Priyanka Gandhi और राहुल की वायनाड से जीत को 'कट्टरपंथियों'से जोड़ने वाले नेता के साथ क्यों खड़ी हुई CPM?
Priyanka Gandhi Rahul Gandhi Wayanad: केरल की वायनाड लोकसभा सीट से कांग्रेस के प्रियंका गांधी और राहुल गांधी की जीत को 'कट्टरपंथियों और आतंकियों' के समर्थन से जोड़ने वाले सीपीएम नेता विजयराघवन को उनकी पार्टी का पूरा साथ मिल गया है। दरअसल, सीपीएम पोलित ब्यूरो के सदस्य ए विजयराघवन के आरोपों पर कांग्रेस भड़की हुई है, लेकिन सीपीएम स्थानीय समीकरणों की वजह से अपने नेता के साथ डटकर खड़ी हो गई है।
केरल में सत्ताधारी गठबंधन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के संयोजक टीवी रामकृष्णन ने कहा है कि उनके सहयोगी का बयान सांप्रदायिक नहीं था और 'सांप्रदायिक ताकतों से समाज की रक्षा को लेकर था।'

Priyanka Gandhi Wayanad: 'चाहे हिंदू सांप्रदायिकता हो या मुस्लिम कट्टरपंथ'
वहीं सीपीएम की वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीके श्रीमति ने कहा कि विजयराघवन की टिप्पणियां पार्टी की नीति और स्टैंड पर ही जोर देती हैं। वो बोलीं, 'चाहे जो भी हो.. चाहे हिंदू सांप्रदायिकता हो या मुस्लिम कट्टरपंथ,सीपीएम इसके खिलाफ कड़ा रुख अपनाएगी।'
Priyanka Gandhi Wayanad: विजयराघवन के किस बयान पर हो रहा है बवाल
68 वर्षीय विजयराघवन ने पिछले हफ्ते दावा किया था कि राहुल गांधी बिना 'सांप्रदायिक मुस्लिम गठबंधन' के दिल्ली (लोकसभा) नहीं पहुंच पाते और इसी तरह से प्रियंका गांधी इस साल वायनाड उपचुनाव इसी वजह से जीतीं, क्योंकि'उनके जुलूसों में सबसे खतरनाक कट्टरपंथी तत्व' शामिल थे।
Priyanka Gandhi Wayanad: कौन हैं सीपीएम नेता ए विजयराघवन?
विजयराघवन केरल के मुस्लिम-बहुल मलप्पुरम जिले से आते हैं। वह केरल में सीपीएम के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हैं। माना जाता है कि 2021 में सीपीएम की अगुवाई वाला एलडीएफ केरल की सत्ता पर अप्रत्याशित रूप से दोबारा काबिज हुआ तो उसमें उनका बहुत ही बड़ा योगदान था। उनकी पत्नी आर बिंदू अभी भी राज्य की उच्च शिक्षा मंत्री हैं।
खेतिहर मजदूर के घर में पैदा हुए विजयराघवन सीपीएम की छात्र इकाई फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से राजनीति में आए और आपातकाल के दौरान इसके प्रदेश नेतृत्व के स्तर तक पहुंच गए। 1999 में उन्होंने पलक्कड़ लोकसभा से जीत दर्ज की। इसके बाद 1999 और 2004 में वे दो बार राज्यसभा के लिए चुने गए।
लेकिन, 2014 में कोझिकोड से और 2024 में पलक्कड़ से लोकसभा चुनाव में उन्हें हार मिली। जून 2018 से अप्रैल 2022 के बीच वह प्रदेश में एलडीएफ के संयोजक की भूमिका में रहे, जो सत्ताधारी गठबंधन के लिए बहुत ही अहम रोल है।
2021 के विधानसभा चुनाव में जब सीपीएम को अप्रत्याशित जीत मिली तो उसके बाद कन्नूर पार्टी कांग्रेस में उन्हें पोलित ब्यूरो में जगह दे दी गई। इस तरह से वह पार्टी के निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था तक पहुंचने वाले ईएमएस नंबूदरिपाद के बाद मलप्पुरम के दूसरे सीपीएम नेता हैं।
Priyanka Gandhi Wayanad: जीत को'कट्टरपंथियों'से जोड़ने वाले नेता के साथ क्यों खड़ी हुई CPM?
पिछले लोकसभा चुनाव में केरल में एलडीएफ एक सीट पर सिमट गया था। उसके बाद से सीपीएम खुद की कथित रूप से मुस्लिम-तुष्टिकरण वाली छवि से दूर करने की कोशिश कर रही है। लोकसभा चुनाव के नतीजे को हिंदुओं की नाराजगी से जोड़कर देखा गया है।
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मसलन, हाल में संपन्न हुए विधानसभा और लोकसभा उपचुनावों में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कांग्रेस की सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के प्रदेश अध्यक्ष सादिक अली शिहाब थंगल को 'जमात-ए-इस्लामी का कार्यकर्ता' करार दिया और कहा कि एक 'कट्टरपंथी वर्ग''आईयूएमएल में प्रभाव पाने की कोशिश कर रहा है।'












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