विश्वभारती यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में बोले PM मोदी-'गुरुदेव का विजन आत्मनिर्भर भारत का सार'
PM Narendra Modi attends centenary celebrations of Visva-Bharati University in Shantiniketan: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पश्चिम बंगाल की विश्वभारती यूनिवर्सिटी के शताब्दी कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया, अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि विश्वभारती की सौ वर्ष यात्रा बहुत विशेष है। विश्वभारती, मां भारती के लिए गुरुदेव के चिंतन, दर्शन और परिश्रम का एक साकार अवतार है। भारत के लिए गुरुदेव ने जो स्वप्न देखा था, उस स्वप्न को मूर्त रूप देने के लिए देश को निरंतर ऊर्जा देने वाला ये एक तरह का आराध्य स्थल है, सच कहूं तो विश्वभारती यूनिवर्सिटी टैगोर के सपनों को पूरा करने की ऊर्जा देती है।आपको बता दें कि कोरोना महामारी की वजह से विश्व भारती यूनिवर्सिटी का ये कार्यक्रम इस बार वर्चुअल तरीके से हुआ, जिसमें पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और केंद्रीय शिक्षा मंत्री, यूनिवर्सिटी के स्टाफ, टीचर शामिल हुए।
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पीएम ने कहा कि हमारा देश, विश्व भारती से निकले संदेश को पूरे विश्व तक पहुंचा रहा है।भारत आज इकलौता बड़ा देश है जो पैरिस अकॉर्ड के पर्यावरण के लक्ष्यों को प्राप्त करने के सही मार्ग पर है। जब हम स्वतंत्रता संग्राम की बात करते हैं तो हमारे मन में सीधे 19-20वीं सदी का विचार आता है। लेकिन ये भी एक तथ्य है कि इन आंदोलनों की नींव बहुत पहले रखी गई थी। भारत की आजादी के आंदोलन को सदियों पहले से चले आ रहे अनेक आंदोलनों से ऊर्जा मिली थी, जिसमें भक्ति आंदोन प्रमख था।
'गुरुदेव का विजन आत्मनिर्भर भारत का सार है'
भक्ति आंदोलन वो डोर थी जिसने सदियों से संघर्षरत भारत में आत्मविश्वास से भर दिया था। शिक्षण संस्थाओं ने भारत की आज़ादी के लिए चल रहे वैचारिक आंदोलन को नई ऊर्जा दी, नई दिशा दी, नई ऊंचाई दी। वेद से विवेकानंद तक भारत के चिंतन की धारा गुरुदेव के राष्ट्रवाद के चिंतन में भी मुखर थी। विश्व भारती के लिए गुरुदेव का विजन आत्मनिर्भर भारत का सार है। आत्मनिर्भर भारत अभियान भी विश्व कल्याण के लिए भारत के कल्याण का मार्ग है। ये अभियान, भारत को सशक्त करने का अभियान है, भारत की समृद्धि से विश्व में समृद्धि लाने का अभियान है।

कुछ खास बातें
- विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना 1921 में रवींद्रनाथ टैगोर ने पश्चिम बंगाल के शान्तिनिकेतन नगर में की।
- यह भारत के प्रमुख केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में से एक है।
- रवींद्रनाथ टैगोर के पिता महर्षि देवेन्द्रनाथ टैगोर ने 1863 ई में अपनी साधना हेतु कलकत्ते के निकट बोलपुर नामक ग्राम में एक आश्रम की स्थापना की जिसका नाम शांति-निकेतन' रखा था।
- इसी जगह पर गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने बालकों की शिक्षा हेतु एक प्रयोगात्मक विद्यालय स्थापित किया था जो प्रारम्भ में ब्रह्म विद्यालय,' बाद में शान्ति निकेतन' के नाम से मशहूर हुआ।
- आज शांति निकेतन का नाम विश्वभारती हैं, जहां लगभग 6000 छात्र पढ़ते हैं।
- ये जगह कोलकाता से 180 किमी उत्तर की ओर पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित है।
- मई 1951 में संसद के एक अधिनियम के विश्व-भारती को एक केंद्रीय विश्वविद्यालय और 'राष्ट्रीय महत्व का संस्थान' घोषित किया गया था।
- छात्रों को प्रकृति के सानिध्य में शिक्षा हासिल करनी चाहिए, अपने इसी सोच को ध्यान में रख कर रवींद्रनाथ टैगोर ने 'शांति निकेतन' की स्थापना की थी।
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