पावर मिनिस्टर ने बताया क्यों पैदा हुआ बिजली संकट? जानिए कैसे इस चुनौती से निपट रही है सरकार

नई दिल्ली, अक्टूबर 09: कोयले की किल्लत ने देश को बड़े बिजली संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। देश के कई राज्यों में बिजली संकट के बादल मंडरा रहे हैं। दिल्ली, पंजाब, तमिलनाडु, राजस्थान, महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में बिजली का संकट पैदा हो सकता है। इस बिजली संकट को लेकर उर्जा मंत्री की ओर से कारण बताए गए हैं। उर्जा मंत्री ने कहा कि, अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार के कारण बिजली की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि और सितंबर में कोयला खदान क्षेत्रों में भारी वर्षा ने कोयले के उत्पादन को प्रभावित किया है।

Power Ministry says unprecedented increase electricity demand reasons behind depletion of power crisis

बिजली मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि, इसके अलावा आयातित कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते घरेलू कोयले पर निर्भरता बढ़ी है। जिसके चलते बिजली संयंत्रों में कोयले के स्टॉक में कमी देखने को मिली है। बिजली मंत्रालय ने कहा है कि बिजली की दैनिक खपत 4 अरब यूनिट प्रति दिन से अधिक हो गई है और 65-70% मांग कोयले से चलने वाले बिजली सयंत्र से ही पूरी की जा रही है।

मंत्रालय ने कहा कि बिजली मंत्रालय द्वारा गठित कोर मैनेजमेंट टीम (सीएमटी) दैनिक आधार पर कोयले के स्टॉक की बारीकी से निगरानी और प्रबंधन कर रही है और कोल इंडिया लिमिटेड के साथ अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है। इसके साथ यह भी कहा गया है कि भारतीय रेलवे बिजली संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति में सुधार करेगा।कोल इंडिया द्वारा कोयले का कुल प्रेषण(डिस्पेच) 7 अक्टूबर को 1.501 मीट्रिक टन तक पहुंच गया।

कोयला और कोल इंडिया मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि वे प्रेषण बढ़ाने के लिए सर्वोत्तम प्रयास कर रहे हैं। अगले 3 दिनों में बिजली क्षेत्र को कोयला डिस्पैच प्रति दिन 1.6 मीट्रिक टन होने की उम्मीद है, बाद में 1.7 मीट्रिक टन प्रति दिन का लक्ष्य है। पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों में कोयले की कमी से बिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा है। कई राज्यों ने तो यहां तक कह दिया है कि अगर जल्द ही मांग पूरी नहीं हुई तो बिजली की किल्लत हो जाएगी।

बारिश ने खदानों से बिजली उत्पादन इकाइयों तक ईंधन की आवाजाही को प्रभावित किया, जिससे गुजरात, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और तमिलनाडु सहित कई राज्यों में बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ। पंजाब में, ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले की कमी ने कटौती को बढ़ा दिया है और राज्य में कई स्थानों पर लोड शेडिंग की जा रही है। उत्तरप्रदेश कोयले की कमी की वजह से करीब 2000 मेगावाट क्षमता की इकाइयां बंद करनी पड़ी हैं। उत्तरप्रदेश में बिजली की कटौती भी की जा रही है। उत्तरप्रदेश में बिजली की मांग लगभग 17000 मेगावाट है। जबकि मौजूदा समय में 15000 मेगावाट के आसपास बिजली उपलब्ध है। ऐसे में 1000 से 1500 मेगावाट तक की कटौती की जा रही है।

राजस्‍थान सरकार ने शुक्रवार ऐलान किया था कि कोयले की देशव्‍यापी कमी के चलते एक घंटे की बिजली की कटौती की जाएगी। राजस्थान सरकार द्वारा संचालित सेवा ने कहा कि 10 प्रमुख शहरों में कटौती की जाएगी। बिजली घरों में कोयले की कमी पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कहा कि, कोयले की छत्तीसगढ़ में कमी ना हो उसपर हमारे अधिकारियों ने लगातार नज़र बना रखी है। इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

उधर केंद्रीय ऊर्जा सचिव ने कहा कि, पेट्रोलियम सचिव ने जवाब दिया है कि बवाना और प्रगति स्टेशनों को सभी आवश्यक मात्रा में गैस की आपूर्ति की जाएगी। एनटीपीसी को दादरी और जाज्जर स्टेशनों के लिए राष्ट्रीय औसत के बराबर कोयला स्टॉक बढ़ाने और पूर्ण उपलब्धता देने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि, दिल्ली डिस्कॉम दादरी से बिजली का शेड्यूल नहीं कर रही है क्योंकि वे 25 साल बाद पीपीए से बाहर निकलना चाहती हैं। उन्हें पावर निर्धारित करने की सलाह दी गई है।

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