ईद पर शहीद औरंगजेब के पिता की भावुक अपील, मेरा बेटा तो शहीद हो गया, पर आप देश की रक्षा के लिए अपने बेटों को फौज में भेजते रहें
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में गुरुवार को ईद की छुट्टी पर घर जा रहे सेना के जवान औरंगजेब को आतंकियों ने पहले अगवा किया और उसके बाद बेरहमी से हत्या कर दी। जवान बेटा खोने वाले पूर्व फौजी मोहम्मद हनीफ का दिल बेटे के गम से भरा है। जुबां पर दर्द है और सीने में दुश्मन से बदला लेने की आग भी। गुस्से से भरे मोहम्मद हनीफ ने सरकार को चेतावनी दे डाली है कि अगर 72 घंटे में बदला नहीं लिया गया तो वह खुद बंदूक उठा लेंगे। आंखों में आंसू लिए बेटे के शव का इंतजार करते हुए शहीद औरंगजेब के पिता ने ईद पर कश्मीरियों से अपील करते हुए कहा, 'मेरा बेटा चला गया, लेकिन अगर मौत के डर से सभी लोग अपने बच्चों को सेना में भेजना बंद कर देंगे तो देश के लिए कौन लड़ेगा?' मेंढर-पुंछ रोड पर स्थित सलानी गांव में एक पेड़ नीचे बैठे थे मोहम्मद हनीफ, जब उन्होंने ईद पर देश के नाम यह पैगाम दिया। वह अपने 24 साल के बेटे का शव आने का इंतजार कर रहे थे।

हनीफ ने बताया कि उस समय उन्होंने औरंगजेब के कंपनी कमांडर से कहा था कि वह उसे सिविल ड्रेस में अकेले जाने की अनुमति न दें। पुलिस के मुताबिक, पुलवामा में तैनात राष्ट्रीय राइफल्स के जवानों ने एक सिविलियन कार को रास्ते में रोका और उससे कहा कि वह औरंगजेब को शोपियां जाने वाले रास्ते पर छोड़ दे, लेकिन जब कार कलमपुरा पहुंची तो आतंकियों को भनक लग चुकी थी और उसके बाद पुलवामा के गोसू में औरंगजेब का शव मिला।

औरंगजेब 44 राष्ट्रीय राइफल्स के साथ शोपियां में तैनात थे
औरंगजेब 44 राष्ट्रीय राइफल्स के साथ शोपियां में तैनात थे। जवान का शव पुलवामा के गुसू से बरामद हुआ था। औरंगजेब के सिर और गर्दन में गोली मारी गई थी। जवान बेट खोने के बाद भी मोहम्मद हनीफ का देश के लिए प्रेम कम नहीं हुआ। 55 साल के मोहम्मद हनीफ ने कहा, 'मौत एक दिन आनी है, मैंने उसे (औरंगजेब) देश सेवा करने के लिए सेना में भेजा। एक सैनिक का कर्तव्य है दुश्मन को मिटाना या खुद मिट जाना।'

हनीफ का बड़ा बेटा मोहम्मद कासिम फौज में है
मोहम्मद हनीफ और उनकी पत्नी राज बेगम के 10 बच्चों में औरंगजेब चौथे नंबर के थे। हनीफ का बड़ा बेटा मोहम्मद कासिम फौज में है और उनके अन्य दो बेटे मोहम्मद तारिक और मोहम्मद शबीर आर्मी ज्वॉइन के लिए तैयार हैं। तारिक ने सेना में भर्ती के लिए लिखित परीक्षा और फिजिकल टेस्ट पास कर लिया है। वहीं, हनीफ का दूसरा बेटा शबीर फिजिकल टेस्ट पास कर चुका है और 27 जुलाई को लिखित परीक्षा की तैयारी कर रहा है। मोहम्मद हनीफ कहते हैं, हमारा परिवार सैनिकों का परिवार है। लेकिन मां का दिल पिता जितना मजबूत नहीं हो सकता। जब मोहम्मद हनीफ कह रहे थे कि हमारा सैनिकों का परिवार है, तब उनकी पत्नी और औरंगजेब की मां घर में गैरहोश थीं।

रंगजेब के अपहरण के बारे में बताते हैं हनीफ
हनीफ आगे बताते हैं कि उन्हें औरंगजेब के अपहरण के बारे में करीब साढ़े चार बजे पता चला। उन्होंने बताया कि वह उस समय पत्नी के साथ पास ही के कासबलारी गांव में गए थे, जब उनकी पत्नी के मोबाइल पर फोन आया था। हनीफ बताते हैं, 'मेरी पत्नी से किसी ने उर्दू में मेरे बारे में पूछा। मेरी पत्नी ने फोन काट दिया। थोड़ी देर बाद मैंने उसी नंबर पर फोन किया तो मुझे पता चला कि वह फोन वह फोन कॉल राष्ट्रीय राइफल्स से आया था। उन्होंने मुझे बताया कि औरंगजेब का अपहरण कर लिया गया है। इसके बाद अपनी पत्नी से कहा- जेबू नू मिलिटेंट ले गए। इसके बाद आधी रात को मुझे औरंगजेब की मौत के बारे में पता चला।'

औरंगजेब ने मई में यूनिट ज्वॉइन की थी
औरंगजेब के मामा मोहम्मद अकरम ने बताया कि दो महीने की छुट्टियां बिताने के बाद औरंगजेब ने मई में यूनिट ज्वॉइन की थी। मोहम्मद अकरम ने आगे बताया, 'मुझे याद है परिवार में एक शादी अटेंड करने के लिए औरंगजेब नए जूते लाया था। वह देर रात तक नाचता रहा।' अकरम ने बताया कि औरंगजेब जब कश्मीर से लौट रहा था, तब उसका बड़ा भाई पुणे से ईद मनाने के लिए घर लौट रहा था।

आतंकी समीर टाइगर को ढेर किया था, उसमें औरंगजेब भी शामिल थे
पड़ोसियों ने बताया कि पिछले महीने सेना की जिस टीम ने हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकी समीर टाइगर को ढेर किया था, उसमें औरंगजेब भी शामिल था। हनीफ बताते हैं कि औरंगजेब आतंकियों की हिटलिस्ट में था, क्योंकि उसने कई आतंकियों को मारने में अहम भूमिका निभाई थी। पिछले साल जब वह छुट्टी पर घर आया था, तब फेसबुक पर उसे आतंकियों ने धमकी दी थी। हनीफ ने बताया कि जब शोपियां स्थित में लौट रहा था, तब उन्होंने उसे टैक्सी से भेजा था और औरंगजेब को छोड़ने के लिए अपने दूसरे को बेटे साथ भेजा था।












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