सोशल मीडिया पर लोगों ने पूछा- 20 लाख करोड़ में कितने जीरो, जानें कितनी मोटी है ये रकम
नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी ने मंगलवार रात आठ बजे कोरोना संकट के बीच राष्ट्र के नाम अपने पांचवें संबोधन में देश के लिए 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। इस पैकेज की पूरी जानकारी आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शाम 4 बजे देंगी। 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर 20 लाख करोड़ में कितने जीरो होते हैं ? जैसे सवाल लोग पूछ रहे हैं।

20 लाख करोड़ में 13 शून्य होते हैं
पीएम मोदी ने के 20 लाख करोड़ के पैकेज पर कई लोग यह भी जानने की कोशिश कर रहे हैं कि यह कुल कितनी रकम है और इसमें कितने शून्य आते हैं। इस सवाल पर कॉमेडियन कुणाल कामरा ने बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा पर तंज भी कसा है। हम आपको बताते हैं कि, 20 लाख करोड़ रुपये में कितने जीरो होते हैं। 20 लाख करोड़ या 20 ट्रिलियन (20,000,000,000,000) में 13 शून्य होते हैं। यह भारत का कुल सकल घरेलू उत्पाद यानि कि जीडीपी का 10 फीसदी है।
ये आर्थिक पैकेज पाकिस्तान जैसे देश के कुल बजट का करीब 6 गुना ज्यादा
इस लिहाज से यह कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे देशों द्वारा घोषित बड़े पैकेजों में सुमार हो गया है। हालांकि सरकार इसमें हाल में कोरोना के खिलाफ जंग में सरकार द्वारा जारी की गई रकमों को भी शामिल किया गया है। अगर इस पैकेज की तुलना पाकिस्तान के बजट से करें तो भारत का ये आर्थिक पैकेज पाकिस्तान जैसे देश के कुल बजट का करीब 6 गुना ज्यादा है। पाकिस्तान सरकार ने साल 2019-20 में करीब 3.30 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया था।

पीएम मोदी ने कहा कि देश की नींव 5 पिलर पर टिकी हुई है
देश के नाम अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि देश की नींव 5 पिलर पर टिकी हुई है। ये 5 पिलर- इकोनॉमी, इंफ्रास्ट्रक्चर, सिस्टम, डेमोग्राफी और डिमांड हैं। पीएम मोदी ने कहा कि 'आत्मनिर्भर भारत' की ये भव्य इमारत इन्ही 5 पिलर पर खड़ी होगी। पहला पिलर इकॉनमी, दूसरा पिलर है इन्फ्रास्ट्रक्टर, एक ऐसा Infrastructure जो आधुनिक भारत की पहचान बने। तीसरा पिलर है हमारा सिस्टम- एक ऐसा सिस्टम जो बीती शताब्दी की रीति-नीति नहीं, बल्कि 21वीं सदी के सपनों को साकार करने वाली, टेक्नोलॉजी ड्रिवेन व्यवस्थाओं पर आधारित हो। चौथा पिलर है हमारी डेमोग्राफी- दुनिया की सबसे बड़े लोकतंत्र में हमारी वाइब्रेंट डेमोग्राफी हमारी ताकत है, आत्मनिर्भर भारत के लिए हमारी ऊर्जा का स्रोत है। पांचवां पिलर है डिमांड- हमारी अर्थव्यवस्था में डिमांड और सप्लाई चेन का जो चक्र है, जो ताकत है, उसे पूरी क्षमता से इस्तेमाल किए जाने की जरूरत है।












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