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बीएचयू में मुस्लिम संस्कृत प्रोफेसर के विरोध पर प्रियंका ने कही बड़ी बात, मायावती ने भी किया ट्वीट

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संस्कृत विभाग में मुसलमान असिस्टेंट प्रोफेसर फिरोज खान पर की नियुक्ति को लेकर विरोध पर प्रियंका गांधी ने हैरत जताई है। कांग्रेस की महासचिव प्रियंका ने इसके लेकर ट्वीट करते हुए लिखा है कि संस्कृत को किसी एक ही धर्म का शिक्षक पढ़ा सके, ऐसा नहीं है। संस्कृत तो कोई भी पढ़ा सकता है।

सरकार संविधानिक अधिकार की रक्षा करे: प्रियंका

सरकार संविधानिक अधिकार की रक्षा करे: प्रियंका

प्रियंका गांधी ने गुरुवार को ट्वीट किया, हमारी भाषाएँ और संस्कृति हमारी विशेषता है, हमारी मजबूती है। संस्कृत भाषा में ही लिखा गया है, "सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः। इस भाषा में विशालता है। हमारे देश के संविधान में विशालता है। विश्वविद्यालय में संस्कृत कोई भी अध्यापक पढ़ा सकते हैं। सरकार और वि वि को इस संविधानिक अधिकार की रक्षा करनी चाहिए।

मायावती भी सरकार पर बरसीं

मायावती भी सरकार पर बरसीं

उत्तर प्रदेश की पूर्व सीएम और बसपा प्रमुख मायावती ने भी मामले पर ट्वीट किया है। उन्होंने कहा है- बनारस हिन्दू केन्द्रीय विवि में संस्कृत के टीचर के रूप में पीएचडी स्कालर फिरोज खान को लेकर विवाद पर शासन/प्रशासन का ढुलमुल रवैया ही मामले को बेवजह तूल दे रहा है। कुछ लोगों द्वारा शिक्षा को धर्म/जाति की अति-राजनीति से जोड़ने के कारण उपजे इस विवाद को कतई उचित नहीं ठहराया जा सकता है।

बसपा सुप्रीमों ने इस पर आगे लिखा- बीएचयू द्वारा एक अति-उपयुक्त मुस्लिम संस्कृत विद्वान को अपने शिक्षक के रूप में नियुक्त करना टैलेन्ट को सही प्रश्रय देना ही माना जाएगा और इस सम्बंध में मनोबल गिराने वाला कोई भी काम किसी को करने की इजाजत बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए। सरकार इसपर तुरन्त समुचित ध्यान दे तो बेहतर होगा।

क्या है पूरा मामला

क्या है पूरा मामला

बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान विभाग में दो हफ्ते पहले फिरोज खान की नियुक्ति असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हुई थी। उनकी नियुक्ति के बाद से ही कुछ छात्र लगातार उनके अपॉइन्टमेट का विरोध कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि एक मुसलमान संस्कृत नहीं पढ़ा सकता है। उनको क्लास नहीं लेने दी गई है। वहीं फिरोज के विरोध को गलत बताने वाले भी बड़ी तादाद में हैं। अलग-अलग क्षेत्रों के लोग लगातार सोशल मीडिया और दूसरे माध्यमों पर लिखकर कह रहे हैं कि धर्म के आधार पर इस तरह प्रोफेसर का विरोध बिल्कुल ही गलत है।

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