2024 में PK के दम पर सत्ता वापसी की राह देख रही कांग्रेस, अगले महीने बड़ा फैसला, जानिए क्या होगी नई रणनीति
नई दिल्ली. 20 अप्रैल। कांग्रेस पार्टी को फिर से एक नए कलेवर में पेश करने की जद्दोजहद चल रही है। इसके लिए चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर पर हर किसी की नजर हैं। पिछले तकरीबन छह महीने से प्रशांत किशोर की कांग्रेस में एंट्री को लेकर चर्चा चल रही है और इस बाबत कांग्रेस पार्टी अहम बैठक भी कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार प्रशांत किशोर ने शनिवार को कांग्रेस को फिर से खड़ा करने के लिए एक प्रेजेंटेशन दिया था। राहुल गांधी से भी प्रशांत किशोर लगातार मिल रहे हैं। ऐसे में अब लगभग तय माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर जल्द ही कांग्रेस के साथ जुड़ सकते हैं।
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अगले महीने पीके पर अंतिम फैसला
प्रशांत किशोर के कांग्रेस में शामिल होने पर अंतिम फैसला अगले महीने राजस्थान में होने वाली बैठक में लिया जाएगा। अगले महीने राजस्थान में कांग्रेस का शिविर होने जा रहा है, इस बैठक में ही प्रशांत किशोर पर फैसला लिया जाएगा। राजस्थान में होने वाले कांग्रेस शिविर में 8 लोगों की कमेटी का गठन किया गया है, जिसमे दिग्विजय सिंह, मुकुल वासनिक, केसी वेणुगोपाल, रणदीप सुरजेवाला शामिल हैं। इस बैठक से पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि 2014 के बाद से पीके देश में ब्रांड बन गए हैं। 2014 में वह नरेंद्र मोदी के साथ थे, उसके बाद नीतीश कुमार, फिर पंजाब में कांग्रेस के साथ और कई लोगों के साथ रह चुके हैं। हम भी उनसे और उनकी एजेंसी से राय लेते हैं, उनका अनुभव विपक्ष को एकजुट करने में सहायक हो सकता है।

कांग्रेस में पीके की एंट्री लगभग तय
गौर करने वाली बात है कि पिछले साल अक्टूबर माह में भी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ पीके ने बैठक की थी और इस दौरान उन्होंने पार्टी में अपनी भूमिका को लेकर बात की थी। लेकिन कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने उनका विरोध किया था, जिसकी वजह से पीके की कांग्रेस में एंट्री टल गई थी। लेकिन अब माना जा रहा है कि हाईकमान प्रशांत किशोर को पार्टी में शामिल करने का फैसला ले चुके हैं। माना जा रहा है कि पीके विधानसभा और लोकसभा चुनाव में पार्टी की रणनीति को तैयार करेंगे। वह इस दौरान राज्यों के प्रभारी के साथ सीधे जुड़कर वह रणनीति को लागू करेंगे।

क्या है पीके की रणनीति
साथ ही प्रशांत किशोर गठबंधन के साथियों से बातचीत करेंगे और उनके साथ सीटों के बंटवारे पर भी बात करेंगे। इस रिपोर्ट को पीके सीधे सोनिया गांधी के साथ साझा करेंगे। हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि पहले भी पीके कांग्रेस के साथ जुड़े थे लेकिन पार्टी को कुछ खास लाभ नहीं हुआ था, ऐसे में एक बार फिर से पार्टी में उनकी एंट्री से क्या बड़ा बदलाव होगा। रिपोर्ट की मानें तो पीके ने अपने प्रेजेंटेशन में लोकसभा की 370 सीटों पर यूपी, बिहार, ओडिशा में कांग्रेस को अकेले लड़ने की बात कही है जबकि तमिलनाडु, महाराष्ट्र में गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने की बात कही है।

क्यों कांग्रेस चाहती है पीके का साथ
प्रशांत किशोर वकालत कर रहे हैं कि जिन राज्यों में पार्टी का भाजपा से सीधा मुकाबला है, उन जगहों पर पार्टी के स्ट्रक्चर को बदलने की जरूरत है। साथ ही पीके कांग्रेस में पूर्णकालिक अध्यक्ष की भी वकालत कर रहे हैं, जोकि संगठन को बेहतर तरह से चला सके। वहीं पीके के साथ कांग्रेस के आने की वजह को देखे तो वह तकरीबन 10 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ मिलकर काम कर चुके हैं। पीएम मोदी के अलावा, एमके स्टालिन, उद्धव ठाकरे, ममता बनर्जी, नीतीश कुमार, जगनमोहन रेड्डी के साथ मिलकर काम कर चुके हैं। वह बंगाल, आंध्र, महाराष्ट्र में पार्टी को मजबूत कर सकते हैं। 8 राज्यों में काम करने का अनुभव पीके के लिए काफी अहम हो सकता है, जिसका कांग्रेस लाभ उठाना चाहेगी। पीके लंबे समय तक भाजपा के साथ काम कर चुके हैं और वह भाजपा की कमजोरी और मजबूती को बेहतर तरह से जानते हैं।












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