2019 लोकसभा चुनाव के लिए प्रशांत किशोर ने शुरू किया काम
नई दिल्ली। चुनावी रणनीतिकार, प्रशांत किशोर ने तमाम कयासों को विराम लगाते हुए 2019 आम चुनाव के लिए काम करना शुरू कर दिया है। प्रशांत किशोर ने चुनावी रणनीति बनाने के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं। वो पहले बीजेपी, जेडीयू और कांग्रेस के लिए काम कर चुके हैं। उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू के लिए चुनावी रणनीति बनाई थी और तमाम दावों के बावजूद एनडीए को हार का सामना करना पड़ा था। नीतीश कुमार की पार्टी तब एनडीए के बजाय महागठबंधन का हिस्सा थी।

जेडीयू के लिए काम शुरू किया
प्रशांत किशोर ने आम चुनाव 2019 के लिए एक बार फिर अपने पुराने क्लाइंट यानी जेडीयू के लिए काम शुरू कर दिया है। इस बार जेडीयू बीजेपी के साथ मिलकर काम कर रही है और वो एनडीए का हिस्सा है। पहले ऐसा कहा जा रहा था कि बीजेपी और पीके के बीच जो मतभेद थे वो दूर हो गए हैं और वो बीजेपी के लिए काम करेंगे लेकिन अचानक बदली परिस्थितियों में उन्होंने जेडीयू के लिए हामी भरी। जेडीयू महासचिव केसी त्यागी ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा है कि वे अपना काम शुरू भी कर चुके हैं। पीके को अपने पास लाने के लिए कई राजनीतिक दलों में जोर-आजमाइश हो रही थी। टीआरएस, जेडीएस, बीजेपी, कांग्रेस और तेलुगुदेशम पार्टी भी उन्हें लोकसभा चुनाव के लिए अपने पाले में लाना चाह रही थी लेकिन बाजी जेडीयू के हाथ लगी। चुनावी

मोदी और बीजेपी के लिए लकी रहे
रणनीतिकार के तौर पर पीके को पहली सफलता तब मिली जब उन्होंने 2012 में नरेंद्र मोदी को तीसरी बार गुजरात का मुख्यमंत्री बनाने में मदद की। हालांकि उन्हें चर्चा उस समय अधिक मिली जब उन्होंने सीएजी (सिटिजन फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस) के जरिये बीजेपी को 2014 का लोकसभा चुनाव पूर्ण बहुमत के साथ जिताने में मदद की। 2015 में पीके और उनके कुछ साथियों ने अलग होकर I-PAC नाम से ग्रुप बनाया और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ काम कर महागठबंधन बनाया, जिसके चलते बीजेपी का बिहार में सत्ता पाने का सपना चूर हो गया।

कांग्रेस के लिए अनलकी पीके
इसके बाद किशोर कुमार ने उत्तरप्रदेश और पंजाब के चुनाव में कांग्रेस के लिए काम किया लेकिन वे उत्तरप्रदेश में कांग्रेस की किस्मत बदलने में नाकाम रहे। हालांकि पंजाब में आम आदमी पार्टी के खिलाफ अच्छी रणनीति बनाकर कांग्रेस को जीत दिलाने में मदद की। 2013 से ही करीब 2500 प्रोफेशनल, पीके के साथ काम कर चुके हैं। इन लोगों ने पहले सीएजी में उनके साथ काम किया और फिर I-PAC में।












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