‘मोदी और BJP विरोधी पोस्ट गायब’, सौरभ भारद्वाज के दावे से घिरे राघव चड्ढा, VIDEO में दी खुली चेतावनी
Saurabh Bhardwaj Raghav Chadha: आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज के एक दावे ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि राघव चड्ढा ने अपनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X की टाइमलाइन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के खिलाफ किए गए पुराने पोस्ट हटा दिए हैं। इस आरोप के बाद पार्टी के अंदरूनी मतभेद अब खुली बहस का विषय बन गए हैं।
'राघव चड्ढा ने मोदी और बीजपी विरोधी पोस्ट डिलीट किए'
सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने राघव चड्ढा की X टाइमलाइन को खंगाला। उन्होंने 'Modi' और 'BJP' सर्च किया, लेकिन कोई भी आलोचनात्मक पोस्ट नहीं मिला। उनके मुताबिक अब केवल दो पोस्ट बचे हैं, जिनमें 'Modi' शब्द है और वे भी प्रधानमंत्री की तारीफ वाले हैं। इस बयान ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राघव चड्ढा अपने राजनीतिक स्टैंड में बदलाव कर रहे हैं या फिर यह सिर्फ एक आरोप है, जिसे सियासी रंग दिया जा रहा है।

राघव चड्ढा का जवाब और VIDEO मैसेज (Raghav Chadha Response)
इसी विवाद के बीच राघव चड्ढा ने एक वीडियो जारी कर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ एक "स्क्रिप्टेड कैंपेन" चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक ही भाषा और एक जैसे आरोपों के साथ उन्हें टारगेट किया जा रहा है, जो यह दिखाता है कि यह कोई संयोग नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है।
राघव ने अपने वीडियो में संसद के दौरान दिए गए भाषणों की झलक भी दिखाई और कहा कि उन्होंने हमेशा पंजाब के मुद्दों को मजबूती से उठाया है। उन्होंने लिखा, "पंजाब मेरे लिए सिर्फ एक विषय नहीं, मेरा घर, मेरा कर्तव्य और मेरी आत्मा है।" वीडियो के अंत में उन्होंने फिल्मी अंदाज में कहा, "घायल हूं, इसलिए घातक हूं," जिसे कई लोग पार्टी नेतृत्व के लिए एक चेतावनी के तौर पर देख रहे हैं।
AAP का एक्शन: पद से हटाया गया
इस पूरे विवाद की शुरुआत 2 अप्रैल को हुई, जब आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा सांसदों के उपनेता पद से हटा दिया। इसके लिए राज्यसभा सचिवालय को पत्र भी भेजा गया। पार्टी ने उनकी जगह अशोक मित्तल को नया उपनेता नियुक्त किया। साथ ही यह भी कहा गया कि राघव को पार्टी कोटे से बोलने का समय न दिया जाए। यह फैसला अपने आप में बड़ा संकेत था कि पार्टी नेतृत्व और राघव के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा।
'मेरी खामोशी को कमजोरी मत समझो'
पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा ने 3 अप्रैल को एक और वीडियो जारी किया। इसमें उन्होंने कहा कि संसद में जनता के मुद्दे उठाना अगर अपराध है, तो वे यह अपराध करते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी आवाज दबाई जा सकती है, लेकिन उन्हें हराया नहीं जा सकता। "मैं वो दरिया हूं, जो वक्त आने पर सैलाब बनता है," यह लाइन उनके बयान का सबसे चर्चित हिस्सा रही।
पार्टी नेताओं का हमला
राघव चड्ढा के बयानों के बाद पार्टी के कई नेता खुलकर सामने आए। आतिशी मार्लेना, अनुराग ढांडा, सौरभ भारद्वाज और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान समेत कई नेताओं ने उन पर पार्टी लाइन से हटने का आरोप लगाया।
आरोप यह भी लगे कि जब अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई, तब राघव चड्ढा आंखों के ऑपरेशन के नाम पर यूके में थे। पार्टी नेताओं ने कहा कि राघव संसद में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी से जुड़े बड़े मुद्दों पर सवाल नहीं उठाते। उन पर छोटे-छोटे मुद्दे उठाने और महत्वपूर्ण प्रस्तावों से दूरी बनाने के भी आरोप लगे।
कुमार विश्वास का पुराना VIDEO वायरल (Kumar Vishwas Viral Video)
इसी बीच आप के पू्र्व नेता रह चुके कुमार विश्वास का एक पुराना वीडियो भी वायरल हो रहा है। इसमें वे कहते नजर आ रहे हैं कि AAP का अगला "शिकार" राघव चड्ढा होंगे।
यह वीडियो करीब डेढ़ साल पुराना है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राघव की लोकप्रियता और उनकी शादी के बाद उनकी छवि बदल रही है, जिसे पार्टी में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कुमार विश्वास, जो कभी AAP के संस्थापक सदस्यों में रहे हैं, बाद में पार्टी से अलग हो गए थे और तब से लगातार आलोचना करते रहे हैं।
क्या है पूरे विवाद का मतलब?
पूरा मामला सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट करने तक सीमित नहीं है। यह AAP के भीतर चल रही सत्ता और विचारधारा की खींचतान का संकेत भी माना जा रहा है। एक तरफ पार्टी नेतृत्व है, जो अनुशासन और लाइन पर जोर दे रहा है, तो दूसरी तरफ राघव चड्ढा जैसे युवा नेता हैं, जो अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश में हैं। सौरभ भारद्वाज का आरोप इस संघर्ष को और तेज करता है। वहीं राघव का जवाब यह दिखाता है कि वे पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।
AAP के भीतर यह टकराव आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ यह विवाद अब पार्टी की आंतरिक राजनीति, नेतृत्व और भविष्य की दिशा पर सवाल खड़े कर रहा है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या पार्टी इस विवाद को सुलझा पाती है या यह टकराव और गहराता है। फिलहाल इतना साफ है कि राघव चड्ढा और AAP के बीच की दूरी अब छिपी नहीं रह गई है।












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