तेलंगाना में 2000 साल से ज्यादा लोगों की उम्र? सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
नई दिल्ली। तेलंगाना में अगली साल जून 2019 में विधानसभा चुनाव होने थे लेकिन वहां वक्त से पहले विधानसभा भंग कर दी गई और अब कहा जा रहा है कि इस साल आखिर तक वहां चुनाव करा दिए जाएंगे। इसे लेकर तैयारियां भी चल रही हैं। तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय ने 10 सितंबर को मतदाता सूची जारी की लेकिन इसमें जो आंकड़ें दिखाए गए हैं उसके बाद ये मामला अब देश की सर्वोच अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। चुनाव आयोग की माने तो तेलंगाना में कई लोगों की उम्र दो हजार साल से भी ज्यादा है।

तेलंगाना के सीईओ कार्यालय द्वारा 10 सितम्बर को जारी मतदाता सूची में कई मतदाताओं की उम्र दो हजार साल से ज्यादा दिखाई गई है। इस सूची में सौ साल से अधिक की उम्र के 21 हजार से ज्यादा लोग हैं। इनमें कई लोगों की उम्र तो 2017 वर्ष लिखी हुई है। हैदराबाद जिले के सिकंदराबाद कैंट विधानसभा क्षेत्र के राजेंदर भोगा की उम्र चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में 2017 साल बताई गई है। उन्हीं के परिवार में यदम्मा भोगा की उम्र भी 2017 साल लिखी गई है। इसी विधानसभा के क्षेत्र की भारती चिलुका की उम्र भी चुनाव आयोग ने 2017 साल बतायी है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
कांग्रेस अब इस पूरे मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है और मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाया है। ये याचिका कांग्रेस के पूर्व विधायक मैरी शशिधर रेड्डी की ओर से दाखिल की गई है। उन्होंने कहा है कि मनमाने ढंग से राज्य की मतदाता सूची में संशोधन किया गया है और इसमें कई गड़बड़ियां हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि वो राज्य चुनाव आयोग को निर्देशित करें कि वो मतदाता सूची में संशोधन के लिए तत्काल कदम उठाए मतदाताओं के आपत्तियों को सुनें।
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48 लाख विसंगतियां
रेड्डी ने कहा है कि राज्य में मतदाता सूची में शामिल 2.61 करोड़ लोगों में से लगभग 48 लाख में गड़बड़ियां हैं। उन्होंने दावा किया है कि प्रदेश में करीब 30.13 लाख डुप्लिकेट मतदाता हैं और कम से कम 18 लाख नाम ऐसे हैं जो तेलंगाना और आंध्र प्रदेश दोनों की मतदाता सूचियों में दर्ज हैं। 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग होकर तेलंगाना का गठन हुआ था। कांग्रेस ने ये भी कहा है कि लगभग 20 लाख नाम ऐसे हैं जो आंध्र प्रदेश के बताकर हटा दिए गए। याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता ने कांग्रेस पार्टी की ओर से इन खामियों के बारे में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भी अवगत कराया था।

तेलंगाना का पहला चुनाव
याचिका में कहा गया है कि ये संभव नहीं है कि चुनाव आयोग द्वारा दिए गए एक महीने के वक्त में इन गड़बड़ियों को दूर किया जा सके। अगर इस प्रक्रिया को इसी तरह जारी रखा गया तो 100 से ज्यादा निर्वाचन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर फर्जी मतदाता सूची में शामिल रहेंगे और सही लोगों वोट देने के अधिकार से वंचित रह जाएंगे। इससे निषपक्ष चुनाव कराने की प्रक्रिया पर असर पड़ेगा और ये मतदाताओं के साथ धोखाधड़ी होगी। ये विधानसभा चुनाव आधिकारिक तौर पर विभाजन के बाद तेलंगाना का पहला विधानसभा चुनाव होगा। अप्रैल-मई 2014 में जब चुनाव हुए थे तो उस वक्त तेलंगाना आंध्र प्रदेश का ही हिस्सा था।
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