अखबार बांटकर गुजारा कर रहा है नेशनल लेवल का बॉक्सर
पुणे के रहने वाले बॉक्सर अक्षय मरे की सुबह की शुरूआत न्यूज पेपर बांटने के साथ होती है वह अपनी जरुरत का खर्च निकालने और अच्छी डायट लेने के लिये घर-घर अखबार की डिलिवरी करता है।
नई दिल्ली। केंद्र और राज्य की सरकारें खेल और खिलाड़ी को बढ़ावा देने के लिए तरह-तरह के दावे करती हैं लेकिन पुणे में एक नेशनल लेवल के बॉक्सर के पास अपना गुजारा करने के लिए पैसे नहीं हैं। वह सुबह में न्यूज पेपर की डिलिवरी कर अपना खर्च चलाने को मजबूर है। इस खिलाड़ी ने राष्ट्रीय स्तर पर ब्रॉन्ज मेडल जीता है, वहीं राज्य स्तर पर चार बार गोल्ड मेडल जीत चुका है।

पुणे के रहने वाले बॉक्सर अक्षय मरे की सुबह की शुरूआत न्यूज पेपर बांटने के साथ होती है वह अपनी जरुरत का खर्च निकालने और अच्छी डायट लेने के लिये घर-घर अखबार की डिलिवरी करता है। हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक नेशनल लेवल पर ब्रॉन्ज जीत चुका अक्षय गरीबी की मार झेल रहा है। वह पुणे के दातावाड़ी इलाके में अपने भाइयों के साथ एक कमरे में रहता है। सुबह उठते ही अक्षय चार किलोमीटर दूर न्यूजपेपर लाने जाता है फिर दातावाड़ी इलाके में घर-घर डिलिवरी करता है। वहीं अक्षय का बड़ा भाई विशाल दूध की डिलिवरी करता है।
अक्षय को कोच विजय गुजर ने बताया कि आर्थिक तंगी के बावजूद वह कड़ी मेहनत करता है और खुद को फीट रखता है। वहीं एक और बॉक्सिंग कोच राकेश भानू का कहना है कि अक्षय को एक ऐसे जॉब की जरुरत है जिससे उसकी आर्थिक परेशानी दूर हो सके। वह आर्थिक तंगी की वजह से अपने बॉक्सिंग पर सही ढ़ंग से ध्यान नहीं दे पा रहा है।
अक्षय अभी सितंबर में होने वाले राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले के लिए तैयारी कर रहा है साथ ही उसे उम्मीद है कि बॉम्बे इंजीनियरिंग ग्रुप में उसका सेलेक्शन हो सकता है। अक्षय ने बताया कि अगर उसका बॉम्बे इंजीनियरिंग ग्रुप के लिए सेलेक्शन हो जाता है तो वह अखबार बांटने का काम छोड़कर मुक्केबाजी पर अपना ध्यान केंद्रित करेगा।












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