राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तीनों कृषि बिल को दी मंजूरी
नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तीनों ही कृषि विधेयकों को अपनी मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब ये तीनों ही कृषि विधेयक एक्ट बन गए हैं। इस विधेयकों को लोकसभा और राज्यसभा में पास किए जाने के बाद राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था। दोनों ही सदनों में विपक्ष ने इन विधेयकों का जमकर विरोध किया था। यहां तक कि दोनों सदन में इन विधेयकों के पास होने के बाद विपक्ष के नेताओं ने राष्ट्रपति से मुलाकात करके इन बिलों को मंजूरी नहीं देने की अपील की थी।
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इससे पहले कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने इन बिलों को मंजूरी नहीं देने की राष्ट्रपति से सिफारिश की थी। राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा था कि लगभग 18 राजनीतिक दलों के नेताओं ने इकट्ठा होकर निर्णय लिया था कि माननीय राष्ट्रपति के सामने ये बात लाई जाए कि किस तरह से राज्यसभा में किसानों से संबंधित बिल पास किया गया। इस बिल को सरकार को राजनीतिक दलों से, किसान नेताओं से बात करके लाना चाहिए था। आजाद ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात के बाद कहा कि संसद में कृषि संबंधी विधेयकों को 'असंवैधानिक' तरीके से पारित किया गया है इसलिए राष्ट्रपति को इन विधेयकों को संतुति नहीं देकर इनको वापस भेजना चाहिए। उन्होंने यह दावा भी किया कि रविवार को राज्यसभा में हंगामे के लिए विपक्ष नहीं बल्कि सरकार जिम्मेदार है।
कृषि विधेयकों को लेकर शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की थी। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में दिल्ली पहुंचे नेताओं ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि वो राज्यसभा में पास हुए कृषि विधेयकों पर हस्ताक्षर ना करें। हरसिमरत कौर ने कहा था कि उनकी पार्टी के अलावा 18 और विपक्षी दलों ने कृषि विधेयकों को लेकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से संपर्क किया है। उन्होंने लिखा, 'शियद के बाद अब 18 विपक्षी दलों ने पुनर्विचार के लिए संसद में कृषि बिलों को वापस लेने के लिए राष्ट्रपति से संपर्क किया है। मैं राष्ट्रपति कोविंद जी से अपील करती हूं कि अन्नदाता की आवाज पर ध्यान दें और संघ सरकार से उनकी चिंताओं को दूर करने का आग्रह करें।'












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