानी जा रही है और कई मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद भी की जा रही है। क्या है रायसीना डायलॉग और इस बार की बैठक इतनी अहम क्यों हैं? आईए विस्तार से जानते हैं..

Raisina Dialogue 2025: क्या है रायसीना डायलॉग?
भारत ही नहीं बल्कि विश्व के सभी देशों की कूटनीति और विदेश नीति के लिए अहम इस डायलॉग के 10वें संस्करण का सोमवार, 17 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया। इसमें न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन भी उपस्थित थे।
भारतीय विदेश मंत्रालय साल 2016 इसका आयोजन करता आ रहा है जिसे म्यूनिख सम्मेलन और शांगरी-ला डायलॉग के बराबर माना जाता है। इस बार इस बैठक का विषय "कालचक्र" रखा गया है।
इस बार Raisina Dialogue में छह महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की उम्मीद है।
- राजनीति, प्रकृति, डिजिटल दुनिया, चरमपंथ, भारत और शांति पर चर्चा संभव है।
Raisina Dialogue 2025 में दिखी भारत की 'विदेशी कूटनीति' की झलक
वैसे तो रायसीना डायलॉग की बैठक में सभी देश प्रतिभाग करते हैं लेकिन इस बार इसमें कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं। भारत-पाक के रिश्ते में तनाव है, ऐसे में कोई भी पाकिस्तानी प्रतिनिधि इस बैठक में उपस्थित नहीं हो रहा है।
वहीं बांग्लादेश में हुए तख्ता पलट से दोनों देशों के बीच दूरियां बढ़ गई हैं और इसका असर इस बैठक में साफ-साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि, चीन के साथ भारत के रिश्ते में अक्टूबर 2024 में पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति की बैठक के बाद नरमी देखी जा रही है। उम्मीद है इस बैठक में दोनों देशों के बीच शांति को लेकर किसी सहमति की संभावना है।
वहीं कनाडा में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद कनाडा-भारत के रिश्ते में भी नरमी देखने को मिल सकती है। इसमें कनाडा के पूर्व पीएम स्टीफन हार्पर भी हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा भूटान, मालदीव, नेपाल और मॉरिशस के विदेश मंत्री शामिल हो रहे हैं।
Raisina Dialogue 2025: इन मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद
1. रायसीना डायलॉग में इस बार कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। मध्य एशिया में चल रहे तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध में शांति को लेकर ट्रंप के रुख पर भी चर्चा की उम्मीद है।
2. अमेरिकी सत्ता में ट्रंप की वापसी के बाद वर्ल्ड ट्रेड में काफी उठा पटक देखने को मिला है। भारत को ट्रंप की 'टैरिफ'व्यापार नीति से काफी आर्थिक नुक्सान हो रहा है इस पर भी चर्चा होने की संभावना है।
3. इस बैठक में यूरोपीय-अमेरिकी नेताओं के बहस की उम्मीद होगी। इसमें अमेरिका की ओर से राष्ट्रीय खुफिया निदेशक हैं तुलसी गबार्ड प्रतिभाग कर रही हैं जो अमेरिका और रूस के बेहतर संबंध की वकालत कर चुकी हैं।
4. अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रॉसी का यूक्रेन युद्ध और ईरान के साथ परमाणु वार्ता पर चर्चा की भी संभावना है।
बता दें कि हाल ही में हुए म्यूनिखा शिखर सम्मेल में अमेरिका की बदलती विदेश नीतियों पर बहस के दौरान माहौल में सरगर्मी देखने को मिली थी। इस डायलॉग में भी बहस की संभावना हैं।
Raisina Dialogue 2025: रुस-युक्रेन मुद्दे पर अमेरिका के रुख पर चर्चा
- इस वार्ता में यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा भी शामिल हो रहे हैं।
- यहां समझने वाली बिंदु यह है कि कुछ समय पहले ही एक शांति बैठक में ट्रंप और जेलेंस्की के बीच टकराव देखने को मिला था।
- इस बैठक में रुस-युक्रेन शांति वार्ता पर क्या असर पड़ेगा ये देखने वाली बात है।
- आपको बता दें कि इस बार इस इवेंट में रूसी विदेश मंत्री शामिल नहीं हो रहे हैं। 2023 की इसी बैठक में शांति समझौते पर माहौल तल्ख हो गया था।
Raisina Dialogue 2025: 'क्वाड' पर वार्ता पर चर्चा संभव
वहीं इस बार एशिया-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर भी चर्चा होने की उम्मीद है। इसमें क्वाड के चारों देश भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के वरिष्ठ नौ सेना अधिकारीयों की उपस्थिति की संभावना है।
वहीं इस साल के क्वाड लीडर शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत करेगा। ऐसे में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर क्वाड में अहम निर्णय लिए जा सकते हैं।












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