Puri Lok Sabha Chunav: संबित पात्रा या अरूप पटनायक किसे मिला आशीर्वाद, पुरी में कौन जीत रहा चुनाव?

Puri Lok Sabha Election result: चुनाव आयोग ने शनिवार आधी रात तक के आंड़कों के मुताबिक ओडिशा में 6ठे चरण (ओडिशा में तीसरा चरण) के लोकसभा चुनाव में 69.56% मतदान दर्ज होने की बात कही। इसी चरण में पुरी की प्रतिष्ठित लोकसभा सीट का भी चुनाव हुआ है और सभी प्रत्याशियों की चुनावी किस्मत ईवीएम में बंद हो चुकी है।

ओडिशा की 21 लोकसभा सीटों में से पुरी सीट की चर्चा इस बार बहुत ज्यादा हुई है। इसकी वजह ये है कि यहां तीन प्रमुख दलों ने अपने दिग्गजों को उतारा है। सत्ताधारी बीजेडी से पूर्व आईपीएस और मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर अरूप पटनायक मैदान में हैं तो कांग्रेस से जय नारायण पटनायक अपना भाग्य आजमा रहे हैं।

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पुरी लोकसभा सीट पर 61% से ज्यादा मतदान
लेकिन, पूरे चुनाव अभियान में चर्चा में भाजपा के डॉ संबित पात्रा आगे रहे हैं। बीजेपी ने लगातार दूसरी बार कभी टीवी चैनलों पर अपने चर्चित चेहरे रहे नेता को मौका दिया है। शनिवार देर शाम तक के आंकड़ों के मुताबिक पुरी लोकसभा सीट पर इस बार 61.17% लोगों ने वोट डाले हैं।

पुरी के शहरी इलाकों में ज्यादा वोटिंग
पुरी लोकसभा क्षेत्र में कुल सात विधानसभा हैं, जिनमें से 4 अकेले पुरी में हैं और 2 नयागढ़ और 1 खुर्दा में है। गौर करने वाली बात ये है कि पुरी के शहरी क्षेत्रों में 73.81% दर्ज किया गया है, इसलिए यहां आने वाले नतीजों को लेकर राजनीतिक विश्लेषक भी गुणा-गणित करने में जुट गए हैं।

पुरी सीट पर कांग्रेस नहीं दिखी रेस में
कुल मिलाकर इस सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा के डॉ संबित पात्रा और बीजेडी के पटनायक के बीच ही दिखी है। क्योंकि, कांग्रेस ने पहले सुचित्रा मोहंती को आगे किया था, जो फंड की कमी के चलते मैदान छोड़ गईं और जय नारायण पटनायक पार्टी की दूसरी पसंद हैं। पिछले चुनाव में भी कांग्रेस का प्रदर्शन नाममात्र का रहा था।

पुरी लोकसभा सीट पर चुनावी रेस में संबित पात्रा की संभावना बेहतर
अगर 2019 के चुनाव परिणामों को देखें तो कांग्रेस यहां कोई फोर्स नहीं है और संबित पात्रा को अपनी पहली जीत दर्ज करने के लिए 1% से कुछ ज्यादा वोट जुटाने हैं और अगर क्षेत्र में पांच साल के उनका संघर्ष काम कर गया तो यहां से अबकी बार भाजपा का 'कमल' खिलने की पूरी संभावना है।

मौजूदा सांसद के खिलाफ एंटी-कंबेंसी से जूझती नजर आई बीजेडी
इस बार चुनाव अभियान के शुरुआत से ही बीजेपी यहां रेस में आगे नजर आई है। बीजेडी को इस बार यहां से अपने दिग्गज पिनाकी मिश्रा को हटाना पड़ा है और इसके माध्यम से वह एंटी-इंकंबेंसी को हल्का करने की कोशिश की है।

संबित पात्रा लगातार पांच वर्षों तक पुरी में डटे रहे
दूसरी तरफ, बीते पांच वर्षों में संबित पात्रा ने यहां लोकप्रियता ही अर्जित नहीं की है, उनकी पुरी के मतदाताओं के बीच उपलब्धता ने भी भगवान जगन्नाथ के इस शहर में पार्टी का जनाधार बढ़ाने का काम किया है। झारखंड के धनबाद में जन्मे संबित पात्रा जब पिछली बार यहां आए थे, तो उनकी पहचान भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता की वजह से थी।

लेकिन, इस बार उनसे और वे क्षेत्र के लोगों से अच्छी तरह से परिचित हैं। पिछली बार उनकी पहली ही उम्मीदवारी ने इस सीट पर भाजपा के वोट शेयर में 25% की बढ़ोतरी कर दी थी।

संबित पात्रा के पक्ष में इस बार मोदी फैक्टर ने भी काम किया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके समर्थन में यहां रोडशो भी कर गए हैं। वैसे भी इस बार बीजेपी पुरी में ही नहीं, पूरे ओडिशा में एक बड़ी ताकत के रूप में देखी जा रही है।

बिना क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किए संबित पात्रा ने जारी किया अपना रिपोर्ट कार्ड
संबित पात्रा ऐसे प्रत्याशी भी हैं, जिन्होंने बिना चुनाव जीते पिछले पांच वर्षों में पुरी के लिए दिए गए अपने योगदान को लकर एक रिपोर्ट कार्ड जारी किया है। इस दौरान पुरी की जनता ने इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काफी बदलाव भी देखा है।

वहीं सत्ताधारी बीजेडी को इस बार अपने मौजूदा सांसद से मतदाताओं की उदासीनता भारी पड़ती नजर आई है। पिछली बार ही पिनाकी की जीत का मार्जिन बहुत कम था। अबकी बार तो संबित ने यहां खुद को स्थापित कर लिया है।

चुनाव अभियान के आखिरी दौर में भगवान जगन्नाथ को लेकर संबित पात्रा की एक टिप्पणी को नवीन पटनायक से लेकर बीजेडी के तमाम नेताओं ने जिस तरह से उछाला है, उससे उनकी उम्मीद है कि वह बीजेपी और उसके उम्मीदवार की लोकप्रियता के ग्राफ को रोकने में कामयाब हो जाएंगे।

लेकिन, अगर पात्रा ने अपने डैमेज कंट्रोल वाले अभियान से उसकी धार कुंद कर दी है तो फिर वह निश्चित रूप से रेस में काफी आगे लग रहे हैं।

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