TMC के 10 नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया, ED चीफ को हटाने की मांग को लेकर दे रहे थे धरना
चुनाव आयोग के दिल्ली मुख्यालय के बाहर धरने पर बैठे बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के 10 सदस्यीय डेलीगेशन को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इसमें डेरेक ओ'ब्रायन, डोला सेन, साकेत गोखले और सागरिका घोष शामिल थे।
ये सभी CBI, ED और NIA प्रमुख को बदलने की मांग कर रहे थे। घटनास्थल के दृश्यों में पुलिस को सांसदों को जबरदस्ती वहां से हटाते हुए और उन्हें एक बस में लादते हुए दिखाया गया है।

इससे पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) का 10 सदस्यीय डेलिगेशन सोमवार को चुनाव आयोग की फुल बेंच से मिला था। डेलिगेशन ने CBI, ED और NIA प्रमुख को बदलने की मांग की थी। इसके बाद तृणमूल सांसदों ने चुनाव आयोग मुख्यालय के बाहर 24 घंटे धरना प्रदर्शन करने का ऐलान किया था।
पुलिस द्वारा बार-बार धरना प्रदर्शन रोकने की अपील को ठुकराने के बाद कार्रवाई शुरू हुई।टीएमसी नेताओं का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियां आम चुनाव से पहले विपक्षी नेताओं को टारगेट कर रही हैं और उनके द्वारा की गई गिरफ्तारियों का मकसद पूरी तरह से राजनीतिक है।
एनडीटीवी की खबर के मुताबिक तृणमूल सांसद डोला सेन ने कहा, "2022 के मामले में एनआईए द्वारा 2024 में गिरफ्तारी की जाती है। कानून और व्यवस्था राज्य का विषय है और स्थानीय पुलिस को सूचित किया जाना चाहिए। साथ ही सख्ती से चार केंद्रीय एजेंसियों के प्रमुखों को बदला जाना चाहिए।"
पत्रकार से राजनेता बनीं सागरिका घोष ने कहा, ''हमने 1 अप्रैल को चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की थी। चुनावी लोकतंत्र में समान अवसर बुनियादी बात है।'' उन्होंने कहा, "CBI, NIA, ED और इनकम टैक्स ऑफिसर जिस तरह से काम कर रहे हैं, वे भाजपा की शाखा के मेंबर लग रहे हैं। इससे भाजपा के एक सदस्य ने एनआईए अधिकारी के आवास पर उनके साथ बैठक भी की थी। विपक्ष का जीना मुश्किल हो गया है।"
सागरिका घोष ने कहा, "5 और 6 अप्रैल की दरमियानी रात को स्थानीय पुलिस को सूचित किए बिना छापेमारी की गई। इस बार एनआईए ने दो साल पुराने मामले में कार्रवाई की है। सुबह 3 बजे महिलाओं के घरों पर छापेमारी की गई। अधिकारी सुबह 3 बजे घरों में घुस गए, जहां उन्होंने महिलाओं को परेशान किया और उनके साथ छेड़छाड़ की।"












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