लाल किले से अपने 10वें भाषण में पीएम मोदी ने बीजेपी के तीनों मूल एजेंडे को क्यों छोड़ दिया?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को लाल किले की प्राचीर से 90 मिनट तक बोले, धारा प्रवाह बोले, अपने अंदाज में बोले। अपने 10 वर्षों के कार्यकाल में विकास के लिए हुए कार्यों का ब्योरा रखने की कोशिश की। भ्रष्टाचार, परिवारवाद और तुष्टिकरण जैसे मसलों पर जमकर प्रहार किया।

मणिपुर के मुद्दे पर देश से बात की। 2024 में भी लौटकर लाल किले से देश को संबोधित करने की चर्चा हुई। लेकिन, बीजेपी के तीनों मूल एजेंडे को छुआ तक नहीं। ये मुद्दे हैं, राम मंदिर, अनुच्छेद 370 और यूनिफॉर्म सिविल कोड।

pm narendra modi

बीजेपी के तीनों मूल एजेंडे पीएम मोदी के भाषण से गायब
जनसंघ के जमाने से अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण, जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने और देश के सभी नागरिकों के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड लाना, भारतीय जनता पार्टी का मौलिक वादा और मूल एजेंडा रहा है। पार्टी ने रणनीति के तहत इन मुद्दों को पहले भी ठंडे बस्ते में रखा है। लेकिन लाइन स्पष्ट रही है कि जब भी उसके पास यह सब करने का जनादेश होगा तो वह इन्हें निश्चित तौर पर पूरा करके दिखाएगी और उसने ऐसा किया भी।

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बीजेपी के दो मूल वादे संवैधानिक व्यवस्था से हो चुके हैं पूरे
जब, 2019 में बीजेपी की लोकसभा चुनावों में बंपर बहुमत के साथ वापसी हुई तो करीब 90 दिनों के भीतर ही मोदी सरकार ने जम्मू और कश्मीर से विवादास्पद अनुच्छेद 370 और 35ए को संसद के माध्यम से हटा दिया। 2019 के ही नवंबर में अयोध्या में पवित्र राम जन्मभूमि केस में सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुओं के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

प्रधानमंत्री मोदी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ ही महीने बाद 370 की समाप्ति की पहली वर्षगांठ के दिन ही अयोध्या में भगवान राम लाल के भव्य मंदिर की आधारशिला रखी। अगले साल लोकसभा चुनावों से पहले यहां राम लला के प्राण प्रतीष्ठा समारोह की भी रूप-रेखा तैयार हो चुकी है। लेकिन, अगले लोकसभा चुनावों से पहले लाल किले से अपने मौजूदा कार्यकाल के आखिरी भाषण में उन्होंने इन सब बातों का जिक्र तक नहीं किया। जबकि, पार्टी के यह दोनों ही वादे पूरे हो चुके हैं।

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यूसीसी पर भी नहीं हुई बात
अभी बीजेपी के मूल एजेंडे में से सिर्फ यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होना बाकी है। कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच इसे खुद ही उठाया भी था। 22वां विधि आयोग इसके लिए रिपोर्ट भी तैयार कर रहा है। लेकिन, पीएम मोदी ने इस बार लाल किले से भाषण के दौरान इसे भी अछूता रख दिया है।

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अपनी सरकार के कार्यों पर कर रहे हैं फोकस
इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा चुनावों के सिलसिले में एनडीए सांसदों के साथ अलग-अलग ग्रुप में करीब 11 बैठकें कर चुके हैं। उन सबको उनका एक ही संदेश था कि 'गरीबी से बड़ी कोई जाति नहीं है', इसलिए वे सभी जातिगत बातों से ऊपर उठकर सिर्फ गरीबों के लिए ही काम करने पर जोर दें। उन्होंने सांसदों को उनकी और बीजेपी शासित राज्य सरकारों की ओर से चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं को लेकर भी जनता के बीच जाने को कह रखा है।

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पसमांदा मुसलमानों को हक दिलाने की बात
अगर हम पीएम मोदी की इन बातों को लाल किले से उनके ऐलान के साथ जोड़कर देखें तो बीजेपी के कोर एजेंडे से दूरी बनाने की उनकी बात समझ में आ सकती है। उन्होंने कहा है,
"हमें इन तीन बुराइयों के खिलाफ पूरे सामर्थ्य के साथ लड़ना है। भ्रष्‍टाचार, परिवारवाद, तुष्टिकरण.... यह चुनौतियां, ये ऐसी चीजें पनपी हैं, जो हमारे देश के लोगों का, जो आकांक्षाएं हैं, उसका दमन करती है।" इसके आगे उन्होंने कहा, "हमारे गरीब हों, हमारे दलित हों, हमारे पिछड़े हों, हमारे पसमांदा हों, हमारे आदिवासी भाई-बहन हों, हमारी माताएं-बहनें हों, हमने, सबने उनके हकों के लिए इन तीन बुराइयों से मुक्ति पानी है।"

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बीजेपी के तीनों मूल एजेंडे को क्यों छोड़ दिया?
यानी पीएम मोदी ने एक तरफ तुष्टिकरण खत्म करने की बात की है तो साथ ही साथ पसमांदा मुसमानों को उनका हक दिलाने की बात कही है। गौरतलब है कि बीजेपी के तीनों मूल एजेंडे की वजह से विरोधी उसपर सांप्रदायिक होने का आरोप लगाते रहे हैं। जबकि, दो एजेंडे पूरी तरह से संवैधानिक और कानूनी तरीके से ही हल हुए हैं। जबकि, तीसरा एजेंडा खुद संविधान में दी गई व्यवस्था का ही हिस्सा है। शायद यही वजह है कि अब भाजपा इन्हें तूल देने के बजाए, स्वाभाविक रूप से होने देना चाहती है। क्योंकि, वह मुसलमानों के एक बड़े वर्ग को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में, इसलिए शायद ऐसे मुद्दे छेड़कर वह उन्हें सामने से नाराज करने से बचना चाहती है।

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