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'ऑपरेशन सिंदूर' पर संसद में Rahul Gandhi का तीखा हमला, बोले— PM मोदी कहें कि ट्रंप झूठे हैं

Rahul Gandhi Operation Sindoor: 29 जुलाई 2025 को लोकसभा में उस वक्त सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली चुनौती देते हुए सवाल उठाया कि क्या वह संसद में यह कहने की हिम्मत रखते हैं कि "डोनाल्ड ट्रंप झूठ बोल रहे हैं"?

राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) की शुरुआत के महज 22 मिनट बाद ही सरकार ने पाकिस्तान को संदेश भेज दिया कि भारत युद्ध नहीं चाहता।

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उन्होंने इसे "तत्काल आत्मसमर्पण" बताया और केंद्र की रणनीति को प्रधानमंत्री की छवि बचाने वाला एक प्रचारात्मक कदम करार दिया। अपने भाषण में उन्होंने न सिर्फ ऑपरेशन की समयसीमा पर सवाल उठाया, बल्कि सरकार की सैन्य नीति, राजनीतिक इच्छाशक्ति और विपक्ष के समर्थन की अनदेखी पर भी नाराज़गी जताई।

Rahul Gandhi Trump statement: "ट्रंप झूठ बोल रहे हैं, मोदी जी कहें यह बात"

राहुल गांधी ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किए गए 'सीज़फायर कॉल' के दावे को लेकर भी पीएम मोदी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर भारत की संप्रभुता और निर्णय क्षमता बरकरार है, तो प्रधानमंत्री को साफ तौर पर कहना चाहिए कि "ट्रंप झूठ बोल रहे हैं"।

राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि, ट्रंप ने कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर करवाया। अगर यह सच नहीं है, तो प्रधानमंत्री मोदी खुलकर कहें- ट्रंप झूठ बोल रहे हैं। अगर वे यह नहीं कह सकते, तो हमें सोचना होगा कि हमारी विदेश नीति कहां जा रही है।

Rahul Gandhi Operation Sindoor: "22 मिनट में खत्म हुआ ऑपरेशन सिंदूर"

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू होते ही महज 22 मिनट में पाकिस्तानी सरकार से संपर्क किया और कहा कि भारत लड़ाई नहीं चाहता। उन्होंने इसे "तत्काल आत्मसमर्पण" करार दिया और पूछा कि आखिर सरकार किस दबाव में इतनी जल्दी पीछे हट गई।

उन्होंने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर शुरू होते ही भारत सरकार ने पाकिस्तान को सूचना दी कि हम उनकी सैन्य साइट्स को निशाना नहीं बनाएंगे। यह कैसी रणनीति है? क्या यह राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी नहीं है?"

"सेना को नहीं मिली पूरी स्वतंत्रता"

राहुल गांधी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सेना को पूर्ण स्वतंत्रता नहीं दी गई, जो किसी भी सैन्य कार्रवाई की सफलता के लिए आवश्यक होती है। उन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने फौज को पूरी छूट दी थी।

राहुल गांधी ने कहा, "राजनाथ सिंह जी ने 1971 की तुलना की, लेकिन भूल गए कि 1971 में राजनीतिक इच्छाशक्ति थी। तब अमेरिका का 7वां बेड़ा हिंद महासागर में आ रहा था, फिर भी इंदिरा गांधी डरी नहीं। उन्होंने जनरल मानेकशॉ से कहा था- 6 महीने, 1 साल जो भी लगे, पूरी छूट के साथ युद्ध कीजिए। परिणाम यह हुआ कि 1 लाख पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया और एक नया देश बना- बांग्लादेश,"।

राहुल गांधी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की "छवि" को बचाना था। "यह पूरा ऑपरेशन प्रधानमंत्री की छवि प्रबंधन की कोशिश थी, न कि कोई ठोस रणनीतिक सैन्य कार्रवाई।"

"विपक्ष मजबूती से सरकार और सेना के साथ खड़ा रहा"

राहुल गांधी ने दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विपक्ष ने एकजुट होकर सरकार और सेना का समर्थन किया, चाहे सत्तापक्ष की तरफ से तंज और व्यंग्य ही क्यों न झेले हों। राहुल गांधी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने से पहले ही विपक्ष की सभी पार्टियों ने तय कर लिया था कि हम सेना और सरकार के साथ चट्टान की तरह खड़े रहेंगे।

हमने सत्ता पक्ष के नेताओं की व्यंग्यात्मक टिप्पणियों को नजरअंदाज किया और एकजुटता दिखाई। हमें गर्व है कि हमने विपक्ष के रूप में वह भूमिका निभाई जो हमें निभानी चाहिए थी।

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