भारत ने की चीन की कमर तोड़ने की तैयारी, इस क्षेत्र में कस्टम ड्यूटी 15-20% बढ़ाने पर विचार
नई दिल्ली- लद्दाख में चीन ने जो हरकत की है उसके लिए भारत उसे कभी माफ नहीं कर सकता। इसीलिए अब भारत उसे आर्थिक मोर्चे पर एक के बाद एक झटका देते हुए आत्मनिर्भर भारत की मुहिम को आगे बढ़ाने की कोशिशों में जुट गया है। अब भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में चीन को बहुत बड़ी चपत लगाने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। दरअसल, इस समय भारत दुनिया में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में बहुत ही कामयाबी से आगे बढ़ता जा रहा है। लेकिन, दिक्कत ये है कि इससे जुड़े ज्यादातर उपकणों के लिए हम अभी भी चीन पर ही निर्भर हैं। लेकिन, बहुत ही जल्दी चीन पर यह निर्भरता खत्म करने की तैयारी शुरू हो चुकी है।

भारत ने की चीन की कमर तोड़ने की तैयारी
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को खत लिखकर कहा है कि वह सोलर मॉड्यूल, सोलर सेल और सोलर इंवर्टर के आयात पर 15 से 50 फीसदी बेसिक कस्टम ड्यूटी लगाए। इस बीच मंत्रालय ने जहाजरानी मंत्रालय के साथ मिलकर देश के बड़े बंदरगाहों के आसपास 6-7 जमीन के टुकड़ों की भी पहचान की है, जहां पर सोलर उपकरणों के निर्माण के लिए प्रोडक्शन यूनिट शुरू की जा सकती है। बड़े बंदरगाहों के नजदीक इस तरह की प्रोडक्शन यूनिट लगाने का फायदा यह होगा कि इससे लॉजिस्टिक का खर्च कम होगा और अगर मुमकिन रहा तो इसके निर्यात में भी आसानी रहेगी। बिजनेस टुडे से बात करते हुए केंद्रीय ऊर्जा, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने बताया कि, 'हम मैन्युफैक्चरिंग जोन बनाने की सोच रहे हैं। हमने इसको लेकर जहाजरानी मंत्रालय के साथ चर्चा की थी और उनसे बंदरगाहों के पास में जमीन की तलाश करने का अनुरोध किया है।'

बेसिक आयात शुल्क में भारी इजाफे की रणनीति
सोलर उपकरणों के निर्माण के लिए बंदरगाहों के पास वाली जगह खोजने को लेकर जब आरके सिंह से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि 'एक कारण तो है जमीन की उपलब्धता और इसके बाद अगर आपको कुछ कच्चा माल आयात करना है तो लॉजिस्टिक का खर्चा घट जाएगा। 6-7 लोकेशन विचाराधीन हैं।' मंत्रालय ने सोलर मॉड्यूल, सोलर सेल और सोलर इंवर्टर पर 15 से 20 फीसदी बेसिक कस्टम ड्यूटी लगाने पर भी जोर दिया है और इसके लिए वित्त मंत्रालय को प्रस्ताव भी लिखकर दिया है। यह बेसिक कस्टम ड्यूटी उस सेफगार्ड ड्यूटी के ऊपर होगा जो चीन पर शिकंजा कसने और घरेलू निर्माण की रक्षा के लिए 2021 के जुलाई तक के लिए बढ़ाया गया है। ऊर्जा मंत्री ने कहा है कि 'सेफगार्ड ड्यूटी अस्थाई है, जबकि यह योजना स्थाई होगी। उन्होंने कहा है कि हम आयात शुल्क को तबज्जो देंगे, जो कि स्थाई तरीका है। उम्मीद है कि यह होना चाहिए।'

सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में 'सुपर पावर' बनेगा भारत!
बता दें कि राजस्व विभाग ने 29 जुलाई को एक नोटिफिकेशन के जरिए चीन, थाईलैंड और वियतनाम से आयात होने वाले सभी सोलर सेल और मॉड्यूल पर 30 जुलाई, 2020 से 29 जनवरी, 2021 तक 14.90 % और 30 जनवरी, 2021 से 29 जुलाई, 2021 तक 14.50 % ड्यूटी लगाने का ऐलान किया था। सबसे बड़ी बात ये है कि भारत ने अक्षय ऊर्जा की क्षमता (अधिकतर सौर ऊर्जा) के क्षेत्र में बहुत ज्यादा तरक्की की है और दुनिया में इस क्षेत्र में यह सबसे तेजी से आगे बढ़ना वाला देश है। लेकिन, सच्चाई ये है कि अभी 80 फीसदी सोलर उपकरण आयात किया जाता है और उसमें भी सबसे बड़ा हिस्सा चीन से मंगवाया जाता है। इसी स्थिति को पलटने के लिए अब ऐसे उपकरण घरेलू स्तर पर बनाने की योजना पर काम चल रहा है और चीन पर निर्भरता खत्म करने के लिए आयात शुल्क बढ़ाने की बात हो रही है।

पिछले साल अप्रैल से दिसंबर तक 117.9 करोड़ डॉलर का आयात
जाहिर है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के साथ जारी तनाव की वजह से भारत अब चीन पर निर्भरता पूरी तरह खत्म करने की दिशा में एक के बाद एक बड़े कदम उठाते जा रहा है। अगर पिछले वित्त वर्ष की बात करें तो भारतीय सोलर पावर कंपनियों ने चीन से 117.9 करोड़ डॉलर का सोलर उपकरण आयात किया था। बता दें कि मोदी सरकार ने 2022 तक देश में नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता बढ़ाकर 175 गीगावॉट करने का लक्ष्य तय किया है, जिसमें से अकेले सौर ऊर्जा की क्षमता 100 गीगावॉट करने की है। जहां तक मौजूदा क्षमता की बात है तो 2019 के दिसंबर में देश में 34 गीगावॉट की अक्षय ऊर्जा उत्पादन की क्षमता हासिल कर ली गई थी।












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