Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

केंद्र के दस एजेंसियों को कंप्यूटर जासूसी की इजाजत का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

नई दिल्ली। केंद्र के दस एजेसिंयों को किसी भी कंप्यूटर के सर्विलांस के अधिकार दिये जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस आदेश को वापस लिए जाने की मांग को लेकर वकील एम एल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश को गलत बताते हुए अदालत में इसके खिलाफ याचिका दायर की गई है। केंद्र के आदेश को रद्द करने की मांग को लेकर एक और याचिका अमित साहनी की ओर से भी दायर की गई है।

नई दिल्ली। केंद्र के दस एजेसिंयों को कंपयूटरों की जासूसी के अधिकार दिये जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस आदेश को वापस लिए जाने की मांग को लेकर वकील एम एल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश को गलत बताते हुए अदालत में इसके खिलाफ याचिका दी गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को एक अधिसूचना जारी कर दस एजेंसियों को ये कंप्यूटर में रखे डाटा,ऑनलाइन गतिविधियों और दूसरे क्रियाकलापों पर निगरानी के अधिकार दिए हैं। सूचनाओं की निगरानी हो सकती है और इन्हें डी कोड भी किया सकता है। पहले बड़े आपराधिक मामलों में ही कंप्यूटर या ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने, जांच और इन्हें जब्त करने की इजाजत थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आईबी और दिल्ली पुलिस कमिश्नर समेत 10 जांच एजेंसियों को अधिकार दिया है कि वो किसी भी कंप्यूटर को इंटरसेप्ट कर सकते हैं।जिन जांच एजेंसियों को यह अधिकार दिया है उनमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), खुफिया ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), राजस्व खुफिया निदेशालय, कैबिनेट सचिव (रॉ), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, डायरेक्टरेट ऑफ सिग्नल इंटिलिजेंस (सिर्फ जम्मू एवं कश्मीर, पूर्वोत्तर और असम के सेवा क्षेत्रों के लिए) और दिल्ली पुलिस आयुक्त हैं। किसी के कंप्यूटर में स्टोर डाटा की निगरानी और डिक्रिप्ट करने का दस केंद्रीय एजेंसियों को अधिकार दिए जाने के गृह मंत्रालय के फैसले पर विपक्ष आक्रामक है। विपक्षी नेता इसे आपातकाल कह रहे है।वहीं गृह मंत्रालय का कहना है कि आदेश सूचना एवं तकनीकी एक्ट में मौजूद विसंगतियों को दूर करके देश की सुरक्षा के लिए खतरा बने आतंकियों के डेटा को एक्सेस करने के लिए दिया गया है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को एक अधिसूचना जारी कर दस एजेंसियों को कंप्यूटर में रखे डाटा,ऑनलाइन गतिविधियों और दूसरे क्रियाकलापों पर निगरानी के अधिकार दिए हैं। इसके तहत सूचनाओं की निगरानी हो सकती है और इन्हें डीकोड भी किया सकता है। पहले बड़े आपराधिक मामलों में ही कंप्यूटर या ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने, जांच और इन्हें जब्त करने की इजाजत थी।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आईबी और दिल्ली पुलिस कमिश्नर समेत 10 जांच एजेंसियों को अधिकार दिया है कि वो किसी भी कंप्यूटर को इंटरसेप्ट कर सकते हैं।जिन जांच एजेंसियों को यह अधिकार दिया है उनमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), खुफिया ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), राजस्व खुफिया निदेशालय, कैबिनेट सचिव (रॉ), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, डायरेक्टरेट ऑफ सिग्नल इंटिलिजेंस (सिर्फ जम्मू एवं कश्मीर, पूर्वोत्तर और असम के सेवा क्षेत्रों के लिए) और दिल्ली पुलिस आयुक्त हैं।

किसी के कंप्यूटर में स्टोर डाटा की निगरानी और डिक्रिप्ट करने का दस केंद्रीय एजेंसियों को अधिकार दिए जाने के गृह मंत्रालय के फैसले पर विपक्ष आक्रामक है। विपक्षी नेता इसे आपातकाल कह रहे है।वहीं गृह मंत्रालय का कहना है कि आदेश सूचना एवं तकनीकी एक्ट में मौजूद विसंगतियों को दूर करके देश की सुरक्षा के लिए खतरा बने आतंकियों के डेटा को एक्सेस करने के लिए दिया गया है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+