'पेगासस' ही नहीं, सिर्फ 500 रुपये में लोगों के फोन हो रहे हैक, देश में कोई भी सुरक्षित नहीं
नई दिल्ली, 20 जुलाई: हाल ही में अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने 'पेगासस प्रोजेक्ट' नाम से एक रिपोर्ट जारी की। जिसमें दावा किया जा रहा कि भारत के 300 से ज्यादा लोगों की जासूसी हो रही है। इस लिस्ट में कई पत्रकार और नेता शामिल हैं। आम जनता इसे बड़े लोगों का मामला बोलकर नजरअंदाज कर दे रही, लेकिन देश में साइबर सुरक्षा की स्थिति काफी ज्यादा गंभीर है। साइबर क्राइम होने के बाद सरकार ने कार्रवाई के लिए कई नियम बना रखे हैं, लेकिन उसे रोकने के लिए सख्त कदम नहीं उठाए जा रहे। जिस वजह से आज देश में किसी की जासूसी करवाने के लिए लाखों रुपये खर्च करने की जरूरत नहीं है, बल्कि 400-500 रुपये में आप किसी का भी फोन हैक करवा सकते हैं।

पेगासस से बड़ा खतरा
वनइंडिया की टीम ने जब देश के जाने-माने साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट मुकेश चौधरी से स्पाईवेयर को लेकर बात की, तो उन्होंने कई हैरान कर देने वाले खुलासे किए। मुकेश के मुताबिक भारत में स्पाईवेयर काफी सालों से चल रहा है। जरूरी नहीं है कि सरकार या सुरक्षा एजेंसियां ही आपकी जासूसी करवा रही हों। कई बार तो घरवाले, रिश्तेदार और बिजनेस पार्टनर भी लोगों की जासूसी करवाते हैं। देखने में ये जासूसी छोटी लगती है, लेकिन ये पेगासस से भी बड़ा खतरा है, क्योंकि कम लागत में इससे ज्यादा लोगों को टारगेट किया जा सकता है।
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कई वेबसाइट्स हैं मौजूद
मुकेश के मुताबिक एंड्रॉयड और आईफोन के लिए बहुत से स्पाईवेयर आते हैं। इसके लिए बहुत सी वेबसाइट्स भी मौजूद हैं। उसमें से किसी वेबसाइट पर जाकर आप अकाउंट क्रिएट करिए। इसके बाद वहां पर आपको महीने या साल के सब्सक्रिप्शन का ऑप्शन मिलेगा। उसमें से कोई एक सब्सक्रिप्शन खरीद लीजिए, फिर आप जिसे चाहें, उसे टारगेट कर सकते हैं। सारा प्रोसेस पूरा होने के बाद साइट आपको एक लिंक देगी, जिसे आपको दूसरे शख्स के फोन में किसी तरह इंस्टाल करना है। लिंक के जरिए जैसे ही दूसरी पार्टी के फोन में ऐप इंस्टाल होगा, वैसे ही आप उसकी पूरी जासूसी कर सकते हैं। छोटे मामलों में तो इसकी लागत 400-500 या फिर 1000-2000 रुपये हो सकती है।

नहीं लगेगी भनक
कई बार आपकी जासूसी करवाने वाला शख्स आपसे फोटो खिंचाने या कॉल करने के बहाने से आपका फोन लेगा। इसके बाद वो स्पाईवेयर इंस्टाल कर देगा। ये स्पाईवेयर कुछ KB के होते हैं, ऐसे में ये चंद सेकंड में इंस्टाल भी हो जाते हैं। अगर एक बार जासूसी वाला ऐप आपके फोन में इंस्टाल हो गया, तो आपको उसकी भनक भी नहीं लगेगी। अगर आप रनिंग ऐप में जाएंगे, तो भी वहां पर ये स्पाईवेयर नाम से नहीं दिखेगा, बल्कि वहां पर उसका नाम ऐसे शो करेगा, जिससे आपको शक ना हो, जैसे- Wifi, Bluetooth।

सारी बातें हो जाएंगी रिकॉर्ड
मुकेश ने आगे बताया कि अगर किसी तरह आपके फोन में स्पाईवेयर पहुंच गया, तो उसे पकड़ना मुश्किल है। इसके बाद हैकर्स आपकी हर मूवमेंट जान सकता है। यहां सबसे बड़ा खतरा आपकी सारी बातें सुनने का रहता है, क्योंकि फोन का माइक हमेशा ऑन रहता है। अगर आप किसी मीटिंग में फोन लेकर बैठे हैं, तो हैकर माइक के जरिए वहां की सारी बातें रिकॉर्ड कर सकता है। बाद में इंटरनेट के जरिए उसे अपने सिस्टम में ट्रांसफर कर आपकी सारी बातें सुन सकता है। इसके अलावा हैकर जब चाहे तब आपके फोन के जरिए फोटो क्लिक या रिकॉर्डिंग कर सकता है। ये सब इतने चुपके से होगा कि आपको खबर भी नहीं लगेगी।

हर साइट इंडिया में खुल रही
साइबर एक्सपर्ट के मुताबिक अगर किसी तरह की हैकिंग होती है, तो उसे आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत अपराध माना जाता है, लेकिन भारत में सरकार ने ऐसे कोई कदम नहीं उठाए हैं, जिससे स्पाईवेयर को रोका जा सके। इंटरनेट पर हजारों स्पाईवेयर की साइटें मौजूद हैं, जो कम दाम में लोगों की जासूसी कर रही हैं, जबकि इन सब साइटों को सरकार को बहुत पहले की ब्लॉक कर देना था।

क्या बचने का कोई तरीका है?
स्पाईवेयर से बचने का कोई ठोस तरीका नहीं है। अगर आप रजिस्टर्ड एंटीवायरस खरीदते हैं, तो काफी हद तक आपको सुरक्षा मिल सकती है, लेकिन ज्यादातर मामलों में हैकर्स एंटीवायरस को कोडिंग के जरिए बाईपास कर देते हैं। साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट मुकेश के मुताबिक आप किसी को फोन इस्तेमाल करने ही ना दें, क्योंकि ज्यादातर मामलों में बहुत करीबी ही आपकी जासूसी करवाते हैं। अगर आपको लग रहा कि कोई आपकी जासूसी करवा रहा, तो फोन के सेटिग्स में जाइए, वहां पर आपको रनिंग ऐप का ऑप्शन मिलेगा। फिर जो भी संदिग्ध बैकग्राउंड ऐप दिखे किसी एक्सपर्ट से उसकी जांच करवाएं। वैसे स्पाईवेयर को आप अनइंस्टाल नहीं कर सकते हैं, ऐसे में फोन और वीडियो समेत सभी चीजों का बैकअप लेकर पूरा फोन फार्मेट कर दें।

फोन खरीदते वक्त दें ध्यान
आमतौर पर लोग फोन कैमरा और रैम देखकर खरीद लेते हैं, जबकि ऐसा करने से बचना चाहिए। सबसे पहले आप उसका ऑपरेटिंग सिस्टम देंखें। उदाहण के तौर पर मौजूदा वक्त में एंड्रॉयड का 10 वर्जन चल रहा और आप एंड्रॉयड 6 वर्जन लेकर घूम रहे तो आप आसानी से हैकर्स का निशाना बन सकते हैं। वहीं अगर आपका फोन पुराना है, तो वक्त-वक्त पर नए अपडेट इंस्टाल करते रहें। साथ ही सेटिंग्स में जाकर अननोन ऐप्स इंस्टाल का ऑप्शन बंद रखें। अगर आपके पास कोई अननोन फाइल या लिंक आता है, तो डरें नहीं, सबसे पहले virustotal.com पर जाकर उस लिंक या फाइल को स्कैन करें। यहां पर आपको 60 से ज्यादा एंटीवायरस मिल जाएंगे। अगर आपकी फाइल सेफ है, तो सभी एंटीवायरस पर हरा निशान बनकर आ जाएगा। अगर कोई खतरा है, तो ये आपको अलर्ट कर देगा। बस ध्यान रहे कि कोई कॉन्फिडेंशियल फाइल इस पर ना स्कैन करें, क्योंकि ये साइट दुनियाभर के 60 से ज्यादा एंटीवायरस के सर्वस को आपकी फाइल स्कैन करने के लिए भेजती है, ऐसे में उसके लीक होने का खतरा रहता है।












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