दिल्ली में बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकतंत्र तभी सफल है जब जनभागीदारी से विकास हो
नई दिल्ली। नानाजी देशमुख की जन्मशताब्दी के मौके पर दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोकतंत्र तभी सफल है जब जनभागीदारी से विकास हो और सरकार के साथ जनता का संवाद हो। जिन राज्यों में ज्यादा गरीबी है वहां पर मनरेगा का काम कम हो रहा है। जिन राज्यों में सुशासन है वहां ज्यादा काम होता है। अब मोबाइल ऐप 'दिशा' से हर व्यक्ति ऊपर तक अपनी बात पहुंचा सकता है। 18000 गांव ऐसे थे जो आज भी 18वीं शताब्दी में जीते थे। हमने कहा कि सभी गांवों तक बिजली पहुंचेगी और बहुत तेजी से हम आगे बढ़ रहे हैं।
नानाजी देशमुख के जन्मशताब्दी समारोह में पीएम मोदी का संबोधन

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गांव का विकास कैसे हो इसके लिए सरकार गंभीर है। हमारा प्रयास है कि गांव की अपनी जो शक्ति है, सबसे पहले उसी को जोड़ते हुए विकास का मॉडल बनाया जाए। जो सुविधाएं शहर में हैं वैसी अगर हम गांव में दे दें तो एक क्वालिटी ऑफ लाइफ में बदलाव आएगा और लोगों को गांव में रहने के लिए प्रेरित करेगा। लोकतंत्र तभी सफल है जब जनभागीदारी से विकास हो और सरकार के साथ जनता का संवाद हो। जिन राज्यों में ज्यादा गरीबी है वहां पर मनरेगा का काम कम हो रहा है। जिन राज्यों में सुशासन है वहां ज्यादा काम होता है। अब मोबाइल ऐप 'दिशा' से हर व्यक्ति ऊपर तक अपनी बात पहुंचा सकता है।
हमें समझना होगा कि चाहने से बात पूरी नहीं होती: पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश में संसाधनों के कारण आखिरी छोर के इंसान को हम कुछ नहीं दे पाते हैं। आज भारत सरकार में आने के बाद मैं इस बात से सहमत नहीं हूं। हिंदुस्तान के आखिरी छोर के व्यक्ति को भी उसके हक का पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमें समझना होगा कि केवल चाहने से बात पूरी नहीं होती है। अगर हम चीजों को समय सीमा में करें तो 70 साल में ग्रामीण विकास की जो गति रही है वह 2022 में इतनी तेज होगी कि ग्रामीण व्यक्तियों के जीवन में भी बदलाव आ जाएगा।
'नानाजी देशमुख ने देश के लिए अपना जीवन अर्पित कर दिया'
नानाजी देशमुख के जनशताब्दी समारोह में पीएम मोदी ने उनके जीवन के बारे में कई बातें बताईं। पीएम मोदी ने कहा कि नानाजी देशमुख ने देश के लिए अपना जीवन अर्पित कर दिया। लोकनायक जयप्रकाश नारायण युवाओं की प्रेरणा रहे थे। पटना में एक बार ऐसी स्थिति आई कि जयप्रकाश जी के ऊपर बहुत बड़ा हमला हुआ और नानाजी ने अपने हाथों पर उस हमले को झेल लिया, उनके हाथ की हड्डियां टूट गईं, लेकिन जयप्रकाश जी को उन्होंने बचा लिया। देश आजाद होने के बाद बड़े-बड़े लोग सत्ता के गलियारे में जगह ढूंढ रहे थे लेकिन जयप्रकाश जी दूर रहे।
जब जयप्रकाश जी को बचाने के लिए नानाजी खुद चोट खा बैठे
नानाजी देशमुख ने देश के लिए पूरा जीवन दे दिया लेकिन ज्यादा लोग उन्हें जानते नहीं थे। जयप्रकाश जी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन छेड़ा। जयप्रकाश जी ने दिल्ली की सल्तनत में खलबली मचा दी। जयप्रकाश जी को बचाने के लिए नानाजी खुद चोट खा बैठे। उनके हाथ में चोट आई। देश के लिए कुछ करते रहो इस मंत्र के साथ उन्होंने युवाओं को आमंत्रित किया। उनको उन्होंने ग्राम विकास के काम में लगाया। नानाजी ने मंत्रिपरिषद में जुड़ने से मना कर दिया और खुद को राजनीतिक जीवन से अलग रहकर 60 साल की उम्र के बाद उन्होंने अपना जीवन चित्रकूट और ग्रामीण विकास के लिए बिताया।












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