इस साल असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती के लिए जरूरी नहीं होगी Phd, केंद्र सरकार ने लिया फैसला
नई दिल्ली, अक्टूबर 01। केंद्र सरकार ने अस्सिटेंट प्रोफसरों की भर्ती के लिए PhD को न्यूनतम योग्यता बनाने की योजना पर फिलहाल रोक लगा दी है। सरकार ने ये फैसला कोविड-19 महामारी की वजह से लिया गया है। इसके चलते इस वर्ष में अस्सिटेंट प्रोफसरों की भर्ती के लिए PhD को न्यूनतम योग्यता के रूप में नहीं रखा जाएगा। इस बारे में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जानकारी दी है।

कोरोना के कारण रुकी थी PhD
दरअसल, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 2018 में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रवेश स्तर के पदों पर भर्ती के लिए मानदंड तय किए थे। UGC ने उम्मीदवारों को अपनी PhD पूरी करने के लिए तीन साल का समय दिया था और सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को 2021-22 के शैक्षणिक सत्र में नयी नियुक्तियों के दौरान इन मानदंडों को लागू करने के लिए कहा था। हालांकि, महामारी के कारण, कई उम्मीदवार अपनी PhD पूरी नहीं कर सके। इन्होंने सरकार से इस साल इन नए मानदंड में ढील देने की अपील की थी।
लोगों के अपील के बाद लिया था फैसला
इस बारे में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, 'सरकार ने इस वर्ष के लिए सहायक प्रोफेसर पद के लिए PhD की अनिवार्यता पर रोक लगाने का फैसला किया है। हमें ऐसे उम्मीदवारों से बहुत सारे अनुरोध प्राप्त हो रहे थे जो इस पद के लिए आवेदन करना चाहते थे लेकिन अपनी PhD की अनिवार्यता को पूरा करने में असमर्थ थे।'
NET पास करने वालों की होगी भर्ती
एक अधिकारी ने बताया,'स्नातकोत्तर डिग्री वाले उम्मीदवार, जिन्होंने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) उत्तीर्ण की है, वे पद पर भर्ती के लिए पात्र बने रहेंगे। UGC जल्द ही इस फैसले के संबंध में सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को एक सर्कूलर जारी करेगा। इससे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को सभी खाली सीटों को जल्दी भरने में मदद मिलेगी।' आपको बता दें कि सितंबर में शिक्षा मंत्री ने सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों को अक्टूबर के अंत तक 6000 विषम शिक्षण रिक्तियों को भरने के लिए कहा था।
दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के सदस्य आभा देव हबीब ने सरकार के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'इससे विश्वविद्यालय के विभागों में तदर्थ शिक्षकों (Ad Hoc) को मदद मिलेगी जिनकी पुनर्नियुक्ति इस अनिवार्य पीएचडी के कारण लंबित रखी गई थी।' बता दें कि डूटा (DUTA) के प्रतिनिधियों ने 15 सितंबर को UGC के अधिकारियों से मुलाकात कर इस मुद्दे को उठाया था।












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