जलमग्न हुई बिहार की राजधानी पटना, फिर भी मॉनसून सामान्य से कम
पटना। सितंबर के आखिरी दिनों में हुई जमकर बारिश ने बिहार की राजधानी पटना को जलमग्न कर दिया है। चारों तरफ पानी ही पानी है और शहरी इलाके तल जलमग्न हो चुके हैं। राजेंद्रनगर में डिप्टी सीएम सुशील मोदी चार दिनों तक बाढ़ में घिरे रहे, इसके बाद एनडीआरएफ की टीम ने उनको और उनके परिवार को रेस्क्यू किया। इस बाढ़-बारिश से अब तक 32 लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश ने लोगों को परेशान कर रखा है।

पटना में 26 से 29 सितंबर के बीच कुल 210.8 मिमी बारिश हुई। 2019 में 26 सितंबर से 29 सितंबर के बीच 210.8 मिमी बारिश के करीब आने वाले पांच साल 1963 (198.1 मिमी), 1960 (136.1 मिमी), 2007 (126.7 मिमी), 1989 (117.8 मिमी), और 1902 (116.8 मिमी) हैं।
पटना अकेला ऐसा शहर नहीं है जहां असामान्य रूप से अधिक बारिश हुई है। बिहार में 26 से 29 सितंबर तक 181.9 मिमी बारिश हुई है, जो इन पांच सबसे ज्यादा बारिश वाले सालों की तुलना में काफी अधिक है। पूरे बिहार में हुई औसत 181.9 मिमी बारिश पटना में हुई 210.8 मिमी बारिश से कम है। अगर 25 सितंबर, 2019 के बाद के सप्ताह को छोड़ दिया जाए, तो पटना और बिहार में क्रमशः -35% और -18% तक मानसून की बारिश हुई।
आश्चर्यजनक रूप से पटना और बिहार में इस साल कुल वर्षा एलपीए बारिश से कम है। 1 जून से 29 सितंबर के बीच पटना और बिहार में कुल बारिश केवल 86% और LPA की 98% थी। एलपीए 1951 और 2000 के बीच औसत वर्षा है। फिर भी जितनी बारिश हुई है पटना में, लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शहरी इलाकों में पानी निकालने की मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। एनडीआरएफ की टीमें लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं। नावों के जरिए लोग एक स्थान से दूसरे स्थान जा रहे हैं।
एनडीआरएफ की 22 टीमों को तैनात किया गया है जिसमें से 6 पटना में तैनात हैं। बचाव और राहत कार्यों में 2 आईएएफ के हेलीकॉप्टर तैनात हैं। बिहार में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता में एनसीएमसी की बैठक बुलाई गई है।












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