लोकसभा चुनाव 2019: अलीपुरद्वार लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल का अलीपुरद्वार जिला जो अपने पर्यटक स्थल के लिए काफी मशहूर है। जहां विदेशों से सैलानी आते हैं। असम एवं पश्चिम बंगाल का मिलान इसी क्षेत्र को कहा जाता है। दार्जिलिंग, गंगटोक इत्यादि घूमने वाले लोग यहीं के हवाई अड्डे पर उतरते हैं। दशरथ टर्की अलीपुरद्वार के सांसद हैं। 2014 में लोकसभा के चुनाव हुए तो तृणमूल कांग्रेस ने दशरथ पर अपना भरोसा जताया और वह भरोसे पर खरे उतरे। उन्हें 362453 वोट मिले। वहीं दूसरे नंबर पर रहे आर एस पी के मनोहर टर्की जिन्हें 341056 वोट मिले। तृणमूल कांग्रेस ने ये सीट 21397 वोटो से अपने नाम कर ली। 18 मई 2014 को लोकसभा में सांसद पद की शपथ ली थी। 51 साल के दशरथ दिसंबर 2018 तक 5 डिबेट में भाग ले चुके हैं। उन्होंने कोई भी प्राइवेट मेंबर बिल संसद के पटल पर नहीं रखा है। लेकिन इन सब से भी बड़ी बात रही है सांसद साहब का लोकसभा में एक भी सवाल ना पूछना। लोकसभा में उनकी अटेंडेंस 67 फीसदी रही है।

profile of Alipurduars lok sabha constituency
यह क्षेत्र पर्यटक स्थल की वजह से अपनी अलग पहचान बना चुका है।लेकिन हाल ही के कुछ महीनों में हुई हिंसा की खबरे भी आई है। राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच लड़ाई की खबरों से दिल्ली के अखबार भरे रहते थे। तो वहीं, आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी रहा है इस बार के चुनाव में यहां लॉयन ऑर्डर का एक बड़ा मुद्दा भी होगा देखना होगा। जनता इसे किस रूप में ले पाती है। क्या इसका नुकसान सत्ताधारी ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को होगा या केंद्र में बैठी भारतीय जनता पार्टी को या किसी और पार्टी को।

लोकतंत्र में एक कहावत पुरानी है।जनता जिसे चाहती है उसे ही वोट देती है और जनता जिसे चाहती है उसे ही जीताती है। अलीपुरद्वार सीट की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। लेकिन, साल 2014 में यहां कई इतिहास लिखे गए। यह पहली बार था जब इस सीट से तृणमूल कांग्रेस को जीत मिली हो। साल 1977 से यहां रिवॉल्यूशनरी सोशल पार्टी का कब्जा रहा है। पहली बार यहां से Pius Tirkey को जीत मिली और वो लगातार चुनाव जीते रहे 1980,84, 89 ,91 जीत के बाद वो1996 तक यहां के सांसद रहे। Revolutionary social party का यहां पर एकछत्र राज चलता था पार्टी का उम्मीदवार बदला तो भी नतीजों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। 1996 में joachim Baxla को जीत मिली और वो 2009 तक सांसद रहे। पार्टी ने 2009 में मनोहर ट्रकी को टिकट दिया। वह भी जीत गए। लेकिन 2014 में यहां उनकी पार्टी का सफाया हो चुका था। नया नेता था, नई पार्टी थी। अभी देखना होगा 2019 में क्या होता है। क्या 2014 का इतिहास दोहराया जाएगा या इस बार जनता कुछ नया इतिहास लिखेंगी।

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