रेल बजट: बढ़ेंगी ट्रेनों की संख्या पर नहीं बढ़ेगा किराया

रेल मंत्री के इस बजट में सबसे बड़ी चुनौती होगी घाटे को पूरा करना। अगर पिछले पांच साल में अलग-अलग स्रोतों से हुए घाटों की बात करें तो रेलवे को 2486.68 करोड़ रुपए का घाटा सिर्फ आयरन ओर की माल ढुलाई में ही हुआ है। यह हम नहीं बल्कि सीएजी की रिपोर्ट कह रही है। इसके अलावा हर साल रेलवे करोड़ों रुपए मंत्री, विधायकों से लेकर छात्रों तक लोगों को कंसेशन के रूप में माफ कर देता है। रेलवे स्टेशनों के विकास, रेल कोच फैक्ट्री का निर्माण, इंजन फैक्ट्री, नई लाइनें बिछाना रेलवे के लिये अन्य चुनौतियों के रूप में खड़े हैं।
इन चुनौतियों के बीच लोक लुभावन बजट बनाना मल्लिकार्जुन खड़गे की प्राथमिकता होगी। ऐसा इसलिये क्योंकि चुनाव के इस मौसम में देश की जनता को नाराज नहीं किया जा सकता है। जो भी ऐलान सदन में आज होंगे, उसका सीधा असर वोट बैंक पर पड़ेगा। जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें नहीं हैं, उन राज्यों के स्टेशनों से नई ट्रेनें चलायी जा सकती हैं।
रेल बजट के लाइव अपडेट वनइंडिया पर
बस कुछ ही देर में रेल बजट प्रस्तुत होने वाला है, इसके लाइव अपडेट आप वनइंडिया पर देख सकते हैं। कितनी नई ट्रेनें चलीं, कितना किराया बढ़ा, रिजर्वेशन चार्ज बढ़े या घटे, यह सब जानने के लिये बने रहिये हमारे साथ।












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