'दिखाए गए सपने पूरे नहीं होते तो जनता पिटाई भी करती है', नितिन गडकरी का निशाना कौन?
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी इन दिनों सुर्खियों में बने हुए हैं। संघ के बेहद करीबी माने जाने वाले गडकरी बेबाकी से अपनी बात कहने के लिए जाने जाते हैं। केंद्रीय मंत्री की तौर पर उनके काम की तारीफ विपक्षी भी करते हैं, लेकिन इस समय उनके नाम की चर्चा सिर्फ उनके काम या बेबाक बयानी की वजह से नहीं हो रही है। कारण यह है कि बार-बार गडकरी के बयानों से मीडिया में बगावती सुगबुगाहट हो रही है। नितिन गडकरी ने हर बार सफाई दी है, लेकिन उनके मुंह से बात जब भी निकलती है, दूर तक चली जाती है। पिछले कुछ समय से गडकरी के बयान लगातार एक ही बात पर केंद्रित हैं और वो है- चुनाव पूर्व किए गए बड़े-बड़े वादे। यह बात सही है कि वह इसमें और पार्टियों का नाम भी जोड़ देते हैं, लेकिन गडकरी के इन बयानों से अटकलों का बाजार गर्म है। चर्चा है कि संघ और बीजेपी शीर्ष नेतृत्व के अंदर खाने कुछ चल रहा है। संभवत: चुनाव पूर्व किए वादे और उन्हें पूरा करने को लेकर खींचतान चल रही है। गडकरी के बार-बार एक ही बात पर केंद्रित बयान तो कम से कम इसी ओर इशारा कर रहे हैं।

दिखाए हुए सपने पूरे नहीं होते हैं तो उन नेताओं की लोग पिटाई भी करते हैं: गडकरी
अभी ज्यादा दिन नहीं बीते हैं, जब आरएसएस से आग्रह किया गया कि नरेंद्र मोदी की जगह गडकरी को पीएम बनाया जाए। वसंतराव नाइक ने बाकायदा आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को इस बारे में पत्र लिखा। बाद में गडकरी ने मामला टाल दिया, लेकिन इस बार उनका खुद का बयान सामने आया है, जिसके कई मतलब निकाले जा रहे हैं। द टेलिग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, नितिन गडकरी ने एक पत्रकार के सवाल के जवाब में कहा, 'सपने दिखाने वाले लोगों को अच्छे लगते हैं, पर दिखाए हुए सपने पूरे नहीं होते हैं तो उन नेताओं की लोग पिटाई भी करते हैं।' गडकरी ने अपनी चिरपरिचित मुस्कान के साथ यह बात कही। वह 'निर्मल और अविरल' गंगा में एयरबोट चलाए जाने के ड्रीम प्रोजेक्ट के बारे में बात कर रहे थे, इसी दौरान उन्होंने नेताओं की पिटाई वाला यह बयान दिया है।

चुनाव में किए गए वादों को पूरा करना आर्थिक नजरिए से संभव नहीं: गडकरी
कुछ दिनों पहले भी नितिन गडकरी ने एक चैनल के कार्यक्रम में खुलकर कहा कि चुनाव के दौरान किए जाने वाले वादे जीतने के लिए होते हैं, न कि प्रैक्टिकल। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए किए गए वादों को पूरा करना आर्थिक नजरिए से संभव नहीं होता, लेकिन हम चुनाव में ऐसा करते हैं। यह बात किसी भी पार्टी के साथ होती है।

पहले भी वायरल हुआ था नितिन गडकरी का वीडियो, उस वक्त गडकरी ने कर दिया था खंडन
इससे पहले ऐसा मौका आया जब नितिन गडकरी के बयान का निशाना अपनी ही पार्टी की ओर होता प्रतीत हो रहा है। इससे पहले भी एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें दावा किया गया कि गडकरी ने इस बात को स्वीकार किया कि बीजेपी ने 2014 लोकसभा चुनाव बड़े-बड़े वादे किए, क्योंकि पार्टी को सत्ता में आने का भरोसा नहीं था। नितिन गडकरी का यह वीडियो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया था। हालांकि, उस वक्त गडकरी यह कहकर बच निकले थे कि राहुल गांधी को मराठी कब से आनी लगी। गडकरी ने वीडियो के आधार पर उनके हवाले से कही गई बातों को खारिज कर दिया था।












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