'मैं अगर मर जाऊं तो तुम', प्रेमानंद महाराज का ये शक्तिशाली मंत्र बिना सुने मत जाना! पल भर में बदल जाएगा जीवन

Premanand Maharaj Pravachan: संत प्रेमानंद जी महाराज के स्वास्थ्य और स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे के साथ कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन भ्रामक खबरों और अफवाहों ने भक्तों के बीच चिंता पैदा कर दी थी, जिसके कारण लोग बार-बार संत का हाल जानने के लिए आश्रम पहुंच रहे थे।

हालांकि, आश्रम प्रशासन और पुलिस ने साफ किया है कि संत प्रेमानंद जी पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं और नियमित रूप से अपने अनुयायियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। पुलिस ने भी लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें।

premanand ji maharaj

स्वास्थ्य की अफवाहों के इसी माहौल में प्रेमानंद महाराज का एक संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जो उनके भक्तों के लिए 'जीवन का सार' बन गया है। इस वीडियो में महाराज अपने अनुयायियों को 'कल की मृत्यु' की कल्पना कराकर अमर रहने का रास्ता समझा रहे हैं।

प्रेमानंद महाराज ने भक्तों को दिया जीवन का सबसे बड़ा मंत्र
महाराज का संदेश है कि: 'मैं अगर कल मर जाऊं तो तुम आजीवन हमारी वाणी के अनुसार चलना, धर्मपूर्वक चलना। कभी धर्म से विरुद्ध मत चलना। कभी किसी वैभव (धन और संपत्ति का मोह) के गुलाम मत बनना, किसी के भी गुलाम मत बनना केवल श्रीजी की गुलामी करना।'

महाराज के इस संदेश में मृत्यु को स्वीकार कर, बाहरी संसार की गुलामी त्यागने और केवल धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान है, जो हर भक्त के लिए सबसे बड़ा 'जीवन मंत्र' है। महाराज की यह सकारात्मकता दिखाती है कि शारीरिक कष्ट के बावजूद उनका ध्यान केवल भक्ति और राधारानी की कृपा पर केंद्रित है।

दैनिक दिनचर्या पर असर: महाराज प्रतिदिन रात लगभग 2 बजे श्री कृष्ण शरणम् सोसाइटी से लगभग 2 किलोमीटर पैदल चलकर रमण रेती स्थित काली कुंज आश्रम पहुंचते थे, जहां हजारों भक्त उनके दर्शन के लिए एकत्र होते थे। पदयात्रा स्थगित होने से यह सिलसिला फिलहाल रुक गया है।

अब 'रोजाना' हो रही डायलिसिस: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संत प्रेमानंद महाराज पिछले लंबे समय से पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज (Polycystic Kidney Disease) नामक आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित हैं। यह बीमारी उन्हें वर्ष 2006 से है, जिसमें उनकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी हैं।

पहले महाराज सप्ताह में पांच दिन डायलिसिस कराते थे, लेकिन अब उनका डायलिसिस रोजाना किया जा रहा है, जिससे उनकी शारीरिक स्थिति की गंभीरता का पता चलता है।

आश्रम में ही इलाज: महाराज अपने निवास स्थान श्री कृष्ण शरणम् सोसाइटी के एक फ्लैट में रहते हैं, जबकि दूसरे फ्लैट में डायलिसिस के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। छह डॉक्टरों की एक टीम उनकी देखभाल में जुटी है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया के एक हृदय रोग विशेषज्ञ भी शामिल हैं।

प्रेमानंद महाराज के प्रति भक्तों की गहरी श्रद्धा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई प्रमुख हस्तियों ने उन्हें किडनी दान करने का प्रस्ताव दिया है। अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा ने भी महाराज से मुलाकात के दौरान उन्हें किडनी दान करने की इच्छा जताई थी।

कौन हैं संत प्रेमानंद महाराज?
प्रेमानंद महाराज का जन्म कानपुर के आकरी गांव में अनिरुद्ध कुमार पांडे के रूप में हुआ था। वह महज 13 वर्ष की आयु में घर छोड़कर अध्यात्म के मार्ग पर निकल पड़े थे। उन्होंने काशी में गुरु गौरी शरण जी महाराज के सान्निध्य में लगभग 15 महीने तक साधना की। बीमारी के बावजूद, वह वृंदावन आकर पूरी तरह से राधा नाम जप में लीन हो गए। वह अपनी दोनों खराब हो चुकी किडनियों को भी 'कृष्णा' और 'राधा' नाम से पुकारते हैं।

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