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लोकसभा चुनाव 2019: बर्धमान-दुर्गापुर लोकसभा सीट के बारे में जानिए

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नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की बर्धमान-दुर्गापुर लोकसभा सीट की, जहां से तृणमूल कांग्रेस की नेता डॉ.ममताज़ संघमिता (Dr. Mamtaz Sanghamita) सांसद हैं, उन्होंने साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर CPI(M)नेता शेख सैदुल हक को 1,07,331 वोटों के अंतर से हराया था। डॉ.ममताज़ संघमिता को यहां पर 5,54,521 वोट मिले थे तो वहीं CPI(M)नेता शेख को मात्र 4,47,190 वोटों पर संतोष करना पड़ा था। इस सीट पर नंबर तीन पर भाजपा और चार पर कांग्रेस पार्टी थी, जिसमें भाजपा प्रत्याशी को 2,37,205 वोट और कांग्रेस प्रत्याशी को केवल 44,355 मत ही प्राप्त हुए थे।

profile of Burdwan-Durgapur lok sabha constituency

बर्धमान-दुर्गापुर लोकसभा सीट का इतिहास

साल 2008 में बर्धवान, कटवा, दुर्गापुर को खत्म करके बर्धमान-पूर्बा और बर्धमान-दुर्गापुर संसदीय सीट को बनाया गया था। बर्धमान-दुर्गापुर लोकसभा सीट का कुछ हिस्सा पूर्वी बर्धमान और कुछ हिस्सा पश्चमी बर्धमान में आता है। बर्धमान प्रदेश की राजधानी कोलकाता से 100 किलोमीटर दूर स्थित है, इस नगर का गौरवशाली पौराणिक इतिहास है। इसका नामकरण 24वें जैन तीर्थंकर महावीर के नाम पर हुआ है। मुगल काल में इसका नाम शरिफाबाद हुआ करता था। वर्धमान जैन धर्म के लोगों के लिए भी पावन स्थान है, ऐसा माना जाता है कि महावीर अपने धर्म के प्रचार एवं प्रसार के सिलसिले में वर्धमान आए थे। मुगलकाल में वर्धमान एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक केन्द्र था। बर्धमान-दुर्गापुर की जनसंख्या 2,215,771 है, जिसमें से 53.75% आबादी गांवों में और 46.25% लोग शहरों में रहते हैं, यहां 24.4 % लोग एससी वर्ग के हैं तो वहीं 5.62% लोग एसटी वर्ग के हैं। बर्धमान पर्यटन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है, सर्वमंगला का मन्दिर यहां आस्था का बहुत बड़ा केंद्र है। दु्र्गापुर से बर्धमान के बीच की दूरी 64 किमी है, इस संसदीय क्षेत्र में सात विधानसभा सीटें आती हैं।

साल 2009 में यहां पर पहली बार आम चुनाव हुए थे, जिसे कि सीपीआई (एम) के प्रो. शेख सैदुल हक ने जीता था लेकिन साल 2014 के चुनाव में उन्हें निराशा हाथ लगी और ममता बनर्जी की लोकप्रियता की वजह से यहां पर तृणमूल कांग्रेस की नेता डॉ.ममताज़ संघमिता को सफलता मिली और वो यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचीं। डॉ.ममताज़ संघमिता, कोलकाता मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग की एचओडी भी रह चुकी हैं, साल 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा में उनकी उपस्थिति 86 प्रतिशत रही है और इस दौरान उन्होंने 73 डिबेट में हिस्सा लिया है और 229 प्रश्न पूछे हैं, साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 158, 34, 95 थी, जिसमें से केवल 13,31, 732 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग यहां पर किया था।

साल 2014 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में मौजूद 42 सीटों में से 34 सीटों पर अपना कब्‍जा जमाया था, जबकि कांग्रेस को 4 और भाजपा को 2 सीटें मिली थी। सीपीएम जिसने कभी बंगाल में 34 साल राज किया था, उसे इस चुनाव में मात्र 2 सीटें मिली थी।, मोदी लहर की वजह से जहां पूरे देश में बीजेपी नंबर वन राजनीतिक दल के तौर पर उभरी थी तो वहीं पश्विम बंगाल में उसका असर बेअसर रहा था। इसकी वजह से तृणमूल कांग्रेस लोकसभा चुनावों की चौथी सबसे बड़ी पार्टी बनने में कामयाब हुई थी। इस सीट समेत पूरे राज्य में दीदी की ही पार्टी का दबदबा रहा था लेकिन क्या एक बार फिर से यहां ममता बनर्जी का ही जादू चलेगा या फिर हमें कुछ हैरत अंगेज परिणाम देखने को मिलेंगे, यही सवाल हर कोई सोच रहा है, जिसका जवाब जानने के लिए हमें चुनावी नतीजों का इंतजार करना होगा।

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