सेना में स्थाई कमीशन: SC के आदेश के अनुपालन के लिए 72 महिला अधिकारियों ने रक्षा मंत्रालय को भेजा कानूनी नोटिस
नई दिल्ली, 19 अगस्त। सेना में महिलाओं को स्थाई कमीशन देने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश में हो रही देरी से परेशान भारतीय सेना की 72 महिला अधिकारियों ने रक्षा मंत्रालय को कानूनी नोटिस भेजा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सख्त अनुपालन करने के लिए कहा है।

इन अधिकारियों के एडवोकेट मेजर सुधांशु पांडे बताया कि 25 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इसके संबंध में आदेश दिया था। ये सभी महिला अधिकारी स्थाई कमीशन पाने की पूरी हकदार है। दो महीने का कोर्ट ने समय दिया था लेकिन इससे कही अधिक समय बीत चुका है। वहीं अब इस आदेश के आधार पर इन 72 महिला अधिकारियों की ओर से ये कानूनी नोटिस रक्षा मंत्रालय को भेजा गया है।
वकील सुधांशु पांडे ने बताया कि ये आदेश स्पष्ठ तौर पर रक्षा मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों को अपने बैच के पुरुष अधिकारियों के बेंचमार्क के साथ महिला अधिकारियों की तुलना नहीं करने से संबधित है। इसके साथ ही पिछले सितंबर 2020 में आयोजित नंबर 5 चयन बोर्ड की तरफ से अनुपयुक्त पाई गई सभी महिला अधिकारियों जिन्होंने 60 प्रतिशत अंक हासिल किया था उनको स्थायी कमीशन देने का आदेश दिया था। वकील के अनुसार कोर्ट ने इसे लागू करने के लिए दो महीने का समय दिया था लेकिन इसमें अभी भी देरी की जा रही है।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार सेना के अधिकारियों ने पूरे होने के बाद इस आधार पर स्पष्टीकरण मांगते हुए एक आवेदन दिया कि बोर्ड ने इन 72 महिला अधिकारियों को अयोग्य पाया है, भले ही वो निगेटिव कमेंट समेत अन्य कारणों से 60 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं। स्थाई कमीशन के लिए डिसक्वालीफिकेशन या सेना की ओर से दिए गए आदेश और सुप्रीम कोर्ट में इसकी सुनवाई के दौरान कभी संज्ञान में नहीं लाया गया।
वकील मेजर सुधांशु पांडेय ने जानकारी दी कि स्पष्टीकरण दो अगस्त को बिना किसी क्वालिफिकेशन के खारिज कर दिया गया। इसके बाद इन 72 महिला अधिकारियों को संस्पेन्डेड एनिमेशन के तहत रखा गया है। जिसके चलते ये सभी जबदरस्त ड्रिपेशन का शिकार हो गरही हैं। वकील ने ये भी आरोप लगाया कि अधीनस्थ अधिकारी महिला अधिकारियों के खिलाफ अपने गहरे पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं और वो उच्च अधिकारियों को इन अधिकारियों को स्थाई कमीशन से वंचित करने के लिए गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं ये देश की सर्वोच्च न्यायाल के आदेश की अवहेलना है।












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