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PM Kisan Yojana: 22वीं किस्त से पहले सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा, करोड़ों की किस्तों पर रोक

PM Kisan Yojana: उत्तर प्रदेश में पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत सामने आए हालिया फर्जीवाड़े ने कृषि विभाग से लेकर केंद्र सरकार तक हलचल मचा दी है। जिस योजना का उद्देश्य किसानों को आर्थिक सुरक्षा और खेती में स्थिरता देना था, उसी में अपात्र लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर पैसा लेने के मामले उजागर हुए हैं। जांच में ऐसे-ऐसे खुलासे हुए हैं, जो योजना की पारदर्शिता और भूमि रिकॉर्ड सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं-कहीं एक ही खेत पर दो लोग पैसा ले रहे थे, कहीं पति-पत्नी दोनों लाभार्थी बन गए, तो कहीं नाबालिग बच्चों के नाम पर किस्तें जारी होती रहीं।

करोड़ों किसानों को राहत देने वाली इस योजना में लाखों संदिग्ध नामों की पहचान होने के बाद अब पूरे प्रदेश में सख्त सत्यापन चल रहा है और विभाग ने हर जिले में विशेष निगरानी बढ़ा दी है। केंद्र सरकार ने विभिन्न विभागों और डिजिटल डाटा के मिलान के बाद 24.32 लाख संदिग्ध लाभार्थियों की सूची उत्तर प्रदेश सरकार को भेजी है। इनमें ऐसे लाभार्थी भी शामिल हैं, जो अवयस्क हैं और फिर भी योजना के तहत पैसा ले रहे थे। लगभग 45,875 अवयस्क लाभार्थियों का डाटा संदिग्ध पाया गया है।

PM Kisan

प्रदेश में जब योजना शुरू हुई थी, तब 2.88 करोड़ किसान इसका लाभ ले रहे थे, लेकिन लगातार सत्यापन के बाद अपात्र किसानों की संख्या कम होती गई। हाल ही में जारी 21वीं किस्त का लाभ केवल 2.15 करोड़ किसानों को ही दिया गया, जबकि लगभग 24,32,823 किसानों पर अपात्र होने का संदेह है।

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सबसे बड़ी गड़बड़ी, गलत भूमि स्वामी विवरण

सबसे ज्यादा मामले उन किसानों के हैं, जिनके भूमि स्वामी का विवरण गलत पाया गया। विभाग के अनुसार-

  • 12,30,192 किसानों ने जमीन के पूर्व स्वामी की गलत जानकारी दी हुई थी।
  • कई जिलों में पुराने और नए दोनों मालिक एक ही खेत पर किस्त ले रहे थे।
  • 3,11,099 मामलों में एक जमीन पर दो लोग लाभ ले रहे थे।
  • यह मामला राज्य में भूमि रिकॉर्ड अपडेट और सत्यापन की व्यवस्था पर भी सवाल उठाता है।

पति-पत्नी दोनों ले रहे थे लाभ

जांच में यह भी सामने आया कि हजारों परिवारों में पति और पत्नी दोनों योजना के लाभार्थी बन गए थे। नियमों के अनुसार परिवार में एक ही सदस्य को लाभ मिल सकता है।

  • ऐसे 5,53,749 संदिग्ध मामलों की सूची विभाग को मिली है।
  • बिना विरासत नामांतरण के भी जारी रहा लाभ

कई ऐसे मामले मिले हैं, जिनमें किसानों ने अपनी भूमि का नामांतरण विरासत के आधार पर नहीं कराया, फिर भी योजना का लाभ लेते रहे।

  • 2,91,908 किसान इस श्रेणी में संदिग्ध पाए गए।

ऐसे मामलों में विभाग ने अधिक सतर्कता से जांच करने के निर्देश दिए हैं।

जिला-वार सबसे ज्यादा संदिग्ध लाभार्थी

भूमि स्वामी की गलत जानकारी वाले जिले

  • जौनपुर - 61,033
  • सीतापुर - 46,729
  • आजमगढ़ - 45,564
  • सुलतानपुर - 42,628
  • प्रतापगढ़ - 41,245

पति-पत्नी दोनों लाभ लेने वाले जिले

  • प्रतापगढ़ - 37,233
  • प्रयागराज - 29,358
  • सीतापुर - 18,862
  • संभल - 18,413
  • बहराइच - 15,343

बिना विरासत नामांतरण वाले जिले

  • जौनपुर - 18,242
  • सुलतानपुर - 15,587
  • सीतापुर - 12,699
  • प्रतापगढ़ - 12,201
  • बुलंदशहर - 9,162

एक ही भूमि पर दो लाभार्थी वाले मामले

  • आजमगढ़ - 13,666
  • देवरिया - 10,916
  • जौनपुर - 11,018
  • अंबेडकरनगर - 9,195
  • कुशीनगर - 8,232

सत्यापन तेजी से जारी, रिपोर्ट केंद्र को भेजी जा रही

कृषि विभाग के सभी जिलों को विस्तृत सूची भेज दी गई है। हर जिले में एक-एक नाम का सत्यापन किया जा रहा है।
निदेशक कृषि डा. पंकज त्रिपाठी ने बताया कि केंद्र सरकार से जो संदिग्ध डेटा भेजा गया है, उसका मिलान लगातार किया जा रहा है। विभाग नियमित रिपोर्ट भेज रहा है और सत्यापन का काम जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

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