PM Kisan की 21वीं किस्त से पहले करोड़ों का स्कैम आया सामने! सरकार उठाएगी अब कौन सा कदम?
PM-Kisan Yojana Scam: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-Kisan Samman Nidhi Yojana), जिसे किसानों की आर्थिक रीढ़ मजबूत करने के लिए शुरू किया गया था, अब गड़बड़ी के कारण सवालों के घेरे में आ गई है। इस योजना का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को खेती में मदद के लिए सीधी आर्थिक सहायता देना है। लेकिन हाल ही की समीक्षा रिपोर्ट ने चौंकाने वाले तथ्य निकल कर सामने आए हैं। प्रदेशभर में लाखों दंपति पति-पत्नी मिलकर योजना का लाभ ले रहे हैं।
नियमों के मुताबिक परिवार में केवल एक सदस्य ही पात्र होता है। बावजूद इसके बड़े पैमाने पर दोहरा लाभ उठाने के मामले सामने आए हैं। गोंडा, बहराइच, सीतापुर और लखीमपुर खीरी जैसे जिलों में आंकड़े हजारों में पहुंच गए हैं। जिससे यह साफ हो गया है कि योजना को लागू करने में गंभीर खामियां रही हैं। फरवरी 2019 में शुरू हुई इस योजना के तहत हर तिमाही पात्र किसान के खाते में 2,000 रुपये आते हैं।

अब इसकी समीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। यूपी के गोंडा समेत सभी 75 जिलों में जांच के दौरान पाया गया कि लाखों दंपति मिलकर योजना का लाभ ले रहे हैं। जबकि नियम साफ है कि एक परिवार में पति-पत्नी में से केवल एक ही सदस्य लाभ लेने का हकदार है। 2 अगस्त को पीएम किसान की 20वीं किस्त जारी हो थी। दिवाली से पहले 21वीं किस्त आने की उम्मीद है।
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प्रदेश में 5.53 लाख दंपति अपात्र
समीक्षा रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े उजागर किए हैं। प्रदेशभर में 5,53,749 दंपति ऐसे मिले हैं जो एक साथ इस योजना का पैसा ले रहे हैं। सबसे ज्यादा मामले देवीपाटन मंडल में सामने आए, जहां 32,444 दंपति योजना का लाभ उठा रहे हैं।
जिलेवार आंकड़े देखें तो गोंडा में 9,073, बहराइच में 15,443, बलरामपुर में 4,081, श्रावस्ती में 3,947, लखनऊ में 4,724, हरदोई में 13,795, लखीमपुर खीरी में 17,881, रायबरेली में 13,626 और सीतापुर में 18,862 दंपति शामिल हैं। ये आंकड़े दिखाते हैं कि योजना का फायदा असली किसानों से ज्यादा उन लोगों तक जा रहा है जो गलत तरीके से इसे हासिल कर रहे हैं।
कृषि विभाग ने शुरू किया सत्यापन
गड़बड़ी सामने आने के बाद शासन स्तर से कृषि विभाग को सूची के आधार पर जांच के निर्देश दिए गए हैं। गोंडा के कृषि उप निदेशक प्रेम कुमार ठाकुर ने बताया कि दंपतियों की सूची विभाग को मिल चुकी है और उसका सत्यापन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, "सत्यापन पूरा होने के बाद जो भी लाभार्थी अपात्र पाए जाएंगे, उनसे गलत तरीके से मिली राशि वापस वसूली जाएगी। इसके लिए पत्र भेजकर जानकारी दी जाएगी।"
योजना का असली उद्देश्य
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का मकसद किसानों को आर्थिक संबल देना है। छोटे और सीमांत किसानों को खेती-किसानी में मदद देने के लिए यह योजना शुरू की गई थी।
- योजना की शर्तों के अनुसार, पात्र किसान परिवार में पति, पत्नी और नाबालिग बच्चे शामिल होते हैं। परिवार के नाम पर कृषि योग्य भूमि होना जरूरी है। साथ ही, लाभार्थी भारत का नागरिक होना चाहिए।
- योजना में कुछ वर्ग पहले से ही बाहर रखे गए हैं। इनमें संवैधानिक पद पर रहे या वर्तमान पदधारक, सरकारी अधिकारी, बड़े पेशेवर जैसे डॉक्टर, इंजीनियर, वकील और उच्च आय वाले लोग शामिल हैं।
गड़बड़ी पर उठ रहे सवाल
गड़बड़ी सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में दंपतियों ने एक साथ योजना का लाभ कैसे ले लिया। समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, डेटा मिलान और सत्यापन में लापरवाही की वजह से यह स्थिति बनी।
विशेषज्ञों का कहना है कि योजना का असली लाभ उन्हीं किसानों को मिलना चाहिए जिनके पास जीविका का मुख्य साधन खेती है। अगर गलत लोगों को पैसा जाता रहा, तो इससे असली किसानों का नुकसान होगा और योजना का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।
आगे क्या होगा?
अब सारी नजरें कृषि विभाग की जांच पर हैं। सत्यापन के बाद जिन दंपतियों ने गलत फायदा उठाया है, उनसे पैसा वापस लिया जाएगा। विभाग स्तर पर इसके लिए कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया से योजना पारदर्शी बनेगी और असली किसानों को सही तरीके से लाभ मिल सकेगा।
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