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कौन थे IAF के विंग कमांडर कपिल सिंह, जिन्‍होंने युद्ध में PAK को चटाई धूल, Pilot Baba बन कह गए अलविदा

who was Pilot Baba: आध्यात्मिक गुरु और जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर 'पायलट बाबा' 20 अगस्‍त 2024 को निधन हो गया। पायलट बाबा ने 86 साल की उम्र में दिल्ली के अपोलो अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार हरिद्वार में किया जाएगा।

पायलट बाबा के इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट में उनके निधन की घोषणा की गई, जिसमें लिखा था, "ओम नमो नारायण, भारी मन और हमारे प्रिय गुरुदेव के प्रति गहरी श्रद्धा के साथ, दुनिया भर के सभी शिष्यों, भक्तों को सूचित किया जाता है कि हमारे पूज्य गुरुदेव महायोगी पायलट बाबाजी ने महासमाधि ले ली है।''

Pilot Baba

इंस्टाग्राम पोस्ट में आगे लिखा कि ''उन्होंने आज अपना नश्वर शरीर त्याग दिया है। यह सभी के लिए अपने घरों में शांत रहने और प्रार्थना करने का क्षण है। कृपया अराजकता और चिंता न करें। यह शांत रहने और उनके प्रति आभार व्यक्त करने का क्षण है। आगे के निर्देश सभी को बताए जाएंगे। नमो नारायण।"

दरअसल, पायलट बाबा का मूल नाम कपिल सिंह था और वे भारतीय वायुसेना (IAF) में विंग कमांडर थे। वे भारत-पाकिस्‍तान के बीच हुए दो युद्धों में बतौर लड़ाकू विमान पायलट के रूप में हिस्‍सा ले चुके थे। उसके बाद उन्होंने दुनिया को त्यागकर संत का दर्जा प्राप्त कर लिया था।

Mahamandleshwar of Juna Akhara

इसी उपाधि के कारण बाद में उन्हें 'पायलट बाबा' का नाम दिया गया। पायलट बाबा ने यह भी दावा किया था कि उन्होंने हिंदू महाकाव्य 'महाभारत' के महान योद्धा अश्वत्थामा से मुलाकात की थी, जो हिमालय की तलहटी में जनजातियों के बीच रह रहे थे।

Mahamandleshwar of Juna Akhara

पायलट बाबा ने कई किताबें भी लिखीं, जिनमें 'अनवील्स मिस्ट्री ऑफ हिमालय (भाग 1)' और 'डिस्कवर सीक्रेट ऑफ द हिमालय (भाग 2)' काफी चर्चित किताब हैं। हिमालय की तलहटी में पायलट बाबा ने 16 साल तक तपस्या की थी। तपस्‍या के दौरान अनुभवों को उन्‍होंने किताब में शेयर किया।

Mahamandleshwar of Juna Akhara

बिहार के रहने वाले थे पायलट बाबा

पायलट का जन्‍म बिहार के सासाराम में हुआ था। उन्‍होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में मास्टर डिग्री पूरी की और उसके साल 1957 में भारतीय वायु सेना ज्‍वाइन की थी।

IAF Pilot baba

भारत पाकिस्‍तान युद्ध 1965 और 1971 में पायलट बाबा को पाकिस्तान के कई शहरों के ऊपर कम ऊंचाई पर अपने लड़ाकू विमान उड़ाने के लिए जाना गया था।

Mahamandleshwar of Juna Akhara

1971 के युद्ध में भी पाकिस्‍तान को धूल चटाने के बाद कपिल सिंह ने भारतीय वायुसेना छोड़ और सात साल के लिए हिमायल की यात्रा। वहां अपने गुरु को पाया और संत का जीवन अपना लिया।

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