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लोकसभा चुनाव 2019: सूरत लोकसभा सीट के बारे में जानिए

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नई दिल्ली: गुजरात की सूरत लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद भाजपा की दर्शना जरदोष हैं। उन्होंने साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी नैषध देसाई को 533, 190 वोटों से पराजित किया था। दर्शना जरदोष को इस सीट पर 7,18,412 वोट मिले थे तो वहीं नैषध देसाई को मात्र 1,85,222 वोटों पर संतोष करना पड़ा था। 2014 के चुनाव में इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 14,84,068 थी, जिसमें से मात्र 9,47,922 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग यहां पर किया था। इसमें पुरुषों की संख्या 5,39,368 और महिलाओं की संख्या 4,08,554 थी।

profile of Surat lok sabha constituency

सूरत लोकसभा सीट का इतिहास

साल 1952 के चुनाव में यहां पर कांग्रेस को सफलता मिली और उसका राज यहां पर 1971 तक रहा। इस सीट से देश के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई लगातार 5 बार सांसद चुने गए। साल 1957 से लेकर 1971 तक देसाई यहां पर कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुने गए थे लेकिन 1977 में उन्होंने यहां का चुनाव जनता पार्टी के टिकट पर जीता था। 1980 और 1984 का चुनाव यहां पर कांग्रेस ने ही जीता था और यहां से सीडी पटेल जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। साल 1989 में यहां पर भाजपा जीती और काशीराम राणा यहां से सांसद चुने गए और तब से लेकर साल 2004 तक वो ही इस सीट के सांसद पद पर रहे। साल 2009 में यहां से भाजपा नेता दर्शना जरदोष यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचीं और साल 2014 में भी उन्हें यहां जीत नसीब हुई।

दर्शना जरदोष का लोकसभा में प्रदर्शन

दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक सूरत से सांसद दर्शना जरदोष की पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में उपस्थिति 94 प्रतिशत रही है। इस दौरान उन्होंने सदन में 71 डिबेट में हिस्सा लिया। वहीं लोकसभा में उन्होंने 351 प्रश्न पूछे।

सूरत लोकसभा सीट, परिचय-प्रमुख बातें-

गुजरात के प्रमुख शहरों में से एक सूरत मुख्य रूप से कपड़ा उद्योग और डायमंड कटिंग और पोलिशिंग के लिए प्रसिद्ध है, इसलिए इस शहर को 'सिल्क सिटी' और 'डायमंड सिटी' के नाम से भी जाना जाता है।ऐसा माना जाता है कि आधुनिक सूरत शहर की स्थापना पंद्रहवी सदी के आस-पास हुई है, कहा जाता है कि 1516 में एक हिन्दू ब्राह्मण गोपी ने इसे बसाया था। 12वीं से 15वीं शताब्दी तक यह शहर मुस्लिम शासकों, पुर्तग़ालियों, मुग़लों और मराठों के आक्रमणों का शिकार हुआ। 1514 में पुर्तग़ाली यात्री दुआरते बारबोसा ने सूरत का वर्णन एक महत्त्वपूर्ण बंदरगाह के रूप में किया था। 1800 में अंग्रेज़ों का इस पर अधिकार हो गया, अंग्रेज़ों ने 1612 में पहली बार अपनी व्यापारिक चौकी यहीं पर स्थापित की थी। यहां की कुल आबादी 26,17,024 है, जिसमें से 6 प्रतिशत लोग गांवों में और 93 प्रतिशत लोग शहरों में रहते हैं, यहां 2 प्रतिशत लोग एससी वर्ग के और 3 प्रतिशत लोग एसटी वर्ग के हैं।

गौरतलब है कि सूरत की लोकसभा सीट किसी दौर में कांग्रेस के लिए सेफ सीट मानी जाती थी लेकिन 1989 के बाद से यह भाजपा का गढ़ बन गई है। लंबे वक्त से कांग्रेस यहां जीतने की कोशिश कर रही है लेकिन हर बार उसे नाकामी ही हाथ लगी है। देखते हैं इस बार वो भाजपा के किले को तोड़ने का क्या जोड़ निकालती है और अपनी इस कोशिश में वो सफल हो पाती है या नहीं ये एक देखने वाली होगी। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि सूरत सीट पर कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी।

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English summary
profile of Surat lok sabha constituency
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