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लोकसभा चुनाव 2019: राजमहल लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: झारखंड की राजमहल लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के विजय कुमार हंसदक हैं। यहां पर अधिकतम कोयला और काले पत्थर के मजदूर हैं। राजमहल लोकसभा सीट पर 2014 में कुल वोटर्स की संख्या 13,53,172 थी, जिनमें से 6,91,254 पुरुष एवं 6,61,918 महिला मतदाता थे। डेमोग्राफिक्स के नजरिये से देखा जाए तो यहाँ की अधिकतम जनता ग्रामीण इलाकों से ताल्लुक रखती है जिसका प्रतिशत 90.11 है। 4.67 प्रतिशत अनुसूचित जाति एवं 37 प्रतिशत अनुसूचित जन जाति के लोग हैं| पिछले 15 वर्षों में हुए चुनावों में यहां जन मुक्ति मोर्चा का पलड़ा भारी रहा है।

profile of Rajmahal lok sabha constituency

राजमहल निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत साहेबगंज और पाकुर के पूरे जिले आते हैं। यह क्षेत्र विशेष कर अनुसूचित जनजातियों के लिए अरक्षित किया गया है। राजमहल और इसके अतर्गत आने वाले जिले साहेबगंज और पाकुर पूरी तरह से आदिवासी इलाके हैं| ये दुनिया में काले पत्थर की पैदाइश के लिए मशहूर है। इसका पश्चिमी भाग पहाड़ी है जिसमें कुछ कृषि योग्य घाटियाँ भी हैं, किंतु अधिकांश भाग चट्टानी एवं अनुपजाऊ है। पूर्वी भाग चौड़ा एवं जलोढ़ मिट्टी से युक्त है और यहाँ पर धान अधिक उगाया जाता है। इस जिले में जनसंख्या का घनत्व काफी अधिक है।

राजनैतिक समीकरणों की बात की जाए तो इस इलाके में 1957 में इंडियन नेशनल कांग्रेस के पैका मुरमू से लेकर 2014 में झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के विजय कुमार हंसदक तक अधिकतम बार कांग्रेस ने ही जीत दर्ज की। 1998 और 2009 में यहाँ की सीट पर भारतीय जनता पार्टी के सांसद भी काबिज़ रहे। राजमहल लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत कुल 6 विधान सभा क्षेत्र आतें हैं। ये क्षेत्र राजमहल, बोरिओ , बढ़ैत, लितिपारा, पाकुड़ और महेशपुर हैं। इनमे से राजमहल, बोरिओ और बढ़ैत साहेबगंज जिले में आते है और लितिपारा, पाकुड़ और महेशपुर पाकुड़ जिले में आते हैं।

विजय कुमार हंसदक का लोकसभा में प्रदर्शन

राजमहल लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद विजय कुमार हंसदक के संसद में उपस्थिति के आंकड़ों पर गौर फरमाएं तो पाएंगे की की इनकी उपस्थिति का औसत 69 प्रतिशत है जबकि राज्य औसत 86 प्रतिशत है। संसद में इनका प्रदर्शन काफी उम्दा रहा| प्रश्न पूछने का राष्ट्रिय औसत जहाँ 273 और राज्य औसत 409 है वहीँ इनका व्यक्तिगत औसत 419 है जोकि बेहतरीन हैं। डिबेट में भागीदारी की बात करें तो राष्ट्रिय औसत 63.8 प्रतिशत और राज्य औसत 81.4 प्रतिशत के विपरीत इनका व्यक्तिगत औसत मात्र 35 प्रतिशत ही है। हालाँकि इन्होने को भी प्राइवेट मेम्बर बिल प्रस्तुत नहीं किया है।

गौरतलब है कि मात्र 53 प्रतिशत लिटरेसी वाले इस निर्वाचन क्षेत्र में वोटर टर्न आउट 2014 में 70 प्रतिशत रहा जिसका फायदा 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ज़रूर उठाने की कोशिश करेगी क्योंकि 2014 में भाजपा के हेमलाल मुरमू ने विजय कुमार को कांटे की टक्कर दी थी। झारखंड के अलग राज्‍य के रूप में बनने के बाद यानी साल 2000 के बाद से यहां कांग्रेस पूरी तरह कमजोर पड़ चुकी है। वहीं जेएमएम और भाजपा दोनों के बीच यहां कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है। लेकिन हां इस लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली छह विधानसभा सीटों में से तीन पर जेएमएम का, दो पर भाजपा का कब्‍जा है, वहीं एक सीट कांग्रेस के खाते में है। यानी अब भी कांग्रेस यहां पर वापसी कर सकती है। हालांकि जेएमएम की जीत विजय कुमार हंसदक के कार्यों पर निर्भर करेगी, जबकि भाजपा को जो भी बढ़त मिलेगी, वह केंद्र में मोदी सरकार की नीतियों की वजह से होगी।

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