लोकसभा चुनाव 2019: पाली लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: राजस्थान की पाली लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद भाजपा के प्रेम प्रकाश चौधरी हैं। उन्होंने साल 2014 के चुनाव में यह सीट कांग्रेस की मुन्नी देवी गोदारा को 39,90,39 वोटों से हराकर अपने नाम की थी। पीपी चौधरी को जहां इस चुनाव में 71,17,72 वोट मिले थे वहीं कांग्रेस के मुन्नी देवी गोदारा को मात्र 31,27,33 वोटों पर संतोष करना पड़ा था। आपको बता दें कि मुन्नी देवी गोदारा, दिग्गज नेता बद्रीराम जाखड़ की पुत्री हैं। साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर नंबर 2 पर कांग्रेस और नंबर 3 पर बसपा थी। पाली लोकसभा क्षेत्र से साल 1952 से लेकर हुए अब तक हुए चुनाव में भाजपा के पीपी चौधरी ने सर्वाधिक मत हासिल कर अब तक की सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी।

profile of Pali lok sabha constituency

पाली लोकसभा सीट का इतिहास

पाली लोकसभा सीट में साल 1952 में हुए पहले लोकसभा के चुनाव में निर्दलीय अजीत सिंह ने 62 हजार 845 मतों से चुनाव जीता था। इसके बाद 1957 और 1962 दोनों में ही यहां कांग्रेस का ही कब्जा रहा लेकिन 1967 का चुनाव स्वतंत्रता पार्टी ने जीता था। साल 1971 के चुनाव में एक बार फिर यहां पंजे की वापसी हुई थी लेकिन 1977 में यहां जनता पार्टी ने कब्जा किया था। इसके बाद 1980, 1984 और 1988 के चुनाव में यहां कांग्रेस का राज रहा लेकिन उसके विजय रथ को 1989 में भाजपा ने रोका और गुमानमल लोढ़ा यहां से सांसद चुने गए, वो लगातार तीन पर इस सीट पर एमपी रहे लेकिन साल 1998 के चुनाव में यहां कांग्रेस की वापसी हुई लेकिन इसके एक साल बाद ही हुए चुनाव में ये सीट फिर से भाजपा के ही पास चली गई और पुष्प जैन यहां से सांसद बनें, वो दो बार इस सीट पर एमपी रहें इसके बाद 2009 में कांग्रेस के नए चेहरे बद्रीराम जाखड़ ने सभी रिकॉर्ड को तोड़ते हुए 1 लाख 96 हजार 291 मतों से चुनाव जीता था लेकिन साल 2014 का चुनाव भाजपा के पीपी चौधरी ने यहां जीतकर सफलता का नया अध्याय लिखा। राजस्थान का खास जिला पाली अपने कपड़ा व्यवसाय के लिए पूरे भारत में मशहूर है, इसे पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा बसाया गया था, यहां की कुल आबादी 27,53,012 है, जिसमें से 81 प्रतिशत लोग गांवों में और 18 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं।

पीपी चौधरी का लोकसभा में प्रदर्शन

दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक पीपी चौधरी की पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में उपस्थिति 98 प्रतिशत रही और इस दौरान उन्होंने सदन की 359 डिबेट में हिस्सा लिया और 394 प्रश्न पूछे। साल 2014 के चुनाव में कुल वोटरों की संख्या 18,93,030 थी, जिसमें से मात्र 10,95,587 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था। इसमें वोट देने वाले पुरुषों की संख्या 5,81,099 और महिलाओं की संख्या 5,14,488 थी। पाली की 91 प्रतिशत आबादी हिंदू धर्म में और 7 प्रतिशत लोग इस्लाम धर्म में भरोसा करते हैं।

भोपालगढ़, औंसिया, बिलाडा, लूणी, सरदारपुरा, मेडता सिटी, खीवंसर और कुछ हिस्सा राजसमंद के विधानसभा क्षेत्र से गठित पाली संसदीय क्षेत्र में हार-जीत जातिगत आधार पर मतों में होने वाले धुव्रीकरण पर निर्भर करती रही है, भोपालगढ़, बिलाडा, औंसिया में लगभग 50 प्रतिशत से अधिक आबादी जाटों की, शेष मतदाता अन्य जातियों के हैं। जोधपुर, नागौर से सटे इस लोकसभा क्षेत्र में जैन धर्म को मानने वालों की संख्या भी अधिक है, जिन्हें लुभाने में भाजपा पिछली बार सफल रही थी और कांग्रेस फेल लेकिन क्या ऐसा इस बार भी हो पाएगा, वो भी जब राज्य की सत्ता से भाजपा आउट हो गई है, देखते हैं बीजेपी इस सीट को बचाने के लिए और कांग्रेस इस सीट को पाने के लिए क्या रणनीति इस बार अपनाती है। इस में कोई शक नहीं कि पीपी चौधरी की जीत में मोदी लहर का भी हाथ था, लोगों ने विकास के नाम पर भाजपा को चुना था लेकिन क्या पाली में विकास हुआ है, ये बात तो तब साबित होगी जब जनता यहां वापस कमल को मौका देगी, देखते हैं पाली की जनता इस बार किस पर अपनी मुहर लगाती है।

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