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जब प्रमोद महाजन के सीने में उतार दी थी 3 गोलियां, पिस्टल लेकर वर्ली थाने पहुंचा था छोटा भाई; पढ़ें पूरा किस्सा

बीजेपी के मास्टर रणनीतिकार और संकटमोचन के रुप में छवि कायम रखने वाले 'प्रमोद महाजन' की उनके ही भाई ने 17 साल पहले जान ले ली थी। एकाएक गोलियों की बौछार में 'प्रमोद महाजन' जख्मी हुए। 13दिन बाद अस्पताल में उनकी मौत हुई थी।

Pramod Mahajan Death Anniversary

भारतीय जनता पार्टी को राष्ट्रीय पटल तक पहुंचाने वाले नेताओं में सबसे खास नाम है 'प्रमोद महाजन'। आज जिस तरह गृहमंत्री अमित शाह को बीजेपी का मास्टर रणनीतिकार और संकटमोचन के रुप में भी जाना जाता है। लगभग दो दशक पहले दोनों का श्रेय प्रमोद महाजन अपने नाम कर चुके थे। हालांकि, असमय मौत के चलते वो अपना कद हासिल न कर सके। आज ही के दिन यानी 3 मई को प्रमोद महाजन ने अंतिम सांस ली थी। जब बड़े भाई प्रमोद के सीने में छोटे भाई प्रवीण ने अपनी 32 बोर की पिस्टल से एकाएक तीन गोलियां उतार दी थीं।

13 दिनों तक हिंदुजा अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूलने के बाद प्रमोद महाजन ने दम तोड़ दिया। भाई की हत्या के आरोप में कानून ने प्रवीण को उम्रकैद की सजा दी। 3 मार्च 2010 को प्रवीण की भी मौत हो गई। लेकिन, मरने से पहले 2009 में प्रवीण ने नासिक जेल में माझा एलबम (मेरी एलबम) नाम की एक किताब लिखी। आइए जानते हैं इतिहास के पन्नों में दर्ज वो भयानक सुबह...

32 बोर की पिस्टल से भाई का सीना कर दिया था छलनी

बात है 22 अप्रैल 2006 की सुबह के साढ़े सात बजे की। जब प्रमोद महाजन मुंबई के वर्ली इलाके स्थित अपने आवास पूर्णा में मौजूद थे। सफेद कुर्ते में प्रमोद महाजन चाय पी रहे थे। तभी घंटी बजती है और दरवाजा खुलते ही छोटा भाई प्रवीण सामने खड़ा मिलता है। प्रमोद अपने भाई से सुबह-सुबह यूं आने की वजह पूछते हैं। जवाब मिलता है कि प्रमोद महाजन उन्हें वक्त नहीं देते हैं। न ही व्यापार में कोई सहयोग करते हैं। इसके बाद दोनों भाइयों में बहस छिड जाती है। अचानक ही प्रवीण अपनी 32 बोर की पिस्टल निकालकर प्रमोद पर अंधाधुंध फायरिंग कर देता है।

पिस्टल लेकर थाने पहुंचा और बोला- प्रमोद महाजन को मार दिया

बड़े भाई प्रमोद महाजन के सीने में तीन गोलियां उतारने के बाद प्रवीण महाजन की पिस्टल जाम हो गई। हत्या को अंजाम देकर प्रमोद महाजन के घर से निकला प्रवीण 15 सीढ़ियां नीचे उतरता गया। टैक्सी लेकर सुबह 8 बजकर 30 मिनट पर हाथ में पिस्टल लेकर वर्ली थाने पहुंचा और मराठी भाषा में बोला कि प्रमोद महाजन को मार दिया है। पुलिस ने प्रवीण महाजन को गिरफ्तार कर लिया। उधर, प्रमोद महाजन को खून से लथपथ मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में भर्ती कराया गया। 13 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच झूलते रहने के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया।

प्रवीन ने गोली चलाई...प्रमोद को आखिरी सांस तक न हुआ था यकीन

प्रमोद के पड़ोसी गोपीनाथ मुंडे ने बताया था कि अस्पताल ले जाते वक्त प्रमोद होश में थे और उन्होंने कहा था कि प्रवीण ने मुझ पर गोली क्यों चलाई? हालांकि, इसका जवाब प्रवीण महाजन के साथ ही खत्म हो गया। दरअसल, भाई प्रमोद की हत्या के जुर्म में प्रवीण को आजीवन कारावास की सजा हुई। 3 मार्च 2010 को प्रवीण महाजन की ब्रेन हैमरेज के चलते मौत हो गई।

कौन है प्रमोद महाजन ?

महबूबनगर (वर्तमान तेलंगाना) में 30 अक्टूबर 1949 को जन्में प्रमोद महाजन कम उम्र से ही आरएसएस के सदस्य बन गए थे। साल 1974 में कॉलेज में पढ़ाना बंद कर आरएसएस के संघ प्रचारक बन गए। 1983 से 1985 तक प्रमोद महाजन बीजेपी के अखिल भारतीय सचिव रहे। 1986 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने। 1984 में प्रमोद महाजन ने लोकसभा चुनाव लड़ा। 1995 में शुरू हुए शिवसेना-बीजेपी गठबंधन के पीछे मास्टरमाइंड थे। यह बीजेपी में एकमात्र व्यक्ति थे, जिनके ऊपर बाल ठाकरे ने भरोसा जताया था। 1996 में प्रमोद महाजन अपना पहला लोकसभा चुनाव जीते और उन्हें रक्षा मंत्री बनाया गया। 1998 में दोबारा चुनाव हुए और बीजेपी की सत्ता में फि‍र से एंट्री हुई, लेकि‍न उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

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