बाबरी मस्जिद के पैरोकार हाशिम अंसारी का 96 वर्ष की आयु में निधन
अयोध्या। बाबरी मस्जिद के पैरोकार हाशिम अंसारी का आज सुबर पांच बजे निधन हो गया। अंसारी 96 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे, आज सुबह उन्होंने अपने घर पर अंतिम सांस ली। मोहम्मद अंसारी रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के सबसे बुजुर्ग पैरोकार थे।

बाबरी मस्जिद के लिए लड़ रहे छह मूल लोगों में से अंसारी आखिर व्यक्ति थे, वह सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से 1961 से बाबरी मस्जिद की लड़ाई लड़ रहे थे। अंसारी उस वक्त वहां मौजूद थे जब 22 दिसंबर 1949 को बाबरी मस्जिद के भीतर भगवान राम की मूर्ति पायी गयी थी।
वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने फैजाबाद कोर्ट में सिविल जज के सामने हिंदू महासभा के इस जगह पर अवैध कब्जे का मामला दर्ज कराया था। वर्ष 1961 में अंसारी जब सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड अन्य पांच सदस्यों साथ बाबरी मस्जिद के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो अंसारी इन लोगों के साथ वादी बने। इस मामले में अंसारी के अलावा मोहम्मद फारुक, शहाबुद्दीन, मौलाना निसार, महमूद साहब थे।
ऐसे में अंसारी की मौत के बाद अयोध्या विवाद के एक दशक का अंत हो गया। 1949 में भगवान राम के बाबरी मस्जिद में स्थापना के वह चश्मदीद थे। जब यहां कोर्ट के आदेश पर मस्जिद का ताला खोलकर 1987 में भगवान राम की पूजा की गयी। अंसारी 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंश के भी चश्मदीद थे और 2010 में जब कोर्ट ने इस जगह को तीन हिस्सों में देने का फैसला दिया था तो भी अंसारी इसके गवाह बने।












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