भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ लड़ाकू विमान राफेल, देखिए खास तस्वीरें
नई दिल्ली: भारत और उसकी वायुसेना के लिए आज बेहद ही खास दिन है। आज राफेल फाइटर जेट औपचारिक रूप से वायुसेना का हिस्सा बन गया। फ्रांस से जुलाई में आए पांच विमानों को अंबाला स्थित 17वें स्क्वाड्रन, "गोल्डन ऐरो" में शामिल किया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली, सीडीएस जनरल विपिन रावत और एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया समेत कई बड़ी हस्तियां इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनीं।

अंबाला से पाक और चीन दोनों पास
पांच राफेल का पहला जत्था अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर 29 जुलाई को पहुंचा था। इन पांच राफेल में तीन सिंगल और दो डबल सीटर जेट शामिल हैं। राफेल का पहला स्क्वाड्रन अंबाला एयरबेस से संचालित होगा, क्योंकि यहां से पाकिस्तान और चीन पर कुछ ही क्षणों में मार की जा सकती है।

दक्षिण एशिया में सबसे शक्तिशाली विमान
अपनी एवियॉनिक्स, राडार और हथियार प्रणालियों के साथ राफेल दक्षिण एशिया में सबसे शक्तिशाली विमान है। ये लड़ाकू विमान पहले ही लद्दाक और हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में उड़ान भर चुके हैं।
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59,000 करोड़ रुपये में 36 राफेल
साल 2016 में भारत सरकार ने फ्रांस सरकार के साथ 59,000 करोड़ रुपये में 36 राफेल खरीदने का फैसला किया था। राफेल 4.5 जनरेशन के दुनिया के बेहतरीन लड़ाकू विमानों में से एक हैं।

कई घातक मिसाइलों से लैस
ये दो इंजन वाला मल्टी रोल एयरकाफ्ट है। यह एक ऐसा एयरक्राफ्ट है जो एक ही उड़ान में कई मिशन को अंजाम दे सकता है। इसमें मेटेओर मिसाइल लगी है, जो 150 किलोमीटर तक हवा से हवा में मार करने वाली दुनिया की घातक मिसाइलों में से एक हैं।

स्कैल्प मिसाइल से लैस
इसमें स्कैल्प मिसाइल भी लगी है जो हवा से जमीन पर मार करने के लिए है। यह 300 किलोमीटर तक दुश्मन के घर में घुसकर मार करने में सक्षम है। तीसरी मिसाइल मीका है, जो हवा से हवा में मार करती है। इसकी रेंज करीब 80 किलोमीटर है।

कितनी है रफ्तार
राफेल की रफ्तार 2,130 km प्रतिघंटा है। यह रडार को चकमा देने में माहिर है। साथ ही एक मिनट में 60 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है।














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