लद्दाख में PM Modi Shinkun La Tunnel निर्माण पर सहमत, भारत की सुरक्षा पुख्ता करने में अहम कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख की सुरक्षा पुख्ता करने के मकसद से बनाए जा रहे शिंकुन ला सुरंग के निर्माण पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने इस परियोजना को हरी झंडी दिखाई है।

PM Modi Shinkun La Tunnel Ladakh के निर्माण पर सहमत हो गए हैं। लद्दाख की सुरक्षा को मजबूत करने वाले इस महत्वपूर्ण कदम के तहत मनाली-दारचा-पदम-निमू अक्ष पर शिंकुन ला सुरंग बनाई जाएगी। 4.1 किलोमीटर की सुरंग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को मंजूरी दे दी। इस फैसले के बाद केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में सभी मौसम में कनेक्टिविटी की अनुमति मिल सकेगी।
लद्दाख की Shinkun La Tunnel के बारे में हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सुरंग तैयार होने के बाद सैनिकों के लिए जरूरी उपकरण और रसद की निरंतर आपूर्ति की जा सकेगी। रक्षा मामलों के जानकारों की राय में भारत के दो प्रतिद्वंद्वियों- चीन और पाकिस्तान के नापाक मंसूबों का मुंहतोड़ जवाब देने के नजरिए से भी इस सुरंग का निर्माण बेहद अहम है। सबसे खराब स्थिति में भी सेना को सामान सप्लाई की जा सकेगी।
सीमा सड़क संगठन (BRO) ने 2019 में दारचा-पदम-निमू अक्ष पर एक ब्लैक टॉप रोड बनाया था, लेकिन 16703 फीट ऊंचे शिंकुन ला पर भारी बर्फ के कारण सर्दियों के महीनों में सड़क का उपयोग नहीं किया जा सकता था। डिफेंस एक्सपर्ट की राय में एलओसी के पास सड़क लद्दाख की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि श्रीनगर-द्रास-काकसर-कारगिल राजमार्ग और एलएसी के पास मनाली-उपशी-लेह राजमार्ग के विपरीत, यह रास्ता पाकिस्तानी और चीनी सीमाओं पर लंबी दूरी के तोपखाने या मिसाइल फायरिंग से सुरक्षित हैं। यह दारचा-पदम-निमू मार्ग था। इसका उपयोग भारतीय सेना मई 2020 में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जुझारूपन के बाद पूर्वी लद्दाख में हथियार और गोला-बारूद की आपूर्ति भेजने के लिए किया गया था।
शिंकुन ला सुरंग निर्माण का निर्णय रणनीतिक लिहाज से अहम है क्योंकि मनाली-उपशी-लेह राजमार्ग पर हर मौसम में कनेक्टिविटी मिलेगी। सरकार को बारालाचा ला, लाचुलुंग ला और टैगलांग ला के तहत लगभग 38 किलोमीटर सुरंगों का निर्माण करना होगा। यह जगह 16000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर है, जहां साल में कम से कम पांच महीने बर्फ जमी रहती है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय ने करीब छह साल पहले 2017 में ही शिंकुन ला सुरंग बनाने का प्रस्ताव राजमार्ग और सड़क परिवहन मंत्रालय को भेजा था। हालांकि, विभाग शिंकुन ला के पास 13 किलोमीटर लंबी सुरंग निर्माण के पक्ष में था। इससे मौजूदा दारचा-उपशी-लेह हाईवे को जोड़ा जा सकेगा। इलाके और खराब उप-आर्कटिक तापमान को देखते हुए प्रस्ताव को तब तक लटकाए रखा गया जब तक कि चीनी अतिक्रमण के बाद 2020 में इसे बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) को नहीं सौंपा गया।
बुधवार की कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टनल और दोनों तरफ के एप्रोच रोड निर्माण को मंजूरी दी। परियोजना की कुल लागत 1681.51 करोड़ रुपये होगी और दिसंबर 2025 तक पूरी हो जाएगी। चूंकि बीआरओ ने शिंकुन ला के दोनों तरफ सड़क काटने और ब्लैक टॉपिंग का काम पहले ही कर लिया है, इसलिए सरकार को अब केवल 4.1 किमी भूमिगत मार्ग (सुरंग) का निर्माण कराना होगा।
लद्दाख की सीमा के बाद चीनी सेनाओं की मौजूदगी के कारण डिफेंस के नजरिए से Shinkun La Tunnel Ladakh के निर्माण का कदम बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसा इसलिए क्योंकि लद्दाख में निमू कारगिल के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश का मुख्यालय भी लेह के करीब है। इसका मतलब यह है कि अगर कारगिल-सियाचिन सेक्टर या पूर्वी लद्दाख सेक्टर में केंद्र शासित प्रदेश में 1597 किमी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति से निपटने में भारतीय सेना को मदद मिलेगी। सुरंग तैयार होने के बाद अत्याधुनिक उपकरणों की तेजी से तैनाती की जा सकती है।












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