गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर के राजनीतिक जीवन पर एक नजर
पारसेकर का शुमार गोवा के उन नेताओं में होता है, जिन्होंने गोवा में भाजपा को खड़ा किया, बढ़ाया और सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उनके सिर पर आरएसएस का हाथ माना जाता है।
नई दिल्ली। दो साल पहले केंद्र में एनडीए की सरकार बनने के बाद उस समय गोवा के मुख्यमंत्री रहे मनोहर पर्रिकर को केंद्र में बुलाकर रक्षा मंत्रालय सौंप दिया गया तो उनके जूनियर नेताओं में मुख्यमंत्री बनने के लिए जोर-आजमाइश शुरू हो गई। उपमुख्यमंत्री फ्रांसिस डिसूजा सबसे तगड़े उम्मीदवार माने जा रहे थे लेकिन बाजी हाथ लगी लक्ष्मीकांत पारसेकर के। खुद से सीनियर नेताओं को मात देते हुए पारसेकर 8 नवंबर 2014 को गोवा के 21वें मुख्यमंत्री बने।

गोवा में अगले महीने विधानसभा चुनाव हैं। मनोहर पर्रिकर के पास केंद्र की जिम्मेदारी है। ऐसे में लक्ष्मीकांत पारसेकर के सामने इस बार गोवा में बड़ी चुनौती है। पार्टी आलाकमान और आरएसएस में तो पारसेकर मुख्यमंत्री पद हासिल कर अपनी पकड़ को दिखा चुके हैं लेकिन इस बार उनकी जनता पर पकड़ का फैसला होना है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चहेते 60 साल के लक्ष्मीकांत पारसेकर गोवा 21 वें मुख्यमंत्री हैं और इस पद आसीन होने वाले 12 वें शख्स हैं। पारसेकर का शुमार गोवा के उन नेताओं में होता है, जिन्होंने गोवा में भाजपा को खड़ा किया, बढ़ाया और सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। पारसेकर आरएसएस से भाजपा में आए हुए नेता हैं और संघ में उनकी पकड़ ही उनका सबसे मजबूत पक्ष है।
4 जुलाई 1956 को जन्में लक्ष्मीकांत यशवंत पारसेकर ने एमएससी और बीएड किया है, पढ़ाई के बाद उन्होंने अध्यापन कार्य भी किया। पारसेकर ने राजनीति में कदम 1988 में रखा। उन्होंने 1988 में बीजेपी प्रत्याशी के रूप में मंड्रेम विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव लड़ा। खास बात ये थी कि उनका परिवार उस समय राजनीतिक रूप से प्रभावशाली क्षेत्रीय दल महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी का समर्थक था और भाजपा का गोवा में कोई प्रभाव उस समय नहीं था। वे 1988 के चुनाव में प्रभावशाली नेता रमाकांत खलप के खिलाफ चुनाव मैदार में उतरे थे और हार गए।
पारसेकर लगातार भाजपा और संघ के लिए काम करते रहे। उस दौर में उनके साथ मनोहर पर्रिकर (अब रक्षामंत्री) और कुछ गिने-चुने लोग ही थे, जो भाजपा के लिए काम कर रहे थे। पारसेकर को चुनाव में पहली जीत 2002 में मिली जब वो एमजीपी के रमाकांत को 750 वोटों से हराकर विधायक बनें। 2007 में उन्होंने बड़ी जीत हासिल की। इसके बाद 2012 में वो विधायक चुने गए साथ ही गोवा में भाजपा की सरकार बनी। मनोहर पर्रिकर मुख्यमंत्री बने और पारसेकर मंत्री। 2014 में पर्रिकर केंद्र में आ गए और पारसेकर प्रदेश के मुख्यमंत्र बने।
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