विजय रूपानी: कभी राजनीति से लेना चाहते थे सन्यास अब हैं गुजरात के सीएम
नई दिल्ली। गुजरात में मुख्यमंत्री पद का चेहरा विजय रूपानी माने जा रहे हैं। विजय रुपानी को पिछले साल नरेंद्र मोदी का करीबी मानी जाने वाली आनंदीबेन पटेल से कुर्सी छीनकर सौंपी गई थी। जैन बनिया समुदाय से ताल्लुक रखने वाले रुपानी को सीएम की कुर्सी मिलने के पीछे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के करीबी होना माना जाता है। संघ के बैकग्राउंड से आने वाले विजय रुपानी ने 2014 के लोकसभा चुनावों में गुजरात की सभी 26 सीटों पर अमित शाह और नरेंद्र मोदी की अनुपस्थिति में पार्टी की रणनीति को बूथों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभायी थी।

पटेल आंदोलन और दलित आंदोलन के बीच जैन समुदाय से आने वाले रुपानी को कमान इसलिए दी गई थी कि वे इस आंदोलन को खत्म कर सकें। लेकिन वे ऐसा करने में सफल नहीं रहे। पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर और दलिल समाज से आने वाले जिग्नेश मेवानी गुजरात में अपने-अपने समुदाय के नेता माने जा रहे है। यह तीनों भाजपा के लिए फिलहाल बड़ी मुश्किल बने हुए हैं। रुपानी इन तीनों को अपने खेमे में मिलाने में असफल रहे हैं।

राजनीतिक कैरियर
विजय रूपानी ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के साथ जुड़े छात्र कार्यकर्ता के रूप में अपना करियर शुरू किया। वे 1971 में जनसंघ के साथ जुड़कर अपनी स्थापना के बाद से भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे। 1976 में आपातकाल के दौरान भुज और भावनगर की जेलों में 11 महीने तक कैद किया गया था। वे गुजरात सरकार में इकलौते नेता है आपातकाल में जेल जा चुके हैं। रुपानी ने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत 1987 में उन्हें राजकोट नगर निगम चुनावों से की । वे 1996 से 1997 तक राजकोट के मेयर रहे। रुपानी 1998 में भाजपा के गुजरात इकाई के महासचिव बने। 2006 में वे गुजरात पर्यटन के अध्यक्ष नियुक्त किए गए। वह 2006 से 2012 तक राज्यसभा सदस्य थे।
2014 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव जीता। तब वाजुभाई वाला गवर्नर बने और अपनी सीट छोड़ी और इसके बाद हुए उपचुनाव में रुपानी जीते। नवंबर 2014 में मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल द्वारा किए गए पहले कैबिनेट विस्तार में उन्हें मंत्री के रूप में शामिल किया गया था और उन्होंने परिवहन, जल आपूर्ति, श्रम और रोजगार मंत्रालय का आयोजन किया था। वह फरवरी 2016 से अगस्त 2016 तक बीजेपी राज्य अध्यक्ष थे। 5 अगस्त 2016 के गुजरात के मुख्यमंत्री बने।

रंगून में हुआ था जन्म
रुपानी का जन्म 1956 में तत्कालीन बर्मा की राजधानी रंगून में हुआ था। इनके परिजन बिजनेस के लिये वहां गये थे, लेकिन इनके जन्म के बाद वे 1960 में राजकोट लौट आए।
राजनीति छोड़ना चाहते थे लेकिन...
रुपानी के करीबियों के अनुसार, डेढ़ दशक पहले वह तब राजनीति छोड़ना चाहते थे जब उनका बेटा छत से गिरकर मर गया था, लेकिन सब लोगों ने मिलकर उन्हें संभाला। अभी भी उनके बेटे के नाम पर एक ट्रस्ट चलता है जो गरीब बच्चों की मदद करता है। उनकी एक बेटी लंदन में है और एक बेटा अभी पढ़ाई कर रहा है।












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