लोकसभा चुनाव 2019: अलवर लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: राजस्थान की अलवर लोकसभा सीट से साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के चांद नाथ ने जीत हासिल की थी और सांसद बने। उन्हें इस सीट पर कुल 64,22,78 वोट प्राप्त हुए थे लेकिन उनका निधन हो जाने की वजह से इस सीट पर उपचुनाव हुए जिसमें कांग्रेस के डॉ करण सिंह ने बाजी मारी। डॉ. करण सिंह ने इस सीट पर बीजेपी के डॉ. जसवंत सिंह यादव को करीब 19,64,96 वोटों के अंतर से हराया। उन्हें उपचुनाव में 64,24,16 वोट मिले थे, यह भाजपा के लिए बहुत बड़ा झटका था।

profile of Alwar lok sabha constituency

अलवर लोकसभा सीट का इतिहास

साल 1952 और 1957 के चुनाव में अलवर संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस की जीत हुई तो वहीं 1962 में यहां से काशीराम गुप्ता निर्दलीय चुनाव जीत गए। साल 1967 और 1971 दोनों ही साल के चुनाव में यहां पर कांग्रेस विजयी हुई लेकिन 1977 के चुनाव में जनता पार्टी के टिकट पर रामजी लाल यादव यहां से सांसद बने लेकिन इसके बाद हुए अगले चुनाव में वो कांग्रेस के टिकट पर यहां से विजयी हुए। वो लगातार तीन बार यहां से एमपी चुने गए। साल 1991 के आम चुनाव में यहां पहली बार भाजपा की जीत हुई और महेंद्रा कुमारी यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचीं लेकिन 1996 के चुनाव में यहां कांग्रेस फिर से जीत गई और उसका राज 1998 तक रहा।

1999 के चुनाव में यहां से भाजपा के टिकट पर डॉ. जसंवत सिंह यादव जीते और साल 2004 के चुनाव में यहां पर कांग्रेस जीती और एमपी की सीट पर डॉ. करण सिंह यादव विराजमान हुए। साल 2009 के चुनाव में भी यहां कांग्रेस ही विजयी हुई और जितेंद्र सिंह यहां से सांसद बने लेकिन साल 2014 के चुनाव में यहां भाजपा को सफलता मिली लेकिन उपचुनाव में फिर से कांग्रेस को यहां विजय श्री हासिल हुई।

अलवर लोकसभा सीट,परिचय- प्रमुख बातें-

अलवर राजस्थान के मेवात अंचल के अंतर्गत आता है और अरावली की पहाड़ियों के मध्य में बसा है। अलवर का प्राचीन नाम 'शाल्वपुर' था। यह राजस्थान का महत्त्वपूर्ण औधोगिक नगर हैं, अलवर को राजस्थान का 'सिंह द्वार' भी कहते हैं। अलवर की आबादी 27 लाख 48 हजार 840 है, जिसमें से 76 प्रतिशत जनसंख्या गांवों में और 23 प्रतिशत लोग शहरों में रहते हैं। अलवर जिला 2018 में गोरक्षकों की पिटाई से हुई 2 लोगों की मौत के कारण सुर्खियों में आया था, बता दें कि 2018 में अलवर में मोब लिंचिंग के दो मामले सामने आए थे, जिसके बाद जिले में काफी हंगामा और आक्रोश की स्थिति उत्पन्न हो गई थी, इस गंभीर मामले पर जमकर सियासत भी हुई थी। अलवर की जनसंख्या 27 लाख 48 हजार 840 है, जिसमें से 76 प्रतिशत लोग ग्रामीण इलाकों में 23 प्रतिशत लोग शहरों में रहते हैं।

गौरतलब है कि अलवर यादव बाहुल्य जिला है, जिसका फायदा डॉ. करण सिंह को मिला। राजनीति में किस्मत आजमाने से पहले डॉ करण सिंह जयपुर के एसएमएस अस्पताल के मेडिकल सुपरीटेंडेंट भी रह चुके हैं, करण सिंह दो बार बहरोड़ से विधायक चुने जा चुके हैं, अपनी जीती हुई सीट पर भाजपा की करारी हार ने जहां भाजपा खेमे में खलबली पैदा कर दी है, वहीं दूसरी ओर इस जीत ने कांग्रेस के अंदर जबरदस्त आत्मविश्वास भर दिया है, राज्य से बीजेपी की सत्ता गायब हो गई है, ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों की कोशिश केवल जीत हासिल करने की होगी और इस होड़ में कौन आगे निकलेगा ये तो वक्त बताएगा।

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