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"कोई सोच भी नहीं सकता कि कोई कहेगा कि हमें 1947 में आजादी नहीं मिली, प्रियंका गांधी का RSS प्रमुख का पलटवार

कर्नाटक के बेलगावी में कांग्रेस ने मंगलवार को 'जय बापू, जय भीम, जय संविधान' रैली आयोजित की जिसमें कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के देश की आजादी वाले बयान की कड़ी आलोचना की।

प्रियंका गांधी ने मोहन भागवत के बयान पर जिसमें भागवत ने कहा था कि "भारत को 1947 में स्वतंत्रता नहीं मिली थी असली स्‍वतंत्रता राम मंदिर के निर्माण के वक्‍त मिली" जमकर हमला बोला।

Priyanka Gandhi

'जय बापू, जय भीम, जय संविधान' रैली में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा आजादी मिलने के दशकों बाद कोई ये कह सकता है कि हमें आजादी 1947 में नहीं मिली. ऐसा अपमान होगा, ये किसी ने कभी नहीं सोचा था देश में ऐसी सरकार आएगी जिसके मंत्री संविधान को कमजोर करने की बात करेंगे।

प्रियंका गांधी ने अंबेडकर पर टिप्पणी को लेकर अमित शाह पर निशाना साधा

प्रियंका गांधी ने बीआर अंबेडकर पर की गई टिप्पणियों के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा और कहा कि 'कई सरकारें आईं और गईं, और सिर्फ कांग्रेस की ही नहीं बल्कि कई पार्टियों की सरकारें रहीं लेकिन आज तक कोई नहीं ऐसी सरकार आ गई जिसका गृह मंत्री संसद में बाबा साहब अंबेडकर का अपमान कर सकता है। आजादी मिलने के दशकों बाद कोई ये कह सकता है कि हमें आजादी 1947 में नहीं मिली. ऐसा अपमान होगा, ये किसी ने कभी नहीं सोचा था सरकार से आओ कि मंत्री संविधान को कमजोर करने की बात करेंगे।"

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने क्‍या कहा था?

बता दें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भारत के इतिहास और इसकी सच्ची स्वतंत्रता के बारे में ये टिप्‍पणी राम मंदिर के स्‍थापना के एक वर्ष पूुरे होने के अवसर पर दी थी। भागवत ने भगवान राम, कृष्ण और शिव जैसे पात्रों में निहित पांच सहस्राब्दियों से चली आ रही परंपरा का जिक्र करते हुए कहा था कि भारत की वास्तविक स्वतंत्रता राम मंदिर के 'प्राण प्रतिष्ठा' समारोह के साथ साकार हुई।

राहुल गांधी ने लगाया था आरोप

मोहन भागवत के इस बयान ने विवाद को हवा दी है और विपक्षी दलों ने खूब आलोचना की है। विवाद को और हवा तब मिली जब राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी के नए मुख्यालय 'इंदिरा भवन' का उद्घाटन करते हुए भाजपा और आरएसएस पर भारतीय संस्थाओं पर कब्जा करने का आरोप लगाया था । गांधी ने तर्क दिया कि लड़ाई केवल एक राजनीतिक इकाई के खिलाफ नहीं बल्कि भाजपा और आरएसएस द्वारा वैचारिक और संस्थागत अधिग्रहण के खिलाफ थी।

राहुल गांधी ने कहा था "हमारी विचारधारा हजारों सालों से आरएसएस की विचारधारा से लड़ रही है। यह मत सोचिए कि हम निष्पक्ष लड़ाई लड़ रहे हैं। इसमें कोई निष्पक्षता नहीं है।"

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