लोकसभा चुनाव 2019: झालावाड़-बारां लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: राजस्थान की झालावाड़-बारां लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद दुष्यंत सिंह हैं। दुष्यंत सिंह राज्य की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के बेटे हैं। उन्होंने साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया को 2 लाख 81 हजार 546 मतों से हराया था। यहां खास बात आपको बता दें कि झालावाड़-बारां संसदीय सीट के साथ वसुंधरा राजे परिवार का ही नाम जुड़ा हुआ है। दुष्यंत सिंह दो बार से लगातार इस सीट पर पर सांसद हैं। साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर नंबर 2 पर कांग्रेस और नंबर 3 पर बसपा थी, उस साल यहां कुल वोटरों की संख्या 16,69,842 थी, जिसमें से मात्र 11,46,364 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था, जिनमें पुरुषों की संख्या 6,35,659 और महिलाओं की संख्या 5,10,705 थी। झालावाड़-बारां लोकसभा क्षेत्र से जहां एक तरफ दुष्यंत सिंह निर्वाचित हुए हैं। वहीं दूसरी ओर झालरापाटन सीट से राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे सिंधिया क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती आई हैं। झालावाड़-बारां संसदीय सीट 2008 में हुए नए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई। इस संसदीय क्षेत्र के अंदर विधानसभा की 8 सीटें हैं।

profile of Jhalawar–Baran lok sabha constituency

दुष्यंत सिंह का लोकसभा में प्रदर्शन

मां वसुंधरा राजे से राजनीति का पाठ पढ़ने वाले दुष्यंत सिंह 5 अगस्‍त 2007 को लोकसभा में परिवहन, पर्यटन और संस्‍‍कृति समिति के सदस्‍य भी चुने गए थे। दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में उनकी उपस्थिति 74 प्रतिशत रही और इस दौरान इन्होंने 35 डिबेट में हिस्सा लिया 252 प्रश्न पूछे हैं। 11 सितंबर 1973 में मुंबई में जन्मे दुष्यत सिंह ने स्‍नातक की डिग्री सेंट स्‍टीफन कॉलेज दिल्‍ली से ली, उसके बाद होटल मैनेजमेंट में स्‍नात्‍कोत्‍तर की डिग्री अमेरिका से प्राप्‍त की थी।

झालावाड़-बारां लोकसभा सीट , एक परिचय-प्रमुख बातें

झालावाड़ राजस्थान राज्य के दक्षिण-पूर्व में स्थित हाड़ौती क्षेत्र का हिस्सा है। झालावाड़ ने पर्यटन के लिहाज से अपनी एक अलग पहचान बनाई है। राजस्थान की कला और संस्कृति को संजोए यह शहर अपने खूबसूरत सरोवरों, किला और मंदिरों के लिए जाना जाता है। इस जनपद के अंदर झालावाड़ और झालरापाटन नामक दो पर्यटन स्थल है। इन दोनों शहरों की स्थापना 18वीं शताब्दी के अन्त में झाला राजपूतों द्वारा की गई थी, इसलिए इन्हें 'जुड़वा शहर' भी कहा जाता है। यहां की कुल आबादी 26,34,085 है, जिसमें से 81 प्रतिशत लोग गांवों में निवास करते हैं और 18 प्रतिशत लोग शहरों में रहते हैं।

हाड़ौती में राजनीतिक तौर पर बीजेपी का दबदबा पुराना है, इस क्षेत्र को बीजेपी के पॉलिटिकल पावर हाउस के तौर पर जाना जाता है क्योंकि यह क्षेत्र राजस्थान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कर्म भूमि रहा है, पहले जनसंघ और फिर बीजेपी की इस इलाके में जड़े गहरी हैं, झालावाड़, बारां, कोटा और बूंदी के इलाकों में हमेशा से बीजेपी की तूती बोलती आई है, झालावाड़ की बात करें तो वसुंधरा राजे इस क्षेत्र की सबसे बड़ी और अजेय नेता रही हैं, कांग्रेस ने झालावाड़ के चुनावों में वसुंधरा राजे के खिलाफ कई प्रयोग किए लेकिन वो अब तक असफल ही साबित हुए हैं, बहरहाल अभी तक बीजेपी के विरुद्ध हर लहर में हाड़ौती ने भाजपा का मान रखा है तो क्या इस बार भी यह मान बरकरार रहेगा, वो भी तब, जब राज्य की सत्ता से भाजपा आउट हो गई है, यह एक बड़ा सवाल है, जिसका उत्तर चुनावी नतीजे देंगे।

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