हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019: बड़ौदा सीट के बारे में जानिए
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नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग ने हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीख की घोषणा कर दी है। राज्य में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे, जबकि वोटों की गिनती का काम 24 अक्टूबर को होगा। यहां एक लाख तीस हजार मशीनों द्वारा मतदान कराया जाएगा। हरियाणा में विधानसभा की कुल 90 सीट हैं। जबकि मतदाताओं की संख्या 1.82 करोड़ है। साल 2014 के चुनावों में बीजेपी को 47 सीटें हासिल हुई थीं, जबकि कांग्रेस को 15 सीटें मिली थीं।

चलिए अब बात करते हैं राज्य की बड़ौदा सीट के बारे में। हरियाणा के बड़ौदा से इस समय कांग्रेस के श्रीकृष्ण हुडा विधायक है। हुड्डा ने बीते साल हुए चुनाव में 50,530 वोट पाकर ये जीत हासिल की थी। उन्होंने इनेलो (इंडियन नेशनल लोकदल ) के डॉक्टर कपूर सिंह नरवाल को 5,183 वोटों से हराया था। भाजपा के बलजीत सिंह मलिक 8,698 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
चुनावी इतिहास
हरियाणा राज्य के निर्माण के बाद हुए पहले चुनाव में गठित बड़ौदा विधानसभा 2005 तक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रही। 1977 में इंदिरा विरोधी लहर में जनता पार्टी के भले राम ने निर्दलीय दरिया सिंह को पराजित किया। दोनों पुराने खिलाड़ी रामधारी वाल्मिकी (विशाल हरियाणा पार्टी) और श्यामचंद (कांग्रेस) ने भी चुनाव लड़ा। ये तीसरे और चौथे स्थान पर रहे। 1982 में भी भोलेराम ने 36159 वोटों के साथ अपना कब्जा बरकरार रखा।
1987 में लोकदल उम्मीदवार डॉ. कृपाराम पुनिया ने कांग्रेस के चौधरी श्यामचंद को पराजिकत किया। अगले 3 चुनाव 1991, 1996 और 2000 में इंडियन नेशनल लोकदल (जेपी) के रमेश कुमार खटक ने बड़ौदा विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने इस दौरान कांग्रेस के रामधारी वाल्मीकी, हरियाणा विकास पार्टी के चंद्रभान और कांग्रेस के श्याम चंद्र को पराजित किया। वहीं 2005 में इनेलो के रामफल चिडाना ने कांग्रेस के रामपाल रुखी को पराजित किया।
सामान्य सीट घोषित होने के बाद 2009 और 2014 में यहां से श्रीकृष्ण हुड्डा विधायक चुने गए और दोनों ही बार उन्होंने इनेलो के डॉ. कपूर नरवाल को पराजित किया। 2005 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री बने। 2009 में कांग्रेस के श्रीकृष्ण हुड्डा ने इनेलो के कपूर सिंह नरवाल को 25,343 वोटों से हराया था।
कांग्रेस के अन्य विधायकों की तरह हुड्डा ने भी अपने क्षेत्र में गड़बड़ियों के लिए सत्तारूड़ बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि मतदाताओं की मानें तो कांग्रेस के काल में भी वहां का यही हाल था। सड़कों पर गड्ढे, पानी की कमी और टूटी सड़कों से बड़ौदा बेहाल रहा और हुड्डा अपने पुराने क्षेत्र गढ़ी संपला किलोई पर ध्यान लगाए रहे।












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