पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपने मंत्री सिद्धू को सजा का समर्थन किया

चंडीगढ़। पंजाब की कांग्रेस सरकार ने अपने ही मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ 30 साल पुराने रोड रेज के मामले में तीन साल की सजा बरकरार रखने का समर्थन किया है। पंजाब सरकार के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि सिद्धू की सजा बरकरार रखी जाए। वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि इस मामले में शामिल होने से इनकार करने वाला सिद्धू का बयान झूठा है और मामले में चश्मदीद के बयान पर भरोसा किया जाना चाहिए।

मंगलवार को होगी अगली सुनवाई

मंगलवार को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में मंगलवार को सुनवाई केरगा। इस मामले में 2006 में हाईकोर्ट ने सिद्धू को तीन साल की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। इसी पर सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार के अधिवक्‍ता ने भी गुरुवार को पक्ष रखा। सरकार के वकील ने सिद्धू पर मामले को सही बताया। वहीं पीड़ित पक्ष की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसमें सिद्धू को मिली तीन साल की सजा को कम बताते हुए काफी नहीं है और इसे बढ़ाया जाए।

ये रोड रेज का पूरा मामला

ये रोड रेज का पूरा मामला

ये मामला 27 दिसंबर 1988 की है, जब कार की पार्किंग को लेकर नवजोत सिंह सिद्धू का गुरनाम सिंह नाम के एक बुजुर्ग शख्स से विवाद हो गया। उस समय सिद्धू के साथ उनके एक दोस्त सिंधूं हालात इतने बिगड़ गए कि मामला मारपीट तक पहुंच गया। इस मारपीट में गुरनाम सिंह को गंभीर चोट आई। हालांकि गुरनाम सिंह के परिजन और मौके पर मौजूद एक रिश्तेदार ने बताया कि सिद्धू की मारपीट में गुरनाम सिंह गंभीर रुप से घायल हो गए। उनको अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद सिद्धू के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज कराया गया। जिसमें सिद्धू के साथ उनके एक दोस्त रुपिंदर सिंह सिंधू के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ।

हाईकोर्ट ने माना था सिद्धू को दोषी

हाईकोर्ट ने माना था सिद्धू को दोषी

पंजाब सरकार और पीड़ित परिवार की तरफ से मामला दर्ज करवाया गया। इस मामले में नवजोत सिंह सिद्धू को 1999 में बड़ी राहत मिली, जब सेशन कोर्ट ने सबूतों के अभाव में केस को खत्म कर दिया। सेशन कोर्ट के इस फैसले के बाद साल 2002 में पंजाब सरकार ने सिद्धू के खिलाफ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की, जहां 2006 में उन्हें तीन साल की सजा हुई। मामले की सुनवाई के बीच 2004 में सिद्धू ने राजनीति में एंट्री की और अमृतसर से बीजेपी के सांसद चुने गए। फिलहाल वो पंजाब की कांग्रस सरकार में मंत्री हैं।

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