निधन के 5 साल पहले दवे ने जाहिर की थी यह 4 इच्छा, अब आई सामने
केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री रहे अनिल माधव दवे पर्यावरण के प्रति बेहद जूनूनी थे। नर्मदा नदी को जीवित करने में उनका बड़ा हाथ रहा है। उनके निधन के बाद एक वसीयतनामा सामने आया है।
नई दिल्ली। बीते कुछ दिनों से बीमार भारतीय जनता पार्टी के नेता और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री रहे अनिल माधव दवे अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन उन्होंने यह साबित कर दिया कि वो आखिरी सांस तक पर्यावरण के लिए चिंतित रहे।
दवे के निधन के बाद उनकी वसीयत सामने आई है, जिसमें उन्होंने लोगों से पर्यावरण बचाने की गुहार लगाई है।

चार बिंदुओं के पत्र में दवे ने कहा
अपने चार बिंदुओं के एक पत्र में अनिल दवे ने कहा है कि उनका अंतिम संस्कार नर्मदा के तट पर किया जाए। बता दें कि दवे, नर्मदा के उद्धार के लिए प्रभावकारी काम करने के लिए जाने जाते रहे हैं। दवे ने कहा है कि 'संभव हो तो मेरा दाह संस्कार' बद्राधाम में नदी महोत्सव वाले स्थान पर किया जाए।

दवे ने किया अनुरोध
पत्र में कहा गया है कि उनका अंतिम संस्कार सामान्य रूप से वैदिक तरीके से हो। दवे ने कहा है कि उत्तर क्रिया के रूप में केवल वैदिक कर्म ही हों, किसी भी प्रकार का दिखावा, आडंबर ना हो। दवे ने अपनी वसीयत में यह भी कहा है कि उनके करीबी लोग उनकी याद में कोई ना स्मारक बनाएं। दवे ने वसीयत में कहा है कि मेरी स्मृति में कोई स्मारक, प्रतियोगिता,प्रतिमा इत्यादि जैसे विषय कोई भी ना चलाए।

वृक्षों का करे संरक्षण
दवे ने पत्र के आखिरी बिन्दु में कहा है कि जो भी मेरी स्मृति में कुछ करना चाहते हैं वो कृप्या वृक्षों को बोने वा उनको संरक्षित करने का बड़ा कार्य करेंगे तो मुझे आनंद होगा। वैसे ही नदी - जलाशयों में अपनी सामर्थ्य अनुसार अधिकतम प्रयत्न भी किए जा सकेंगे। यह करते हुए भी मेरे नाम के प्रयोग से बचेंगे।

जब दवे ने मांगी माफी
अपनी वसीयत के आखिरी में दवे ने लिखा है कि सभी मुझे भाषा व लेखन दोष के लिए क्षमा करें। उन्होंने यह पत्र 23 जुलाई 2012 को लिखा गया था।
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